Varanasi News: 11 महीने में निजी अस्पतालों में 17 हजार प्रसव, सरकारी अस्पताल से 671 ज्यादा; जानें खास
Varanasi News: आराजी लाइन, चिरईगांव और सेवापुरी महिलाओं के प्रसव में निजी अस्पतालों से पिछड़ रहे हैं। इन क्षेत्रों के सरकारी अस्पताल अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों का भरोसा नहीं जीत पा रहे हैं।
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Varanasi News: वाराणसी जिले में शहरी सरकारी अस्पतालों से अधिक निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में बच्चों का जन्म हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ें इसकी पुष्टि करते हैं। जिला स्वास्थ्य समिति की मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक 11 माह में जिले के शहरी क्षेत्र में सीएचसी-पीएचसी, जिला महिला अस्पताल, दीनदयाल एमसीएच विंग, बीएचयू, लाल बहादुर शास्त्री, ईएसआईसी, समेत विभिन्न अस्पतालों में 16,457 महिलाओं का प्रसव कराया गया है।
इसी अवधि में निजी अस्पतालों में 17128 प्रसव कराए गए हैं। यानी सरकारी से 671 ज्यादा प्रसव निजी अस्पताओं में हुए। साथ ही रोजान सरकारी अस्पतालों में औसत 50 बच्चों का जन्म हो रहा है। वहीं निजी में यह संख्या औसत 52 है। आराजी लाइन ब्लाॅक के सरकारी अस्पतालों में 11 महीने में 3,690 महिलाओं का प्रसव कराया गया है जबकि निजी अस्पतालों में 4030 महिलाओं का प्रसव हुआ है।
चिरईगांव ब्लाॅक में सरकारी अस्पताल में महिलाओं ने 2294 बच्चों को जन्म दिया है, जबकि निजी अस्पतालों में यह संख्या दोगुने से ज्यादा है। इस क्षेत्र के निजी अस्पतालों में 4880 बच्चों का जन्म हुआ। इसके अलावा सेवापुरी में पिछले 11 महीने में मात्र 2485 महिलाओं का प्रसव हुआ है, निजी में इनकी संख्या 2694 है।
आशा कार्यकर्ताओं के जरिये निजी अस्पतालों में बढ़ती है संख्या : स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निजी अस्पताल संचालक आशा कार्यकर्ताओं को उनके यहां महिलाओं को भर्ती कराने के एवज में मोटी रकम का लालच देते हैं। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ता महिलाओं को निजी अस्पतालाें में भर्ती करा देती हैं।
किसी भी महिला का प्रसव अप्रशिक्षित व्यक्ति से न कराया जाए। इसके लिए सीएमओ को निर्देश दिए गए हैं। सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए जेएसवाई अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 और 1000 रुपये प्रोत्साहन के तौर पर दिए जाते हैं। आशा कार्यकर्ता यदि जबरन किसी को निजी अस्पताल में ले जाती हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। - डॉ. एनडी शर्मा, अपर निदेशक, स्वास्थ्य विभाग।