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पीएम और सीएम के लिए नाक का सवाल बना बनारस
प्रदीप मिश्र,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 06 Mar 2017 05:22 PM IST
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हर कोई यही जानना चाह रहा, बनारस में क्या चल रहा
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2014 और इससे पहले तक के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद के दावेदारों से लेकर प्रमुख दलों के नेता आमतौर पर कहते थे कि दिल्ली का रास्ता यूपी होकर जाता है। 11 मार्च को 2017 के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद नेताओं के बोल और उनके स्लोगन बदल सकते हैं। इसकी वजह है।
चुनाव के सातवें और आखिरी चरण के लिए मतदान की तारीख आते-आते पूरा चुनाव 40 सीट के बजाय आठ सीटें जीतने-हराने की जोड़-तोड़ में सिमट गया है। दिल्ली से लेकर सात समंदर पार बैठा बनारसी-गैर बनारसी, हर व्यक्ति यही जानना चाहता है कि बनारस में क्या चल रहा है?
फिलहाल तीन दिन से काशी की सड़कों पर भाजपा समर्थक ‘नमो-नमो का जाप करो-गठबंधन को साफ करो’ के नारे लगा रहे हैं। वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन के समर्थकों का ‘यूपी को ये साथ पसंद है’ प्रिय स्लोगन है।
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दरअसल, आखिरी दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लगातार प्रचार और एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले कर वाराणसी और मिर्जापुर मंडल के छह अन्य जिलों की 32 सीटों से लोगों का ध्यान कम कर दिया है।
इसे नेताओं के ‘छिपी रणनीति’ के तहत आनन-फानन में तय किए जा रहे दौरों से समझा जा सकता है। राहुल गांधी-अखिलेश यादव का रोड शो सबसे पहले 11 फरवरी, फिर 27 फरवरी और अंतत: चार मार्च को तय हुआ।
मंशा कार्यकर्ताओं को ‘चार्ज’ करने और पीएम मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रमों पर थी। दूसरी तरफ पीएम मोदी का पांच मार्च को वाराणसी में चुनावी सभा का कार्यक्रम बनाया गया।
बाद में चार से छह मार्च तक के लिए पीएम मोदी के ‘कुछ’ कार्यक्रम घोषित कर दिए गए। उधर, आनन-फानन में दो मार्च को पिंडरा विधायक अजय राय के लिए राहुल की सभा करा दी गई।
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चुनाव के सातवें और आखिरी चरण के लिए मतदान की तारीख आते-आते पूरा चुनाव 40 सीट के बजाय आठ सीटें जीतने-हराने की जोड़-तोड़ में सिमट गया है। दिल्ली से लेकर सात समंदर पार बैठा बनारसी-गैर बनारसी, हर व्यक्ति यही जानना चाहता है कि बनारस में क्या चल रहा है?
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फिलहाल तीन दिन से काशी की सड़कों पर भाजपा समर्थक ‘नमो-नमो का जाप करो-गठबंधन को साफ करो’ के नारे लगा रहे हैं। वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन के समर्थकों का ‘यूपी को ये साथ पसंद है’ प्रिय स्लोगन है।
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दरअसल, आखिरी दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लगातार प्रचार और एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले कर वाराणसी और मिर्जापुर मंडल के छह अन्य जिलों की 32 सीटों से लोगों का ध्यान कम कर दिया है।
इसे नेताओं के ‘छिपी रणनीति’ के तहत आनन-फानन में तय किए जा रहे दौरों से समझा जा सकता है। राहुल गांधी-अखिलेश यादव का रोड शो सबसे पहले 11 फरवरी, फिर 27 फरवरी और अंतत: चार मार्च को तय हुआ।
मंशा कार्यकर्ताओं को ‘चार्ज’ करने और पीएम मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रमों पर थी। दूसरी तरफ पीएम मोदी का पांच मार्च को वाराणसी में चुनावी सभा का कार्यक्रम बनाया गया।
बाद में चार से छह मार्च तक के लिए पीएम मोदी के ‘कुछ’ कार्यक्रम घोषित कर दिए गए। उधर, आनन-फानन में दो मार्च को पिंडरा विधायक अजय राय के लिए राहुल की सभा करा दी गई।
दर्शन यात्रा और ‘काम बोलता है’ रोड शो का सियासी अर्थ
road show varanasi
- फोटो : अमर उजाला
चार मार्च को ‘पार्टी के निर्देश’ पर पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन और जनता जनार्दन के दर्शन का ‘लाभ’ लिया। फिर परिवर्तन संकल्प रैली में केंद्र सरकार के अब तक के कार्यकाल की उपलब्धियों और बतौर सांसद क्षेत्र में कराए गए कार्यों की जानकारी के साथ आगे के लिए एजेंडा पेश किया गया।
जाहिर है कि इस दौरान प्रदेश की सपा सरकार को निशाने पर रहना ही था। इसी दिन राहुल और अखिलेश पहली बार डिंपल यादव को भी काशी ले आए और उन्हें रोड शो का हिस्सा बनाकर ‘काम बोलता है’ का प्रचार किया। जोश में यहां तक कह दिया कि केंद्र सरकार के मुखिया मोदी गठबंधन से डर गए हैं।
पांच मार्च को काशी विद्यापीठ में पीएम मोदी की एक सभा पहले से तय थी लेकिन चार मार्च की रात में पीएम की जनता दर्शन की ‘हिडेन स्ट्रेटजी’ सामने आ गई। छह मार्च को पीएम फिर वाराणसी आएंगे। सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर से भी कार्रवाई हुई और चुनाव प्रचार के अंतिम दिन छह मार्च को सलाहकारों ने वाराणसी में ‘दोनों लड़कों’ की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की योजना बना डाली।
संभावना है कि चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में दोनों नेता वाराणसी के लिए कोई बड़ा चुनावी वादा करेंगे। हो सकता है कि वे विकास कार्यों को लेकर कोई स्पष्टीकरण दें या फिर केंद्र सरकार पर सवाल उठाएं।
जाहिर है कि इस दौरान प्रदेश की सपा सरकार को निशाने पर रहना ही था। इसी दिन राहुल और अखिलेश पहली बार डिंपल यादव को भी काशी ले आए और उन्हें रोड शो का हिस्सा बनाकर ‘काम बोलता है’ का प्रचार किया। जोश में यहां तक कह दिया कि केंद्र सरकार के मुखिया मोदी गठबंधन से डर गए हैं।
पांच मार्च को काशी विद्यापीठ में पीएम मोदी की एक सभा पहले से तय थी लेकिन चार मार्च की रात में पीएम की जनता दर्शन की ‘हिडेन स्ट्रेटजी’ सामने आ गई। छह मार्च को पीएम फिर वाराणसी आएंगे। सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर से भी कार्रवाई हुई और चुनाव प्रचार के अंतिम दिन छह मार्च को सलाहकारों ने वाराणसी में ‘दोनों लड़कों’ की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की योजना बना डाली।
संभावना है कि चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में दोनों नेता वाराणसी के लिए कोई बड़ा चुनावी वादा करेंगे। हो सकता है कि वे विकास कार्यों को लेकर कोई स्पष्टीकरण दें या फिर केंद्र सरकार पर सवाल उठाएं।
भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन की पैनी नजर
election rally
वाराणसी की कुल आठ सीटों पर दोनों भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन की पैनी नजर है। पीएम मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में दो कैंट और दक्षिणी की यात्रा शनिवार को थी, जबकि रविवार को वह उत्तरी से फिर कैंट क्षेत्र में लोगों से मिले।
छह मार्च को चुना प्रचार खत्म होने से कुछ घंटे पहले वह कैंट क्षेत्र के गढ़वा घाट आश्रम में तो जाएंगे ही, रोहनिया और सेवापुरी क्षेत्र के सीमावर्ती खुशीपुर गांव में सभा को भी संबोधित करेंगे। तीन दिन मेें पीएम अपने संसदीय क्षेत्र की तीन विधानसभाएं छान डालेंगे।
इससे पहले शनिवार को अखिलेश ने अपनी सिटिंग सीटों रोहनिया और सेवापुरी क्षेत्र के लोगों के लिए टड़िया में सभा की, जबकि फिलहाल बसपा के खाते में चल रहीं अजगरा और शिवपुर के लोगों को मुनारी में संबोधित किया। बसपा सुप्रीमो ने जरूर रोहनिया क्षेत्र में एक ही सभा को संबोधित कर अपनी बात कही।
छह मार्च को चुना प्रचार खत्म होने से कुछ घंटे पहले वह कैंट क्षेत्र के गढ़वा घाट आश्रम में तो जाएंगे ही, रोहनिया और सेवापुरी क्षेत्र के सीमावर्ती खुशीपुर गांव में सभा को भी संबोधित करेंगे। तीन दिन मेें पीएम अपने संसदीय क्षेत्र की तीन विधानसभाएं छान डालेंगे।
इससे पहले शनिवार को अखिलेश ने अपनी सिटिंग सीटों रोहनिया और सेवापुरी क्षेत्र के लोगों के लिए टड़िया में सभा की, जबकि फिलहाल बसपा के खाते में चल रहीं अजगरा और शिवपुर के लोगों को मुनारी में संबोधित किया। बसपा सुप्रीमो ने जरूर रोहनिया क्षेत्र में एक ही सभा को संबोधित कर अपनी बात कही।