Varanasi News: सारनाथ कछुआ प्रजनन एवं पुनर्वास केंद्र में 300 नन्हे कछुओं का हुआ जन्म, ऐसे होती है हैचिंग
कछुओं के लिए केंद्र में कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं, जहां उन्हें प्राकृतिक जैसा वातावरण मिलता है। किशोर कछुओं के लिए अलग तालाब हैं, जबकि 50 किलोग्राम तक के बड़े कछुओं को नए पुनर्निर्मित तालाबों में रखा गया है।
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सारनाथ स्थित कछुआ प्रजनन एवं पुनर्वास केंद्र भारत की जलीय जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में इस केंद्र में 300 छोटे कछुओं ने जन्म लिया है। यहां पहले से ही कछुओं की संख्या 1354 है।
केंद्र में कछुओं की निगरानी अंडे सेने (हैचिंग) से की जाती है। अंडों को बालू में सही तापमान पर रखकर तैयार किया जाता है, जिससे उनके सफल जन्म की संभावना बढ़ जाती है। यहां कछुओं के आहार का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
इस केंद्र की एक महत्वपूर्ण पहल गंगा सफाई अभियान में योगदान देना है। कछुआ पुनर्वास प्रभारी दरोगा निशिकांत सोनकर ने बताया कि इनमें मुख्यतः दो प्रकार की प्रजातियां होती हैं। मांसाहार प्रजाति के कछुए में से 9 महीने में बच्चे निकलने शुरू होते हैं।
कछुए को खरीदने और पालने पर है 7 साल से 3 साल की सजा
वन दरोगा ने बताया कि कछुओं की किसी भी प्रजाति को ना ही आप खरीद सकते हो ना ही बेच सकते हैं और ना ही इनको अपने घरों में पाल सकते हैं। यदि ऐसा करते हुए किसी को भी पाया जाता है तो धारा 9 के तहत 7 वर्ष से लेकर 3 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। 25 हजार तक का जुर्माना भी लगता है।