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बारिश में भीगने से बचें, मौसमी बीमारी और कोरोना रहेगा दूर
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वाराणसी। बदलते मौसम में सेहत को लेकर अब अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे समय में जबकि कोरोना संक्रमण चल रहा है तो एहतियात बरतना जरूरी है। क्योंकि इस मौसम में सर्दी, खांसी, जुकाम के साथ ही बुखार होने की संभावना बढ़ जाती है। मंडलीय अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता और कोविड 19 के लिए गठित इंफेक्शन प्रिवेंशन कंट्रोल कमेटी(आईपीसी) के सदस्य डॉ. प्रसन्न कुमार का कहना है कि यह भी जानना जरूरी है कि कोरोना संक्रमण के लक्षण भी बुखार के साथ ही सर्दी, खांसी, गले में खराश है। बारिश में भीगने के बाद सर्दी, जुकाम आदि का खतरा रहता है, ऐसे में बहुत जरूरी न हो तो बाहर निकलने से लोगों को बचना चाहिए।
मेडिकल ऑफिसर डॉ. यतीश भुवन पाठक का कहना है कि बरसात के समय में मौसमी बीमारियों के साथ ही जल जनित बीमारियों के होने की संभावना रहती है। इसमें घर के पास पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। बारिश में भीगने से भी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में घर मे रहने के साथ ही साफ सफाई पर ध्यान देकर संक्रमण से भी बचा जा सकता है।
डॉ. प्रसन्न कुमार का कहना है कि छीकने और थूकने के बाद जो ड्रॉपलेट बाहर निकलता है उसके नमी में सूखने की संभावना बहुत कम हो जाती है। जबकि अगर मौसम गर्म होता है तो वह जल्दी सूख जाता है। ऐसे में नमी में यह और भी घातक हो सकते हैं। गर्मी के समय में तापमान अधिक होने पर उसके सूखने की संभावना जल्दी रहती है।
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मेडिकल ऑफिसर डॉ. यतीश भुवन पाठक का कहना है कि बरसात के समय में मौसमी बीमारियों के साथ ही जल जनित बीमारियों के होने की संभावना रहती है। इसमें घर के पास पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। बारिश में भीगने से भी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में घर मे रहने के साथ ही साफ सफाई पर ध्यान देकर संक्रमण से भी बचा जा सकता है।
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डॉ. प्रसन्न कुमार का कहना है कि छीकने और थूकने के बाद जो ड्रॉपलेट बाहर निकलता है उसके नमी में सूखने की संभावना बहुत कम हो जाती है। जबकि अगर मौसम गर्म होता है तो वह जल्दी सूख जाता है। ऐसे में नमी में यह और भी घातक हो सकते हैं। गर्मी के समय में तापमान अधिक होने पर उसके सूखने की संभावना जल्दी रहती है।
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