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नदियों को जोड़ने की नहीं, नदियों से जुड़ने की जरूरत: जल पुरुष राजेंद्र सिंह
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समाजसेवी एवं जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि नदियों को जोड़ने की नहीं, बल्कि मनुष्य को नदियों से जोड़ने की ज्यादा जरूरत है। जल मनुष्य की सबसे बड़ी जरूरत है, जल ही जीवन है। समय की मांग है कि कम से कम जल में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार न हो। जल के सभी स्त्रोत नदियों और तालाबों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। समाज में विश्वास पैदा करें और जल को बाजार में फ्री कर दें, आज इसकी सबसे अधिक जरूरत है।
वह एबी फाउंडेशन की ओर से आयोजित डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट आफ वाटर रिसोर्स विषयक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। मैग्सेसे अवार्ड विजेता जल पुरुष ने कहा कि प्रौद्योगिकीकरण की अंधी दौड़, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण से उपजी यह समस्या वैश्विक है। उन्होंने वाराणसी की पहचान असि नदी के नाले में तब्दील होेने पर चिंता जताते हुए कहा कि इसको स्वच्छ करने के लिए जनांदोलन की जरूरत है।
आईआईटी कानपुर से शोधकर्ता के. हर्षा ने कहा कि नदियों में समाहित हो रहे औद्योगिक कचरे पर लगाम लगानी होगी। जल के स्रोत को किसी भी प्रकार के प्रदूषण से बचाना है, इसकी प्राथमिकता सरकारों द्वारा कानून के जरिये तय होनी चाहिए। उन्होंने स्वयं द्वारा बनाई गई जल स्तर बताने और प्रदूषण पर लगाम लगाने वाली मशीन के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे कॉलोनियल सोच को बदलें और भारत की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करें। उन्होंने तीन बार गंगा की पैदल यात्रा के अनुभव साझा किए। इस दौरान सीए सीके मिश्रा, रवि पांडेय, अनिता चौधरी एवं वरिष्ठ पत्रकार पदम पति शर्मा ने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन आनंद कुमार सिंह ने किए।
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वह एबी फाउंडेशन की ओर से आयोजित डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट आफ वाटर रिसोर्स विषयक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। मैग्सेसे अवार्ड विजेता जल पुरुष ने कहा कि प्रौद्योगिकीकरण की अंधी दौड़, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण से उपजी यह समस्या वैश्विक है। उन्होंने वाराणसी की पहचान असि नदी के नाले में तब्दील होेने पर चिंता जताते हुए कहा कि इसको स्वच्छ करने के लिए जनांदोलन की जरूरत है।
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आईआईटी कानपुर से शोधकर्ता के. हर्षा ने कहा कि नदियों में समाहित हो रहे औद्योगिक कचरे पर लगाम लगानी होगी। जल के स्रोत को किसी भी प्रकार के प्रदूषण से बचाना है, इसकी प्राथमिकता सरकारों द्वारा कानून के जरिये तय होनी चाहिए। उन्होंने स्वयं द्वारा बनाई गई जल स्तर बताने और प्रदूषण पर लगाम लगाने वाली मशीन के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे कॉलोनियल सोच को बदलें और भारत की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करें। उन्होंने तीन बार गंगा की पैदल यात्रा के अनुभव साझा किए। इस दौरान सीए सीके मिश्रा, रवि पांडेय, अनिता चौधरी एवं वरिष्ठ पत्रकार पदम पति शर्मा ने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन आनंद कुमार सिंह ने किए।
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