वाराणसी: आत्माविश्वेश्वर मंदिर में मां कात्यायनी ने दिए दर्शन, देवी जगदंबा ने धरा स्वरूप; हुआ विधिवत पूजन
नवरात्र की षष्ठी तिथि पर शुक्रवार को काशी में देवी जगदंबा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी का दर्शन-पूजन किया गया। आत्माविश्वेश्वर मंदिर में मां कात्यायनी ने भक्तों को दर्शन दिए। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी रही और माहौल भक्तिमय रहा।
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शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि पर शुक्रवार को देवी जगदंबा के कात्यायनी स्वरूप का दर्शन-पूजन हुआ। संकटा मंदिर के निकट आत्माविश्वेश्वर मंदिर परिसर में स्थित मंदिर में देवी के विग्रह के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी रही। मां को 1008 गुड़हल के फूलों की माला से सजी झांकी के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ी। देर रात तक भक्तों ने दर्शन-पूजन कर सद्गति की कामना की।
ब्रह्ममुहूर्त में मां का शृंगार कर मंगला आरती के बाद दर्शन के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए। मां के जयकारों के साथ भक्तों की कतार लग गई। इससे पूर्व माता के विग्रह को पंचामृत स्नान कराकर नवीन वस्त्र धारण कराए गए। आभूषणों आदि से देवी को सुसज्जित कर गुड़हल, बेला, गुलाब, चमेली आदि पुष्पों से शृंगार किया गया और माता की आरती उतारी गई। मंदिर से लेकर आसपास की गलियां देवी के जयकारों से गूंजती रहीं। देवी कात्यायनी की जय और माता दुर्गा की जय के घोष के साथ दर्शन का क्रम चलता रहा।
दोपहर बाद तक देवी के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रही। भक्तों ने मातारानी को प्रसन्न करने के लिए लाल रंग के फूल, लाल चुनरी आदि पूजन सामग्री चढ़ाई। मंदिर परिवार की ओर से भक्तों को प्रसाद स्वरूप नारियल वितरित किए गए।
बाबा धाम में आदि शक्ति की उपासना
शारदीय नवरात्रि के छठवें दिन श्री काशी विश्वनाथ धाम में शक्ति की उपासना हुई। मां विशालाक्षी को शृंगार सामग्री अर्पित की गई। साथ ही नवदुर्गा सप्तशती का पाठ हुआ। जगत जननी मां दुर्गा की महिमा का गुणगान हुआ। इस दौरान बाबा के दर्शन कर भक्तों ने मां विशालाक्षी का भी पूजन किया। मां आदिशक्ति और भगवान शिव की संयुक्त आराधना के माध्यम से लोक कल्याण, सुख-समृद्धि और समस्त श्रद्धालुओं के जीवन में शांति और मंगल की कामना की गई।