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वाराणसी: पहली बार लड़ाकू विमानों ने भजन-श्लोक व मंत्रों की धुन पर भरी उड़ान, सैन्य शौर्य और धर्म का अनूठा संगम

Fri, 23 Oct 2026 01:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 23 Oct 2026 01:30 AM IST
सार

देश में हुए किसी भी एयर शो में यह पहला मौका है, जब वायुसेना के विमानों के करतब और मैन्यूवर के दौरान भजन, श्लोक या फिर हनुमान चालीसा की धुन बजाई गई। सैन्य शौर्य के साथ धर्म का ये पहला अनूठा संगम है।

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Varanasi: For the first time, fighter jets took flight to the strains of devotional songs, hymns, and mantras
वाराणसी में बृहस्पतिवार को सेना के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एयर शो में सिंधिया घाट स्थित रत्नेश्वर महादेव व घाट पर स्थापित शिव लिंग के ऊपर से गुजरते वायु सेना के विमान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीमा से परे, इतिहास वाले शहर काशी में बृहस्पतिवार को वायुसेना के विमानों ने भजन और मंत्रों की धुन पर उड़ान भरी। देश में हुए किसी भी एयर शो में यह पहला मौका है, जब वायुसेना के विमानों के करतब और मैन्यूवर के दौरान भजन, श्लोक या फिर हनुमान चालीसा की धुन बजाई गई। सैन्य शौर्य के साथ धर्म का ये पहला संगम है।

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इस एयर शो के फॉर्मेशन के नाम भी काशी, केदार, ओंकार, रुद्र, त्रिलोचन, कैलाश, नटराज, महादेव, विश्वनाथ और नीलकंठ थे। विमानों ने काशी फॉर्मेशन में तिरंगा बनाया। सुखोई ने हनुमान चालीसा की धुन पर अपना शौर्य दिखाया। चेतक हेलिकॉप्टर ने आकाश से मां गंगा पर फूल चढ़ाए।
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चिनूक ने गंगा का स्पर्श किया। सुखोई ने ही रुद्र और शंकर फॉर्मेशन बनाए। ताकतवर लड़ाकू विमान राफेल के हिस्से नीलकंठ तो देश के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के हिस्से अस्सी फॉर्मेशन आया था। वहीं, त्रिदेव फॉर्मेशन में सेना, नौसेना और वायुसेना के विमान एक साथ उड़े जबकि ट्रांसपोर्ट विमान आईएल 78 पहली बार किसी एयर शो में शामिल हुआ, काशी में इसने महादेव फॉर्मेशन बनाया।
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पहली बार किसी एयर शो में प्रचंड फॉर्मेशन दिखाया गया। इसमें छह अलग-अलग तरह के लड़ाकू विमानों ने तीर का आकार बनाया। इसमें जगुआर, सुखोई, मिराज, तेजस, मिग-29 और राफेल ने एक साथ उड़ान भरी। यह फॉर्मेशन खास तौर पर ऑपरेशन सिंदूर में वायुसेना के शौर्य को दिया सम्मान है।

इस दौरान किसी भी फाइटर जेट ने काशी विश्वनाथ मंदिर के ऊपर से उड़ान नहीं भरी। यह नो-फ्लाइंग जोन है। लेकिन जैसे ही विमान नमो घाट से होते हुए काशी विश्वनाथ वाले घाट पर पहुंचे, वहां मौजूद अर्चकों ने शंख और डमरू बजाकर जयघोष किया।

पहले दिन आए पांच लाख लोग : जिलाधिकारी
वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के मुताबिक, इस एयर शो को देखने के लिए पहले दिन लगभग पांच लाख लोग जुटे थे। ये लोग गंगा के दोनों किनारों पर मौजूद थे। ये एयर शो वायुसेना की 94 वीं वर्षगांठ के मौके पर किया जा रहा है।

कल आएंगे रक्षामंत्री और 25 को प्रधानमंत्री
तीन दिन (22, 24 और 25 अक्तूबर) होने वाले इस एयर शो के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह 24 अक्तूबर को एयर शो देखने आएंगे।


इस एयर शो में 100 विमान शामिल हो रहे हैं। इनमें 52 फाइटर हैं। ये विमान देश के 12 एयरबेस से उड़ान भर रहे हैं। सबसे दूर चेन्नई का नेवल बेस है और सबसे पास काशी का बाबतपुर एयरपोर्ट।

 

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