Varanasi News: 365 दिनों में पॉक्सो समेत महिला अपराध के 480 केस दर्ज, निस्तारण सिर्फ 33 प्रतिशत का; जानें खास
Varanasi News: वाराणसी में बीते एक वर्ष में पॉक्सो, दुष्कर्म, छेड़खानी और साइबर उत्पीड़न समेत महिला अपराध के 480 से अधिक मामले कोर्ट पहुंचे। विशेष पॉक्सो अदालतों में करीब 3000 मामले लंबित हैं, जबकि निस्तारण दर केवल 33 प्रतिशत रही। जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों की अनुपस्थिति से ट्रायल प्रभावित हो रहे हैं। कुछ मामलों में अदालत ने त्वरित सजा भी सुनाई।
विस्तार
UP News: हाल ही में जारी एनसीआरबी की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश महिला अपराध से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय औसत से बेहतर रहा लेकिन महिलाओं से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार अभी भी धीमी है। वाराणसी में एक साल में पॉक्सो समेत महिला अपराध के 480 से ज्यादा मामले कोर्ट में आए।
वहीं, पॉक्सो से जुड़े करीब तीन हजार मामले अभी भी कोर्ट में लंबित हैं। निस्तारण की रफ्तार की बात करें तो यह करीब 33 प्रतिशत रही। अदालतों में करीब एक हजार मामलों का निस्तारण हुआ। बीते एक वर्ष में विभिन्न थानों में पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म, छेड़खानी, घरेलू हिंसा और साइबर उत्पीड़न समेत महिला अपराध से जुड़े 480 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। कोर्ट में पहुंचे आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
न्यायिक प्रक्रिया में देरी की वजह जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों की अनुपस्थिति बताई गई। इन मामलों में सबसे ज्यादा शिकायतें शहरी क्षेत्रों के सिगरा, लंका, कैंट, भेलूपुर और शिवपुर थाना क्षेत्रों से सामने आईं, जबकि ग्रामीण इलाकों में रोहनिया, चोलापुर और बड़ागांव क्षेत्रों में बालिकाओं से जुड़े अपराधों में वृद्धि दर्ज की गई।
वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में संचालित विशेष पॉक्सो अदालतों में वर्तमान समय में लगभग 3000 मामले लंबित बताए जा रहे हैं। इनमें कई मामले दो से तीन वर्ष पुराने हैं। दोष सिद्धि की दर लगभग 28 से 30 प्रतिशत रही।
कई मामलों में गवाहों के मुकरने, समझौते के दबाव और तकनीकी साक्ष्यों की कमी के कारण अभियोजन कमजोर पड़ा। अधिकांश मामलों में चार्जशीट दाखिल होने में देरी और मेडिकल रिपोर्ट लंबित रहने से ट्रायल प्रभावित होता है। हालांकि दुष्कर्म और अन्य घोर अपराधों में पुलिस ने कई मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं, कुछ मामलों में ठोस पैरवी और मॉनिटरिंग की वजह से अदालत ने रिकॉर्ड समय में सजा भी सुनाई।
पॉक्सो के मामलों में ठोस पैरवी की जा रही है। कुछ मामलों में अदालत ने रिकॉर्ड समय में फैसला सुनाया है। ज्यादातर मामले गवाहों की गैरमौजूदगी, साक्ष्यों में देरी, फॉरेंसिक रिपोर्ट और मेडिकल साक्ष्य समय पर कोर्ट में नहीं पहुंचने की वजह से लंबित हो जाते हैं। पॉक्सो के एक-दो मामले रोज कोर्ट में दर्ज हो रहे हैं। - संतोष कुमार सिंह, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता
2018 के मामले में आठ साल बाद आया फैसला
केस 1 : सारनाथ थाना क्षेत्र में साल 2018 में दर्ज पॉक्सो एक्ट के मामले में मई 2026 में फैसला आया। न्यायिक फैसले में विलंब की वजह विवेचना, साक्ष्य संकलन और गवाहों की समय पर मौजूदगी नहीं होना रही। इस मामले में आरोपी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
केस 2 : भेलूपुर में छह साल की बच्ची का यौन शोषण भेलूपुर थाना क्षेत्र में एक बच्ची से यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया। परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन दो महीने बाद भी जांच में अपेक्षित तेजी नहीं आई। ऐसे में केस धीमी गति से चल रहा है।
केस 3 : कैंट क्षेत्र में साइबर ब्लैकमेलिंग कैंट थाना क्षेत्र में कॉलेज छात्रा की फोटो एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी गई। आरोपी युवक ने पैसे की मांग भी की। साइबर सेल की मदद से आरोपी गिरफ्तार हुआ। पुलिस ने आईटी एक्ट और महिला उत्पीड़न की धाराओं में कार्रवाई की। मामला फिलहाल कोर्ट में लंबित है।
केस 4 : बंधक बनाकर दुष्कर्म का मामला चोलापुर क्षेत्र में नाबालिग को बंधक बनाकर दो युवकों पर दुष्कर्म का आरोप लगा। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। घटना के 60 दिन बाद भी मामले में जांच जारी है और चार्जशीट दाखिल होने का इंतजार है।