फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rath Yatra Fair Jagannath chariot with 21 feet wide 18 feet high silver flag built in 1802

रथयात्रा मेला: 21 फीट चौड़े, 18 फीट ऊंचे चांदी के ध्वज वाले रथ पर होंगे जगन्नाथ, 1802 में बना हुआ था निर्माण

Fri, 05 Jul 2024 05:46 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 05 Jul 2024 05:46 AM IST
सार

Varanasi News: काशी के लक्खा मेले में शुमार जगन्नाथ जी की रथयात्रा की शुरुआत सात जुलाई से हो जाएगी। हर वर्ष होने वाले इस आयोजन में दूर-दराज से भक्त प्रभु का आशीर्वाद लेने आते हैं। इस बार रथ की आकर्षकता और भी विहंगम होगी।

विज्ञापन
Rath Yatra Fair Jagannath chariot with 21 feet wide 18 feet high silver flag built in 1802
भगवान जगन्नाथ का रथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नाथों के नाथ भगवान जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देने के लिए काशी की गलियों में निकलेंगे। श्रीयंत्राकार रथ पर जब भगवान जगन्नाथ विराजमान होते हैं तो काशीवासियों के साथ देवराज इंद्र भी उनकी अगवानी करते हैं। 222 सालों से निकल रही रथयात्रा को काशी का पहला लक्खा मेला यूं ही नहीं कहा जाता है।

विज्ञापन


रथयात्रा मेले के साथ ही काशी में मेलों की शुरुआत होती है जो अनवरत देव दीपावली तक चलती रहती है। छह जुलाई को भगवान जगन्नाथ काशी की गलियों में भ्रमण के लिए निकलेंगे और सात जुलाई से तीन दिवसीय रथयात्रा मेला शुरू होगा।
विज्ञापन


भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के विग्रह को सात जुलाई की भोर में रथ में विराजमान कराया जाएगा। जिस स्थान पर सचल रथ स्वरूप मंदिर खड़ा किया जाता है वह पूरा मार्ग तीन दिनों के लिए मंदिर हो जाता है। भगवान का रथ शीशम की लकड़ी से श्रीयंत्र के आकार में बना हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


रथ की चौड़ाई 21 फीट और ऊंचाई 18 फीट है। रथ के प्रथम तल पर चारों तरफ पहियों के ऊपर 14 खंभे और द्वितीय तल पर अष्टकोणीय गर्भगृह में छह खंभे हैं। सामने लाल रंग के दो आधे खंभे हैं जो बाहर से तीन तरफ से अच्छादित हैं। रथ की छतरी अष्टकोणीय कमानीदार है। इसमें आठ कमानियां लगी हुई हैं। इसका रंग अंदर से पीला और बाहर से लाल है।

रथ की छतरी के अग्र भाग में ऊपर बाएं नीले रंग के कपड़े का छाता और नीले रंग के कपड़े का शंखाकार झंडा और उसी प्रकार शंखाकार झंडे सफेद रंग के कपड़े का छाता और सफेद रंग का शंखाकार झंडा लगाया जाता है। रथ का गुंबद लाल रंग का और अष्टकोणीय है। इसमें सामने दाहिने और बायीं ओर मगरमच्छ लगे हुए हैं।

रथ के शिखर पर लगता है चांदी का ध्वज
भगवान के रथ के शिखर पर चांदी का ध्वज और चक्र लगाने की व्यवस्था है। जब भगवान रथ पर सवार होते हैं तब चांदी के डंडे में चांदी का ध्वज लगाया जाता है। इसमें दोनों ओर हनुमान जी विराजमान हैं। त्रिकोणीय ध्वज की ऊंचाई पांच फीट और लंबाई डंडे से नोक तक तीन फीट है।

अष्टकोणीय गर्भ गृह के मुख्य द्वार के ऊपर सामने रजत पत्र पर केंद्र में श्रीगणेश जी एवं ऋद्धि-सिद्धि विराजमान हैं। नीचे दाहिने सूर्यदेव और बाएं चंद्रदेव विराजमान हैं। दाहिने ओर बाएं द्वार के ऊपर श्रीकृष्णजी नृत्य की मुद्रा में विराजमान हैं। उसके नीचे दायीं ओर मेरू यंत्र और बायीं ओर श्रीविष्णुदेव यंत्र है।

यंत्राकार रथ में लोहे के कुल 14 पहिये लगे हैं। हर पहिये में 12 तीलियां हैं। जिसमें आगे के दो पहियों में रथ को घुमाने के लिए 2006 में स्टीयरिंग की व्यवस्था की गई है। इसका संचालन रथ के पीछे से किया जाता है। रथ के अग्रभाग के केंद्र में सारथी विराजमान होते हैं जो कांस्य धातु के हैं। इस पर चांदी के पानी की पॉलिश है। रथ के आगे दो कांस्य के अश्व लगाए जाते हैं। इनके ऊपर चांदी के पानी की पॉलिश होती है।

Rath Yatra Fair Jagannath chariot with 21 feet wide 18 feet high silver flag built in 1802
प्रह्लाद घाट स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

1802 में हुआ था रथ का निर्माण
जगन्नाथ मंदिर की स्थापना पंडित बेनीराम और पंडित विश्वंभर ने सन 1790 में की थी। इसके बाद सन 1802 में रथ का निर्माण कराया गया और काशी के पहले लक्खा मेले रथयात्रा की शुरुआत हुई।

इसके बाद श्रीराव प्रहलाद दास शापुरी ने सन 1965 में रथ के कलेवर को बदल दिया। इसके निर्माण में पुराने रथ के काष्ठ का प्रयोग भी किया गया था। उनके निधन के बाद उनके पुत्र दीपक शापुरी और आलोक शापुरी रथयात्रा महोत्सव का संचालन कर रहे हैं।

सिर्फ जगन्नाथ जी अपने परिवार के साथ निकलते हैं मंदिर के गर्भगृह से
जगन्नाथ मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठित प्रतिमाएं कभी गर्भगृह से बाहर नहीं निकलती हैं। केवल भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के विग्रह अपने गर्भगृह से तीन दिनों की रथयात्रा के लिए बाहर निकलते हैं।

रथयात्रा मेले के दौरान सादे कपड़ों में तैनात रहेंगे पुलिस कर्मी
तीन दिवसीय रथयात्रा मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर अपर पुलिस आयुक्त एस चनप्पा बीती शाम जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर के मुख्य पुजारी राधे श्याम पांडेय से रथयात्रा निकलने से लेकर दर्शन-पूजन के क्रम सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बातचीत की। 

कहा कि बैरिकेडिंग कराने के साथ ही अस्सी से रथयात्रा तक प्रत्येक महत्वपूर्ण पॉइंट पर पुलिस तैनात की जाएगी। रथयात्रा क्षेत्र में रूट डायवर्जन की व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सादे कपड़ों में महिला-पुरुष पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे। 

इसके साथ ही दमकल का वाहन भी मेला क्षेत्र में रहेगा। इस दौरान उन्होंने भेलूपुर और सिगरा थानाध्यक्ष को रथयात्रा मेले के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्देश दिया।

राजातालाब में काशीराज परिवार के सदस्य खीचेंगे भगवान का रथ

राजातालाब में लगने वाले रथयात्रा मेले का रथ काशीराज परिवार के सदस्य ही खींचते हैं। सात और आठ जुलाई को लगने वाले रथयात्रा मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। रथयात्रा की शुरुआत राजातालाब स्थित महाराज के पुराने किले में स्थित महाराज बलवंत सिंह महाविद्यालय परिसर से होगी।

सात जुलाई से शुरू होने वाले रथयात्रा मेले में काशीराज परिवार के अनंत नारायण सिंह रथ खीचेंगे और इसके बाद श्रद्धालु हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए रथ को खींचकर भैरव तालाब तक ले जाते हैं। इस समय रथ की मरम्मत का कार्य चल रहा है। 

ठाकुर जी के मंदिर में रथ को ठीक किया जा रहा है। निर्माण कार्य की देखरेख राजेश्वर नारायण सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि रथ को दुरुस्त किया जा रहा है। दूसरी ओर राजातालाब के प्राचीन किले में काशीराज परिवार के अनंत नारायण का दरबार लगाने की तैयारी की जा रही है। दरबार का रंग रोगन कर दिया गया है और क्षेत्र के सम्मानित लोगों को निमंत्रण पत्र भेजा जा चुका है।

रथयात्रा के दिन रथ को खींचने से पूर्व अनंत नारायण सिंह अपने नजदीकियों से बातचीत करने और नजराना प्राप्त करने की रस्म निभाते हैं। क्षेत्र के जक्खिनी, वीरभानपुर, मोतीकोट, बखरिया आदि गांव के लोगों को निमंत्रित करने की परंपरा चली आ रही है। 

जक्खिनी निवासी अमरेश्वर नारायण सिंह, मोतीकोट निवासी तोयज सिंह और बखरियां निवासी राजेश सिंह बताते हैं कि वे लोग महाराज के साथ दरबार में विचार विमर्श करते हैं और सभी लोगों का हाल-चाल लेते हैं। रथ भैरव तालाब में दो दिन लक्ष्मी नारायण पर मंदिर पर रुका रहता है और श्रद्धालु भक्तजन भगवान जगन्नाथ के दर्शन पूजन करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed