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Varanasi News: फर्जी आदेश की प्रति दिखाकर काशी राजपरिवार की जमीन पर कब्जा, कोर्ट ने केस दर्ज करने का दिया आदेश
Thu, 15 Feb 2024 05:22 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: प्रगति चंद
Updated Thu, 15 Feb 2024 05:22 PM IST
सार
बनारस के काशी राज परिवार की जमीन पर कब्जा करने को लेकर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मंडुवाडीह थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया है।
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Police FIR
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
काशी राजपरिवार की शिवदासपुर में जमीन पर फर्जी आदेश का हवाला देते हुए दो आरोपियों ने कब्जा कर लिया। खुलासा होने पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय साकेत मिश्र की अदालत ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश मंडुवाडीह थाना अध्यक्ष को दिया है।
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शिवदासपुर निवासी श्याम नारायण सिंह ने काशी राजपरिवार के डॉ. अनंत नारायण सिंह से 2040 वर्ग फुट जमीन की 16 नवंबर 2022 को रजिस्ट्री कराई थी। उसमें तीन खंडहरनुमा कमरे भी थे। आरोप है कि श्याम नारायण सिंह बीते वर्ष 12 जून को उत्तराखंड दर्शन करने गए तो शिवदासपुर निवासी विशुन लाल सिंह और रेनू सिंह उस खंडहरनुमा मकान में जबरन ताला तोड़कर घुस गए। दोनों उसे अपनी संपत्ति बताने लगे।
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श्याम नारायण सिंह ने जब इसकी शिकायत मंडुवाडीह थाने में की तो आरोपियों ने 1942 के एक मुकदमे का हवाला दिया। साथ ही 28 मार्च 1944 का निर्णय दिखाया। कहा कि महाराजा डॉ. विभूति नारायण सिंह बनाम भगेलू सिंह व वंशराज सिंह के बीच चले वाद का यह निर्णय है। श्याम नारायण सिंह ने निर्णय को फर्जी बताया और कहा कि उस समय महाराजा डॉ. विभूति नारायण सिंह अवयस्क थे। ऐसे में उनके खिलाफ कोई मुकदमा दाखिल नहीं हो सकता। निर्णय की जो प्रति दाखिल की गई है वह निर्णय के 30 साल बाद की नकल है।
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श्याम नारायण सिंह ने निर्णय की प्रति के लिए कोर्ट में आवेदन दिया तो रिपोर्ट आई कि उससे संबंधित कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। इस आधार पर उन्होंने निर्णय की प्रति को फर्जी व कूटरचित बताते हुए संपत्ति हड़पने के लिए आपराधिक कृत्य का आरोप लगा कर मुकदमा दर्ज करने का अनुरोध कोर्ट से किया। अदालत ने प्रकरण में सुनवाई के बाद आदेश में कहा कि अपराध संज्ञेय प्रकृति का है। आवेदन शपथ पत्र के साथ दिया गया है।
बिना विवेचना कराए सत्यता का पता संभव नहीं है। इस प्रकरण में महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि महाराजा डॉ. विभूति नारायण सिंह जब अवयस्क थे, तब ब्रिटिश शासन ने बनारस स्टेट को संचालित करने के लिए 11 सदस्यों की सिन्हा कमेटी फरवरी 1939 में गठित की थी। इससे फर्जीवाड़े का खुलासा करने में श्याम नारायण सिंह को मदद मिली।