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वाराणसी: मंगलपुर पहुंची स्वास्थ्य टीम, गांव की आबादी 7000 और हर घर में कोई न कोई बीमार; 100 लोगों के लिए सैंपल

Sun, 25 Oct 2026 11:00 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 25 Oct 2026 11:00 AM IST
सार

वाराणसी के मंगलपुर में तेज बुखार और जोड़ों में दर्द की शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। टीम ने लोगों की जांच कर 100 लोगों के सैंपल लिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए नमूनों की जांच कराई जाएगी। ग्रामीणों को सतर्क रहने और लक्षण दिखने पर उपचार कराने की सलाह दी गई।

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Varanasi health arrived in Mangalpur village population 7000 least person ill in every household
मंगलपुर पहुंची स्वास्थ्य टीम। - फोटो : AI

विस्तार

काशी विद्यापीठ ब्लॉक के मंगलपुर गांव में एक महीने में चार लोगों की मौत के साथ ही तेज बुखार, जोड़ों में दर्द की समस्या के बाद शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची। 100 लोगों के खून के सैंपल लिए गए। विभाग की ओर से जांच कराई जाएगी। कुछ लोगों में बुखार के लक्षण मिले।

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एक महीने में चार लोगों की मौत के बाद सीएमओ डॉ. एनपी सिंह ने टीम को गांव में भेजा। डोर-टू-डोर सर्वे कर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की और डेंगू, टायफाइड व मलेरिया की पुष्टि के लिए सैंपल लिए गए। सफाईकर्मियों ने पूरे गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग की। इस दौरान नालियों की सफाई भी कराई गई। सीएचसी मिसिरपुर के डॉ. एनके भारती ने बताया कि सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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चल रही जांच

गांव की कुल आबादी 7000 है और हर घर में कोई न कोई बुखार से पीड़ित है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि काशी विद्यापीठ ब्लॉक स्वास्थ्य केंद्र और मिसिरपुर सीएचसी 12 से 14 किलोमीटर दूर है। इमरजेंसी में मरीजों को ले जाने में काफी दिक्कत होती है। ग्रामीणों ने गांव में ही अस्थायी स्वास्थ्य कैंप लगाने और नियमित फॉगिंग की मांग की है।

गांव के गुलाम रब्बानी (70) की की कुछ दिन पहले ही मौत हो गई। बेटे इरशाद ने बताया कि पिता एक हफ्ते से तेज बुखार से पीड़ित थे। सेंट मैरी हॉस्पिटल में इलाज कराया, लेकिन एक दिन दवा खाने के बाद ही उनकी मौत हो गई। डॉक्टर ने रिपोर्ट में डेंगू और लिवर में सूजन की बात कही। अम्मा नगीना भी अभी बुखार से पीड़ित हैं। एएनएम से लेकर प्रधान तक कई बार छिड़काव के लिए कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मौतों के बाद ही विभाग जागा है।

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बुखार के ज्यादा मामले

जुलेखा उर्फ मद्दर (53) की मौत 2 अक्तूबर को हो गई। भाई अब्दुल करीम ने बताया कि उनकी बहन को ठंड लगकर तेज बुखार आया था। 30 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 2 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। सितंबर में उनके पूरे परिवार के लोग बुखार के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे।

जमालूद्दीन (33) को तेज बुखार था। पिता कलीम अंसारी ने बताया कि बेटे को अचानक तेज बुखार आया। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। मोढ़ैला के निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां 2 दिन इलाज के बाद 20 अक्तूबर को उसकी मौत हो गई। 5 साल की बेटी और 8 साल का बेटा भी डेंगू से पीड़ित होकर भर्ती हुए थे। परिवार में कुल 17 सदस्य हैं, जिनमें अधिकांश बीमार हैं।

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