एनटीपीसी के रिटायर्ड कर्मी हत्या मामला: करोड़ों की संपत्ति हथियाने के लिए की गई थी हत्या, पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि हत्या से जुड़ आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा करने के लिए पुलिस को 1345 पन्नों के काल डिटेल रिकार्ड का आंकलन करना पड़ा।
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वाराणसी शहर के चर्चित ब्लाइंड मर्डर केस (एनटीपीसी के रिटायर्ड अधिकारी मार्तंड शाही हत्याकांड) में पुलिस ने न्यायालय में चार्ज शीट दाखिल कर दी है। 90 दिन चली तफ्तीश में पुलिस ने 1345 पन्ने की सीडीआर का आंकलन और 63 गवाहों के बयान लेने के बाद हत्या में शामिल आठ आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा करते हुए आरोप पत्र तैयार किया।
करोड़ों रुपये की संपत्ति हथियाने के लिए मार्तंड शाही की कानपुर के नौबस्ता में हत्या कर दी गई थी। आठ अगस्त को मार्तंड शाही का शव नौबस्ता पुलिस ने बरामद किया था। कैंट थाना अंतर्गत छावनी क्षेत्र के बुद्ध विहार कालोनी निवासी मार्तंड शाही को धोखे में रखकर उनकी करोड़ों की संपत्ति ककरमत्ता क्षेत्र के जानकी नगर स्थित शिव शक्ति अपार्टमेंट में रहने वाले राजेश कुमार चौहान और उसकी पत्नी कंचन सिंह चौहान ने दानपात्र करा लिया।
मूलरूप से गाजीपुर के करीमुद्दीन थाना अंतर्गत असावर के रहने वाले राजेश और कंचन ने मार्तंड शाही की हत्या कर उनका तीन मंजिला मकान कब्जा करने की साजिश गोरखपुर के सेमरा चिलुआताल के बृजेश यादव, करजहो चिलुआताल के रमेश यादव, जौनपुर के पोखरा के दिनेश कुमार सिंह, गोरखपुर के सुभाष चंद्र बोस नगर के सुबोध कुमार द्विवेदी और भोजूबीर के निगमेंद्र सिंह सिसोदिया और भरलाई शिवपुरनिवासी राजेश कुमार के साथ रची थी।
आठ अगस्त 2021 को शव मिलने के बाद गाजियाबाद में नौकरी करने वाले बेटे अमित शाही ने कैंट थाने में सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या, अगवा सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया। इसी बीच एडीसीपी वरुणा प्रबल प्रताप सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया और मामले की तह तक पहुंची।
बनारस से कानपुर तक 63 गवाहों से पूछताछ
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि हत्या से जुड़ आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा करने के लिए पुलिस को 1345 पन्नों के काल डिटेल रिकार्ड का आंकलन करना पड़ा। बनारस से कानपुर तक 63 गवाहों से पूछताछ की गई। मार्तंड शाही के जेब से मिले रोडवेज बस टिकट और नशीली दवा आदि बरामद हुआ तो उसकी तहकीकात की गई।
जिस बस का टिकट कराया गया था, उस बस के चालक-परिचालक और वर्कशाप में खड़ी बस के कर्मचारियों से पूछताछ की गई तो मालूम चला कि बस में मार्तंड शाही सफर किए ही नहीं। सुसाइड नोट भी फर्जी पाया गया।
वहीं बनारस से कानपुर तक टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की पहचान उजागर हुई। आरोपियों के मोबाइल से मिले फोटो-वीडियो और घटना से पहले व बाद में मोबाइल से हुई उनकी बातचीत एक ठोस साक्ष्य है। पुलिस ने अगस्त और सितंबर माह में आरोपियों को गिरफ्तार किया था।