सावन के तीसरे सोमवार पर ग्रह नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 20 जुलाई को हरियाली और सोमवती अमावस्या के साथ पुनर्वसु नक्षत्र, हर्षण योग, चतुष्पद करण, सर्वार्थसिद्धि योग तीसरे श्रावण सोमवार को बेहद खास बना रहा है। 20 साल बाद हरियाली अमावस्या पर सोमवती का संयोग बन रहा है।
20 साल बाद बन रहा ग्रह नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग, इस तरह करें धार्मिक अनुष्ठान पुण्य की होगी प्राप्ति
सोमवती अमावस्या पर तीर्थ स्थानों, नदियों, जलाशयों में स्नान करना और दान-दर्शन का विशेष महत्व है। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार ऐसा संभव नहीं है इसलिए लोग पवित्र जल का मिश्रण करके घर पर स्नानदान करें। इससे भी गंगा में स्नान के समान पुण्य की प्राप्ति होगी।
हरियाली अमावस्या पर होती है अच्छी खेती की कामना
श्रावण अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहते हैं। भगवान शिव-पार्वती के साथ पितरों की भी पूजा होती है। अच्छी खेती के लिए किसान हल, हंसिया की पूजा भी करते हैं। किसानों की समृद्धि और पर्यावरण की सुरक्षा का संदेश देने के लिए यह पर्व मनाया जाता है। श्रावण अमावस्या पर किसी एकांत स्थान के जलाशय में जाकर स्नान-दान, गरीबों को भोजन कराने से पितृगण प्रसन्न होते हैं।
अमावस्या पर शिव-पार्वती पूजा का महत्व
अमावस्या तिथि पर शिवजी के साथ ही देवी पार्वती का पूजन अवश्य करें। पूजा में ऊं उमामहेश्वराभ्यां नम: मंत्र का जप करें। माता को सुहाग का सामान चढ़ाएं। शिवलिंग पर पंचामृत अर्पित करें। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर बनाना चाहिए।
कुंवारी कन्याएं करती हैं मनचाहे वर के लिए व्रत
हरियाली अमावस्या पर मां पार्वती की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिल सकता है। ऐसी मान्यता पुराने समय से चली आ रही है। विवाहित महिलाएं भी इस तिथि पर व्रत करती हैं और देवी मां की पूजा करती है। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन सुखी बना रहता है।
पितरों की याद में किया जा सकता है पौधारोपण
इस तिथि पर पितरों के लिए पूजा-पाठ और श्राद्ध-तर्पण किया जाता है। पितरों को चढ़ाने वाले फूल सेवंती, अगस्त, तुलसी, भृंगराज, शमी, आंवला, श्वेत पुष्प आदि के पौधे लगा सकते हैं। इनका रोपण करें और आगामी श्राद्धपक्ष में पितरों को अर्पित करें। इससे घर-परिवार में सुख बढ़ेगा। पौधों के रूप में पूर्वजों की याद भी बनी रहेगी।
चार ग्रह रहेंगे अपनी राशि में
शुभग्रह योगों में बुध, गुरु, शुक्र, शनि चार ग्रह अपनी राशि में रहेंगे। वहीं, राहु पर मंगल की दृष्टि से अनावृष्टियोग है। वस्तुओं के दाम में उछाल रहेगा। पेट्रोल एवं तेल के भाव में वृद्धि का दुर्योग है। आर्थिक हानि से अनेक कंपनियां तंग रहेंगी। भ्रष्टाचार में वृद्धि के संकेत हैं। धार्मिक अभ्युदय के लक्षण हैं। विदेश नीति प्रबल होगी।