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Varanasi News: NGT ने गंगा किनारे टेंट सिटी बसाने मामले में फैसला सुरक्षित किया, 32 महीने में 18 बार सुनवाई

Sat, 13 Dec 2025 06:19 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 13 Dec 2025 06:19 AM IST
सार

Tent City in Varanasi: राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि अपर मुख्य सचिव पर्यावरण विभाग ने जुर्माना वसूलने के लिए गुजरात सरकार को पत्र लिखा है। टेंट सिटी बसाने वाली कंपनियां गुजरात की ही थीं।

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Varanasi News NGT reserves decision in case of setting up tent city on banks of Ganga hearing 18 times
टेंट सिटी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

Varanasi News: गंगा उस पार रेती पर टेंट सिटी बसाने के मामले में एनजीटी ने शुक्रवार को सुनवाई की और फैसला सुरक्षित कर लिया। अगली सुनवाई के दौरान मामले में आदेश आ सकता है। एनजीटी की प्रधानपीठ के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने शुक्रवार को टेंट सिटी मामले की सुनवाई पूरी की है। 32 महीने में 18 बार सुनवाई हुई और अब फैसला सुरक्षित कर लिया गया। 

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने एनजीटी को बताया कि मामले में गलत तथ्य पेश किए जा रहे हैं। एनजीटी के स्पष्ट आदेश के बाद भी टेंट सिटी बसाने वाली कंपनियों से जुर्माना नहीं वसूला गया। वाराणसी और चंदौली के जिलाधिकारी के पत्र भी प्रस्तुत किए गए। इसमें जिलाधिकारी कह रहे हैं कि उनके राजस्व क्षेत्र में टेंट सिटी नहीं बसाई गई थी। अब सवाल उठता है कि टेंट सिटी किस जिले में बसी थी? टेंट सिटी बसाने के लिए नेशनल मिशन फाॅर क्लीन गंगा से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। 

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जुर्माना जमा करिए नहीं तो एनजीटी स्वयं तय करेगा जुर्माने की राशि
एनजीटी ने टेंट सिटी बसाने वाली कंपनियों के अधिवक्ता से कहा कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि जमा करिए। ऐसा नहीं हुआ तो एनजीटी स्वयं पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि को पुन: निर्धारित करेगा क्योंकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जुर्माने की राशि बेहद कम रखी है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता ने भी कहा कि टेंट सिटी के संचालन की आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।

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अनुमति के बगैर कछुआ सेंचुरी का विस्थापन सर्वोच्च् न्यायालय के आदेश के खिलाफ
एनजीटी के समक्ष कछुआ सेंचुरी की अधिसूचना रद्द करने और उसे दूसरी जगह शिफ्ट करने पर भी बहस हुई। प्रदेश सरकार की तरफ से कहा गया कि कछुआ सेंचुरी को विस्थापित करने का मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। लिहाजा एनजीटी के समक्ष मामले को नहीं उठाया जा सकता है। एनजीटी ने राज्य सरकार के वकील से कहा कि किसी सेंचुरी के क्षेत्रफल को बढ़ाया घटाया जा सकता है लेकिन उसको पूरी तरह से विस्थापित नहीं किया जा सकता है।

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137 दिनों तक अस्तित्व में थी टेंट सिटी
राज्य सरकार की तरफ से अहमदाबाद की दोनों टेंट कंपनियों प्रवेश कम्युनिकेशन एवं लल्लू जी एंड सन्स पर 34.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। टेंट सिटी 137 दिनों तक गंगा की तलहटी में अस्तित्व में थी और प्रत्येक दिन के हिसाब से साढ़े 12 हजार रुपये के हिसाब से पर्यावरणीय नुकसान के लिए जुर्माना लगाया गया। याचिकाकर्ता तुषार गोस्वामी ने 12 मार्च 2023 को पर्यावरणीय नियमों के विरुद्ध गंगा नदी तल में टेंट सिटी बसाने के विरुद्ध एनजीटी के समय याचिका दायर की गई थी।

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