{"_id":"5dc86adc8ebc3e5b145995e9","slug":"varanasi-ganga-mahotsav-varanasi-news-vns4936917117","type":"story","status":"publish","title_hn":"काशी गंगा महोत्सव में सजी संगीत की निशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी गंगा महोत्सव में सजी संगीत की निशा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशी गंगा महोत्सव की तीसरी निशा वाद्ययंत्रों और स्वरलहरियों की सुमधुर प्रस्तुतियाें के नाम रही। पद्मश्री येल्ला वेंकटेश्वर राव के मृदंगम के जादू से हर कोई सम्मोहित नजर आया। सुरसरि के तट पर मृदंगम की थाप और मुक्ताकाशीय मंच पर बैठे दर्शकों का आपसी समन्वय अद्भुत रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ नगर आयुक्त गौरांग राठी ने दीप प्रज्जवलन कर किया।
रविवार को कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति में बनारस घराने के कैलाश मिश्र ने तबले की मनोहारी प्रस्तुति की। संगत गौरव मिश्रा ने की। दूसरी प्रस्तुति में गणेश पाठक ने भजन जटाजूट त्रिपुरारी, नटवर नागर नंदा... पेश किया। संगत कलाकारों में सुशील पांडेय ने तबले पर, महेंद्र कुमार ने कीबोर्ड और प्रदीप मेहरोत्रा ने पैड पर संगत की। मुंबई से पधारी अनुराधा पाल का तबला वादन भी बेहतरीन था। उन्होंने तीन ताल, अद्धनारीश्वर के ऊपर तबले की जुगलबंदी की। संगत कलाकारों में सारंगी पर अनीष मिश्रा पर साथ दिया। इसके बाद बारी थी शास्त्रीय गायिका डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य का। उन्हाेंने राग यमन विलंबित ख्याल एकताल में निबद्ध आली री मोरे पिया... से शुरूआत की। इसके बाद उन्होंने द्रुत तीन ताल में मैं वारी-वारी जाऊंगी प्रीतम पर...पेश किया। राग मिश्र खमाज में ठुमरी झपताल में निबद्ध सांवरिया को देखे बिना नाहीं चैन..., राग कौशिकी में निबद्ध दादरा श्याम तोहे नजरिया लग जाएगी...और समापन भजन पतित उद्धारिणी गंगे मां...से किया। अंतिम प्रस्तुति में पद्मश्री येल्ला वेंकटेश्वर राव के मृदंगम की प्रस्तुति में दर्शकों ने संगीत की ऊंचाईयों को महसूसा।
विज्ञापन
रविवार को कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति में बनारस घराने के कैलाश मिश्र ने तबले की मनोहारी प्रस्तुति की। संगत गौरव मिश्रा ने की। दूसरी प्रस्तुति में गणेश पाठक ने भजन जटाजूट त्रिपुरारी, नटवर नागर नंदा... पेश किया। संगत कलाकारों में सुशील पांडेय ने तबले पर, महेंद्र कुमार ने कीबोर्ड और प्रदीप मेहरोत्रा ने पैड पर संगत की। मुंबई से पधारी अनुराधा पाल का तबला वादन भी बेहतरीन था। उन्होंने तीन ताल, अद्धनारीश्वर के ऊपर तबले की जुगलबंदी की। संगत कलाकारों में सारंगी पर अनीष मिश्रा पर साथ दिया। इसके बाद बारी थी शास्त्रीय गायिका डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य का। उन्हाेंने राग यमन विलंबित ख्याल एकताल में निबद्ध आली री मोरे पिया... से शुरूआत की। इसके बाद उन्होंने द्रुत तीन ताल में मैं वारी-वारी जाऊंगी प्रीतम पर...पेश किया। राग मिश्र खमाज में ठुमरी झपताल में निबद्ध सांवरिया को देखे बिना नाहीं चैन..., राग कौशिकी में निबद्ध दादरा श्याम तोहे नजरिया लग जाएगी...और समापन भजन पतित उद्धारिणी गंगे मां...से किया। अंतिम प्रस्तुति में पद्मश्री येल्ला वेंकटेश्वर राव के मृदंगम की प्रस्तुति में दर्शकों ने संगीत की ऊंचाईयों को महसूसा।
विज्ञापन