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सावन में सारनाथ में विराजते हैं काशीपुराधिपति

Thu, 09 Jul 2020 12:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2020 12:51 AM IST
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सारनाथ। काशी से 10 किलोमीटर पूर्वोत्तर में विराजते हैं सारंगनाथ महादेव। मान्यता है कि सावन मास में काशीपुराधिपति काशी छोड़कर यहीं निवास करते हैं। सारंगनाथ महादेव मंदिर में भगवान शिव अपने साले ऋषि सारंग नाथ के साथ विराजमान हैं। सावन के महीने में यहां दर्शन पूजन और जलाभिषेक करने से वही पुण्य मिलता है जितना कि काशी विश्वनाथ मंदिर में। भगवान श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं की पूर्ति करने के साथ ही चर्मरोग से मुक्ति भी देते हैं।
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सारंगनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी रामप्यारे पांडेय ने बताया कि लोक कथाओं में कहा जाता है कि सारंग ऋषि दक्ष प्रजापति के पुत्र थे और उनकी बहन सती थी। देव ऋषि नारद के कहने से सारंग ऋषि राजपाट छोड़कर तपस्या के लिए निकल गए थे। इधर सती ने कैलाशपति भगवान शंकर से विवाह रचा लिया। सारंग ऋषि जब वापस अपने राजमहल आते हैं तो विवाह का समाचार सुनकर अत्यधिक दुखी होते हैं। अपनी माता से उन्होंने कहा कि बहन सती का विवाह आपने एक ऐसे व्यक्ति से कर दिया जिसके पास ना ही घर है, ना तन पे ढंग के कपड़े हैं। मृगछाला लपेटे भूतों टोली के साथ घूमता फिरता रहता है। माता समझाती हैं कि जिसके प्रारब्ध में जो होता है उसे वही वर मिलता है। तुम बहुत दिनों बाद आए हो जाकर अपने बहन से मिल आओ।
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