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बनारस के प्रसिद्ध लोटा भंटा मेले में उमड़े लोग, श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

Wed, 28 Nov 2018 02:54 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Wed, 28 Nov 2018 02:54 PM IST
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Varanasi famous lota bhanta mela celebration today
स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : amar ujala
वाराणसी में जंसा थाना क्षेत्र के रामेश्वर में आस्था का प्रतीक लोटा-भंटा मेले में बुधवार को लोग उमड़े। काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने भोर से ही वरुणा में स्नान किया। इसके बाद  रामेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया और भगवान शिव को बाटी चोखा का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया। मेले सुरक्षा को लेकर तमाम इंतजाम किए गए हैं। मेले में हर तरफ लोग ही लोग नजर आ रहे थे। कोई खरीदारी कर रहा था तो कोई बाटी चोखा बनाते नजर आ रहा था।
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बता दें कि यहां भोले शिव का पूजन-अर्चन कर पुत्र की मन्नतें मांगने के लिए लोग आते हैं। तीर्थ मान्यताओं के आधार पर भारत में जो स्थान दक्षिण में रामेश्वरम का, काशी में विश्वनाथ मंदिर का, प्रयाग में कुंभ तथा त्रिवेणी संगम का है, उसी तरह पंचक्रोशी तीर्थ यात्रा का तीसरा पड़ाव स्थल रामेश्वर का भी महत्व है।
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पौराणिक गाथाओं के अनुसार सैकड़ों वर्ष पूर्व एक युवा दंपति ने नि:सन्तान जीवन से ऊबकर वैराग्य धारण कर लिया था। उन्होंने रामेश्वर मंदिर तीर्थ स्थल पर अगहन माह में कृष्ण पक्ष के छठे के दिन रात्रि विश्राम कर भोले शिव का पूजन-अर्चन कर पुत्र की मन्नतें मांगी थी।
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भोले शिव के आशीर्वाद से दंपति को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। देश के कोने-कोने से पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए लोग लोटा भंटा के मेले में आकर भोले शिव को बाटी चोखा का प्रसाद चढ़ाकर उसे ग्रहण करते हैं।

रावण बध के बाद प्रायश्चित करने काशी आए थे राम

Varanasi famous lota bhanta mela celebration today
लोटा भंटा मेला - फोटो : amar ujala
कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम रावण बध के बाद प्रायश्चित करने काशी आए और पंचक्रोशी के इस बरुणा तट पर एक मुट्ठी रेत से शिवलिंग की स्थापना किया था तभी रामेश्वर तीर्थ स्थल का महत्व बढ़ गया।

विष्णु के दाहिने चरण के अंगूठे से निकली आदि गंगा मां वरुणा नदी में भक्त डुबकी लगाते हैं। महाभारत काल में पांडवों द्वारा यात्रा के दौरान प्रवास स्थल पंच शिवाला के दर्शन के लिए लोग सरोवर के जल के साथ पहुंचते हैं।
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