अच्छी खबर: वाराणसी में पूर्वांचल का पहला पुस्तकालय, जहां किताबों पर लगेगा आरएएफटी कोड; रुकेगी पुस्तकों की चोरी
Varanasi News: पूर्वांचल में पहली बार किताबों पर आरएएफटी कोड लगेगा। इससे किताबों की चोरी रुकेगी। वीडीए एलटी कॉलेज परिसर में अत्याधुनिक जिला पुस्तकालय का निर्माण करा रहा है।
विस्तार
एलटी कॉलेज परिसर अर्दली बाजार में पूर्वांचल का सबसे अत्याधुनिक पुस्तकालय तैयार हो रहा है। इसमें करीब 35 हजार किताबें ऑनलाइन होंगी और इन किताबों पर आरएएफटी कोड दर्ज होगा। यह एक तरह का पुस्तक एक्सेस कोड जिससे किताबों की चोरी पर अंकुश लगेगा। यह बिलकुल वैसा ही होगा जैसे मॉल में रखे कपड़ों या किसी सामान पर लगा क्यूआर कोड होता है। इसका लाभ यह होगा कि बिना किताब निर्गत कराए किताब पुस्तकालय के बाहर नहीं जा पाएगी। साथ ही किताब निर्गत करने वाले तत्काल जानकारी मिल जाएगी। ये पूर्वांचल का पहला पुस्तकालय होगा जहां ये सुविधा होगी।
जिला पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों और छात्र-छात्राओं को सुविधा होगी। इसमें भूतल पर 21 हजार वर्ग मीटर का हॉल, प्रथम तल पर 11 हजार वर्ग फीट का हॉल बनेगा। दोनों ही हॉल एसी युक्त और साउंड प्रूफ होंगे। साथ ही इसमें फ्री वाइफाई की सुविधा होगी जो मेंबर को मिलेगी। नीचे के हॉल में एक साथ 500 से अधिक लोग बैठकर पढ़ सकेंगे।
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भूतल पर सभागार के अलावा बाल पठन क्षेत्र, कैफेटेरिया और प्रथम तल पर विशाल पठन कक्ष, डिजिटल पुस्तकालय और द्वितीय तल पर ग्रीन टैरेस होगा। इसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसके निर्माण में करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पुस्तकालय में 35 हजार किताबें ऑनलाइन करने के बाद 10 हजार किताबें भी रखी जाएंगी।
जिला कारागार को 5000 और ग्रामीण लाइब्रेरी को दी गईं 20 हजार किताबें
जिला पुस्तकालय में रखी गई किताबों में से 5000 किताबें जिला कारागार को दी गई हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई गई 356 लाइब्रेरी के लिए भी 20 हजार किताबें दी गई हैं। जिला कारागार में बनी अस्थायी लाइब्रेरी में किताबों को रखा गया है। इनमें उपन्यास, कहानी, हिंदी साहित्य आदि की किताबें हैं।
क्या बोले पुस्तकालय अध्यक्ष
एलटी कॉलेज परिसर में पूर्वांचल के अत्याधुनिक जिला पुस्तकालय का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें 35 हजार किताबें ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। गैर सदस्यों को भी इसका लाभ मिलेगा। निर्माण में करीब 20 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। -कंचन सिंह परिहार, पुस्तकालय अध्यक्ष, वाराणसी