Varanasi: फुटबॉल खेलते बास्केटबॉल खिलाड़ी गश खाकर गिरे, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत, लोग स्तब्ध
अजय कुमार सिंह बास्केटबॉल के खिलाड़ी थे। बरेका में लोको असेम्बली शॉप में फिटर के पद पर कार्यरत थे। आज बरेका इंटर कालेज ग्राउंड पर बास्केट बॉल की प्रैक्टिस करते समय अचानक गिरे और उनकी मृत्यु हो गई।
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बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के बॉस्केटबॉल खिलाड़ी अजय कुमार सिंह (40) की गुरुवार को फुटबॉल खेलने के दौरान मौत हो गई। अजय की मौत की वजह हृदय गति का रुकना बताया गया है। अजय की असामयिक मौत से उनके परिजन और करीबी स्तब्ध हैं। इसके साथ ही बरेका के खिलाड़ियों में शोक की लहर व्याप्त है। वहीं, अजय की मौत की सूचना पाकर मंडुवाडीह थाने की पुलिस ने उनका शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
बरेका परिसर स्थित सरकारी आवास में रहने वाले अजय लोको असेंबली शॉप में फिटर के पद पर तैनात थे। बरेका के क्रीड़ा अधिकारी बहादुर प्रसाद ने बताया कि सुबह के समय अजय इंटर कॉलेज के खेल मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे। उसी दौरान वह अचानक गश खाकर गिर पड़े। अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में उनकी मौत हो गई।
पिता समेत अन्य परिजनों का हाल बेहाल
पोस्टर्माटम के बाद उनका शव परिवार को सौंप दिया गया है। वहीं, अजय की मौत के बाद उनकी पत्नी स्मिता, बेटे अमिताभ व शिवांश, बेटी सौम्या और पिता कमला पहलवान की हालत बेसुधों के जैसी थी। बरेका कर्मी और रिश्तेदार बड़ी ही मुश्किल से अजय के परिजनों को संभाले हुए थे।
पिछले साल छात्रा और युवक की हुई थी मौत
बीएचयू के फिजियोलॉजी डिपार्टमेंट की शोध छात्रा अनुभा उपाध्याय की योग करने के दौरान 27 अक्तूबर 2022 को मौत हो गई थी। उससे पहले अनुभा पूरी तरह से फिट थी। इसके बाद 25 नवंबर 2022 को मनोज विश्वकर्मा एक शादी समारोह में चेतगंज क्षेत्र में गए थे। डांस करते समय वह गिरे और मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। दोनों की मौत की वजह डॉक्टरों ने हृदय गति का रुकना बताया था।
खिलाड़ियों के सेहत की स्क्रीनिंग जरूरी - प्रो. ओमशंकर
बीएचयू के हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओमशंकर का कहना है कि इस तरह के मामलों में यह देखने को मिलता है कि संबंधित व्यक्ति में कई तरह की बीमारियां होती हैं। विदेशों में स्क्रीनिंग प्रोग्राम के तहत खिलाड़ियों के सेहत की स्क्रीनिंग होती है। जिस तरह की घटना बरेका में खिलाड़ी के साथ हुई, उसे चिकित्सकीय भाषा में लांग क्यूटी सिंड्रोम बोलते हैं। इसमें शरीर में बांयी तरफ के वाल्व में सिकुड़न हो जाती है और खून में रुकावट आ जाती है। तेजी से दिल धड़कने लगता है। इसमें हार्ट अटैक होने की संभावना अधिक रहती है।
प्रो. ओमशंकर ने कहा कि इस तरह की घटनाओं में तुरंत सीपीआर भी अधिक उपयोगी होती है। इस तरह की मौत के मामलों में पोस्टमार्टम होना चाहिए, जिससे कि बीमारी की सही वजह की जानकारी मिलेगी। बताया कि कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद हृदय रोग के कई मामले सामने आ रहे हैं।