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वाराणसी मेयर की सीट महिला के लिए आरक्षित, अब पत्नियों की पैरवी करेंगे दावेदार नेता
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 13 Oct 2017 02:38 PM IST
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- फोटो : demo
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वाराणसी नगर निगम में 21 साल बाद फिर पिछड़ा वर्ग की महिला महापौर की कुर्सी संभालेगी। शासन स्तर से गुरुवार रात महापौर पद के लिए आरक्षण सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों में पिछड़ा वर्ग की जिताऊ महिला उम्मीदवार के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई। इसी के साथ महापौर बनने के लिए जोर-आजमाइश में जुटे कई पुरुष दिग्गजों के सपने टूट गए। 1995 में भाजपा के पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह की पत्नी सरोज सिंह ने इस पद पर जीत हासिल की थी।
महापौर पद पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित किए जाने के साथ ही सत्ताधारी भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस में संभावित उम्मीदवारों के नाम गिनाए जाने लगे। भाजपा के दिग्गज अपनी पत्नियों को चुनाव मैदान में उतारने की जुगत लगाएंगे। भाजपा की महानगर इकाई की महामंत्री और सुंदरपुर की पूर्व पार्षद निर्मला सिंह पटेल के अलावा अब तक खुद चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे पूर्व महापौर कौशलेंद्र सिंह पटेल की पत्नी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
वहीं क्षेत्रीय महामंत्री अशोक चौरसिया की पत्नी वंदना चौरसिया को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। वैसे नागरिक सुरक्षा और होमगार्ड राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल राजभर, शहर उत्तरी के विधायक रवींद्र जायसवाल और जिला सहकारी बैंक के वाइस चेयरमैन आरपी कुशवाहा भी अपनी पत्नियों के लिए पार्टी से टिकट मांग सकते हैं।
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उधर, पिछड़ा वर्ग महिला सीट घोषित होने से भाजपा से अशोक धवन, साधना वेदांती, मीना चौबे, विधान परिषद की पूर्व सदस्य डॉ. वीणा पांडेय, मनीष कपूर, नवीन कपूर, सुरेश मिश्रा, अशोक तिवारी, डॉ. अशोक राय के अलावा पूर्व मेयर रामगोपाल मोहले भी इस पद के दावेदार थे। अब इनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
दूसरी तरफ सपा में महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल की पत्नी सत्या जायसवाल, पार्षद दल के नेता विजय जायसवाल, प्रदेश सचिव राजू यादव, व्यापार सभा के संजय गुप्ता की पत्नियों को नाम संभावित दावेदारों के तौर पर लिए जा रहे हैं। महिला सभा की महानगर अध्यक्ष प्रियांशु यादव भी इस रेस में शामिल हो सकती हैं। इसी तरह बसपा के सीमा विश्वकर्मा को चुनाव मैदान में उतारे जाने की संभावना है।
हालांकि बसपा शुक्रवार को होने वाली बैठक में इस पर मंथन करेगी। कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मी के अलावा पूर्व मंत्री संकठा शास्त्री की बहू में से किसी एक पर दांव लगा सकती है।
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महापौर पद पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित किए जाने के साथ ही सत्ताधारी भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस में संभावित उम्मीदवारों के नाम गिनाए जाने लगे। भाजपा के दिग्गज अपनी पत्नियों को चुनाव मैदान में उतारने की जुगत लगाएंगे। भाजपा की महानगर इकाई की महामंत्री और सुंदरपुर की पूर्व पार्षद निर्मला सिंह पटेल के अलावा अब तक खुद चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे पूर्व महापौर कौशलेंद्र सिंह पटेल की पत्नी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
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वहीं क्षेत्रीय महामंत्री अशोक चौरसिया की पत्नी वंदना चौरसिया को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। वैसे नागरिक सुरक्षा और होमगार्ड राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल राजभर, शहर उत्तरी के विधायक रवींद्र जायसवाल और जिला सहकारी बैंक के वाइस चेयरमैन आरपी कुशवाहा भी अपनी पत्नियों के लिए पार्टी से टिकट मांग सकते हैं।
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उधर, पिछड़ा वर्ग महिला सीट घोषित होने से भाजपा से अशोक धवन, साधना वेदांती, मीना चौबे, विधान परिषद की पूर्व सदस्य डॉ. वीणा पांडेय, मनीष कपूर, नवीन कपूर, सुरेश मिश्रा, अशोक तिवारी, डॉ. अशोक राय के अलावा पूर्व मेयर रामगोपाल मोहले भी इस पद के दावेदार थे। अब इनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
दूसरी तरफ सपा में महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल की पत्नी सत्या जायसवाल, पार्षद दल के नेता विजय जायसवाल, प्रदेश सचिव राजू यादव, व्यापार सभा के संजय गुप्ता की पत्नियों को नाम संभावित दावेदारों के तौर पर लिए जा रहे हैं। महिला सभा की महानगर अध्यक्ष प्रियांशु यादव भी इस रेस में शामिल हो सकती हैं। इसी तरह बसपा के सीमा विश्वकर्मा को चुनाव मैदान में उतारे जाने की संभावना है।
हालांकि बसपा शुक्रवार को होने वाली बैठक में इस पर मंथन करेगी। कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मी के अलावा पूर्व मंत्री संकठा शास्त्री की बहू में से किसी एक पर दांव लगा सकती है।
पहले से मौजूद दावेदारों और नए क्षेत्र से बढ़ी चुनौती
नगर निकाय चुनाव
- फोटो : self
नगर निकाय चुनाव के लिए परिसीमन बदलने और वार्ड आरक्षण तय होने के बाद पहले से तैयारी में जुटे दावेदारों एवं पूर्व पार्षदों को तगड़ा झटका लगा है। अब उन्हें नए सिरे से मेहनत को करनी ही पड़ेगी।
साथ ही परिसीमन के बाद जिनका वार्ड बदला है उन्हें इस इलाके में पहले से तैयारी कर रहे दूसरे दावेदारों की भी चुनौती मिल रही है। नया क्षेत्र और नए दावेदार होने से पहले से तैयारी में जुटे भावी उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
नगर निगम हो या फिर रामनगर पालिका परिषद अथवा गंगापुर नगर पंचायत तीनों जगहों पर परिसीमन और वार्ड में बदलाव किया गया है। नगर निगम के 90 वार्डों के क्षेत्र में काफी फेरबदल हो गया है। यही हाल रामनगर पालिका परिषद और गंगापुर नगर पंचायत में है।
गंगापुर के गांधीनगर वार्ड के सभासद रहे बिहारीलाल सेठ ने वार्ड को अनुसूचित जाति महिला आरक्षित किए जाने पर जिलाधिकारी के यहां आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि 1995 से लगातार इस वार्ड में अनुसूचित जाति पुरुष एवं अनुसूचित जाति महिला का ही आरक्षण रहा है। 2012 में इस वार्ड को सामान्य किया गया था। पिछड़ी सीट अब तक एक बार भी नहीं हुई। जबकि वार्ड में काफी संख्या में पिछड़ी जाति के लोग रहते हैं।
साथ ही परिसीमन के बाद जिनका वार्ड बदला है उन्हें इस इलाके में पहले से तैयारी कर रहे दूसरे दावेदारों की भी चुनौती मिल रही है। नया क्षेत्र और नए दावेदार होने से पहले से तैयारी में जुटे भावी उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
नगर निगम हो या फिर रामनगर पालिका परिषद अथवा गंगापुर नगर पंचायत तीनों जगहों पर परिसीमन और वार्ड में बदलाव किया गया है। नगर निगम के 90 वार्डों के क्षेत्र में काफी फेरबदल हो गया है। यही हाल रामनगर पालिका परिषद और गंगापुर नगर पंचायत में है।
गंगापुर के गांधीनगर वार्ड के सभासद रहे बिहारीलाल सेठ ने वार्ड को अनुसूचित जाति महिला आरक्षित किए जाने पर जिलाधिकारी के यहां आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि 1995 से लगातार इस वार्ड में अनुसूचित जाति पुरुष एवं अनुसूचित जाति महिला का ही आरक्षण रहा है। 2012 में इस वार्ड को सामान्य किया गया था। पिछड़ी सीट अब तक एक बार भी नहीं हुई। जबकि वार्ड में काफी संख्या में पिछड़ी जाति के लोग रहते हैं।