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20 साल बाद बन रहा ग्रह नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग, इस तरह करें धार्मिक अनुष्ठान पुण्य की होगी प्राप्ति

Fri, 10 Jul 2020 03:55 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 10 Jul 2020 03:55 PM IST
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A rare combination of planetary constellations being formed after 20 years
काशी विश्वनाथ की पूजा - फोटो : अमर उजाला।

सावन के तीसरे सोमवार पर ग्रह नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 20 जुलाई को हरियाली और सोमवती अमावस्या के साथ पुनर्वसु नक्षत्र, हर्षण योग, चतुष्पद करण, सर्वार्थसिद्धि योग तीसरे श्रावण सोमवार को बेहद खास बना रहा है। 20 साल बाद हरियाली अमावस्या पर सोमवती का संयोग बन रहा है।



20 साल पहले शुक्रवार 31 जुलाई 2000 में सोमवती अमावस्या थी। इसके बाद 2004 में सावन महीने को पुरुषोत्तम मास के रूप में मनाया गया था। उस साल दो बार सावन महीना पड़ा था। दूसरे सावन महीने में सोमवती अमावस्या का संयोग बना था। ज्योतिषाचार्य गणेश प्रसाद मिश्र का कहना है कि हरियाली अमावस्या के दिन पुनर्वसु नक्षत्र के बाद रात्रि में 9:47 बजे से पुष्य नक्षत्र रहेगा।
 

A rare combination of planetary constellations being formed after 20 years
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

सोमवती अमावस्या पर तीर्थ स्थानों, नदियों, जलाशयों में स्नान करना और दान-दर्शन का विशेष महत्व है। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार ऐसा संभव नहीं है इसलिए लोग पवित्र जल का मिश्रण करके घर पर स्नानदान करें। इससे भी गंगा में स्नान के समान पुण्य की प्राप्ति होगी।

हरियाली अमावस्या पर होती है अच्छी खेती की कामना

श्रावण अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहते हैं। भगवान शिव-पार्वती के साथ पितरों की भी पूजा होती है। अच्छी खेती के लिए किसान हल, हंसिया की पूजा भी करते हैं। किसानों की समृद्धि और पर्यावरण की सुरक्षा का संदेश देने के लिए यह पर्व मनाया जाता है। श्रावण अमावस्या पर किसी एकांत स्थान के जलाशय में जाकर स्नान-दान, गरीबों को भोजन कराने से पितृगण प्रसन्न होते हैं।

A rare combination of planetary constellations being formed after 20 years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

अमावस्या पर शिव-पार्वती पूजा का महत्व

अमावस्या तिथि पर शिवजी के साथ ही देवी पार्वती का पूजन अवश्य करें। पूजा में ऊं उमामहेश्वराभ्यां नम: मंत्र का जप करें। माता को सुहाग का सामान चढ़ाएं। शिवलिंग पर पंचामृत अर्पित करें। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर बनाना चाहिए।

कुंवारी कन्याएं करती हैं मनचाहे वर के लिए व्रत

हरियाली अमावस्या पर मां पार्वती की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिल सकता है। ऐसी मान्यता पुराने समय से चली आ रही है। विवाहित महिलाएं भी इस तिथि पर व्रत करती हैं और देवी मां की पूजा करती है। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन सुखी बना रहता है।

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A rare combination of planetary constellations being formed after 20 years
कतार में लगे भक्त - फोटो : अमर उजाला

पितरों की याद में किया जा सकता है पौधारोपण

इस तिथि पर पितरों के लिए पूजा-पाठ और श्राद्ध-तर्पण किया जाता है। पितरों को चढ़ाने वाले फूल सेवंती, अगस्त, तुलसी, भृंगराज, शमी, आंवला, श्वेत पुष्प आदि के पौधे लगा सकते हैं। इनका रोपण करें और आगामी श्राद्धपक्ष में पितरों को अर्पित करें। इससे घर-परिवार में सुख बढ़ेगा। पौधों के रूप में पूर्वजों की याद भी बनी रहेगी।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

चार ग्रह रहेंगे अपनी राशि में

शुभग्रह योगों में बुध, गुरु, शुक्र, शनि चार ग्रह अपनी राशि में रहेंगे। वहीं, राहु पर मंगल की दृष्टि से अनावृष्टियोग है। वस्तुओं के दाम में उछाल रहेगा। पेट्रोल एवं तेल के भाव में वृद्धि का दुर्योग है। आर्थिक हानि से अनेक कंपनियां तंग रहेंगी। भ्रष्टाचार में वृद्धि के संकेत हैं। धार्मिक अभ्युदय के लक्षण हैं। विदेश नीति प्रबल होगी।

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