Varanasi Flood: दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घट रहा गंगा का जलस्तर, बाढ़ के पानी से दुश्वारियां बरकरार
Varanasi Flood: काशी में गंगा का जलस्तर तो घटने लगा, लेकिन बाढ़ के पानी से लोगों की दुश्वारियां बरकरार हैं। हालाकि प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
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गंगा के जलस्तर में धीमी गति से गिरावट शुरू हो गई है। जलस्तर में गिरावट के बाद भी शहर से लेकर गांव तक दुश्वारियां बरकरार हैं। जिला प्रशासन ने आम जनता की सहूलियत के लिए गुरुवार को बाढ़ राहत शिविर की संख्या 16 से बढ़ाकर 17 कर दी है। 17 शिविरों में 388 परिवार के 2301 लोगों ने शरण ले रखी है।
केंद्रीय जल आयोग की बाढ़ बुलेटिन के अनुसार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 70.40 मीटर दर्ज किया गया। गंगा के जलस्तर में दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गिरावट हो रही थी। दोपहर में इसमें आधा सेंटीमीटर की कमी आई और जलस्तर 1.5 सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से नीचे उतर रहा था।
शाम को फिर से जलस्तर में दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घटाव होने लगा। शाम को छह बजे गंगा का जलस्तर 70.28 मीटर पहुंच गया और रात आठ गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से दो सेंटीमीटर नीचे 70.24 मीटर पहुंच गया। बीते 24 घंटे में पानी 26 सेंटीमीटर नीचे उतरा है।
पानी भले कम हो रहा है, लेकिन दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। खासकर निचले इलाकों की आबादी के लिए परेशानी अब भी बनी हुई है। गंगा के तराई इलाकों और वरुणा किनारे रहने वाले दिन-रात जागकर तनाव में बिता रहे हैं। जलस्तर घटने के बाद कॉलोनियों, सड़कों और घरों में जमी गाद की सफाई करने के लिए लोग परेशान होने लगे हैं। बाढ़ का पानी कॉलोनियों के खाली प्लॉट में भरने के कारण तेज बदबू उठने लगी है। नगर निगम की टीम भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार साफ-सफाई करने के साथ फॉगिंग और दवाओं का छिड़काव कर रही है।
एडीएम वित्त वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल कैंप में बाढ़ पीड़ितों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। अब तक 1353 पैकेट ओआरएस एवं 9285 क्लोरिन टैबलेट का वितरण किया गया है। इसके साथ ही 655 लोगों का उपचार किया गया है।
774 परिवारों तक पहुंची राहत सामग्री
बाढ़ से प्रभावित 774 परिवार तक राहत सामग्री एवं 410 महिलाओं को डिग्निटी किट दिया गया। बाढ़ राहत शिविर में अब तब 2376 पीस फल व 2034 पैकेट दूध का भी वितरण किया जा चुका है। बाढ़ से प्रभावित पशुओं के लिए अब तक 802 क्विंटल भूसा का वितरण किया गया है।
अब घरों की साफ-सफाई में जुटे
गंगा का जल स्तर कम होने के बाद घरों की साफ सफाई करने में बाढ़ पीड़ित लग गए हैं। नगवां, गंगोत्री विहार, संगमपुरी कॉलोनी और हरिजन बस्ती में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। मारुति नगर, गायत्री नगर, रत्नाकर विहार, काशीपुरम कॉलोनी में सैकड़ों परिवार बाढ़ से प्रभावित हो गए थे। घर के भीतर सिल्ट और गंदा पानी भर गया था।
फसलें हो गईं चौपट
शहंशाहपुर में बाढ़ के पानी से खड़ी सारी फसलें चौपट हो गईं। हजारों एकड़ का इलाका जलमग्न होने के कारण सभी फसलें पूरी तरह डूब कर सड़ रही हैं। बाढ़ का पानी चार किलोमीटर दूर पहुंचकर खड़ी फसलों को जलमग्न कर चुका है। फसलें बाढ़ के पानी से पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। साथ ही सब्जी की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई है। संवाद
बचाव के लिए लगाई गईं 23नावें
बाढ़ से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने बृहस्पतिवार को 23 नावें लगाईं। जिले में एनडीआरएफ की एक टीम एवं जल पुलिस द्वारा भी मोटर बोट लगाकर राहत एवं बचाव कार्य किया जा रहा है। लगातार जलस्तर की निगरानी की जा रही है, जलस्तर में वृद्धि होने के कारण आम जनमानस की सुरक्षा के लिए नौकाओं के संचालन पर रोक लगाई गई है।