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वरुणा का गला घोंटने वाले कारोबारी को नोटिस देकर भूल गया प्रशासन
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 20 Jun 2017 04:51 PM IST
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राजस्व विभाग की मिलीभगत से होटल कारोबारी ने राजस्व रिकॉर्ड में कराई छेड़छाड़
- फोटो : अमर उजाला
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भीम नगर में वरुणा की तलहटी पाटकर कब्जा जमाने वाले होटल कारोबारी हीरालाल को 36 लाख रुपये जुर्माने का नोटिस भेजने के बाद प्रशासन भूल गया। पखवारे भर का समय गुजर गया लेकिन अब तक न रकम जमा कराई गई न ही प्रशासन ने इसके लिए कोई कदम उठाया।
तत्कालीन एसीएम चतुर्थ त्रिभुवन के तबादले के बाद से यह पूरा मामला ठंडे बस्ते में है। इसी मामले में नोटिस जारी करने के बाद जिला प्रशासन ने त्रिभुवन को तत्काल प्रभाव से रिलीव कर दिया था।
चंदौली के पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल के भाई एवं होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल ने भीम नगर में तीन बीघे से ज्यादा जमीन पाटकर कब्जा ली। यहां वरुणा की तलहटी तक करीब पचास फीट ऊंचाई में मिट्टी पाटी गई है। इसी में नगर निगम की डेढ़ बीघे जमीन भी फर्जी तरीके विनियमित करा ली गई थी।
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‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद जिला प्रशासन को न सिर्फ विनियमन रद्द करना पड़ा बल्कि इसका आदेश करने वाले अपर एसडीएम के न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी सीज करते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति शासन से करनी पड़ी।
पूरे मामले की छानबीन के साथ ही ज्यादा मात्रा में अवैध खनन से लाई गई मिट्टी का भी आकलन कराया गया था। चार जून को खनन विभाग ने इसका आकलन कर हीरालाल को 36 लाख रुपये जमा करने का नोटिस भेजा था।
इसके लिए 15 दिन की मोहलत दी थी लेकिन समय गुजरने के बाद भी हीरालाल की ओर से न तो नोटिस का जवाब दिया गया और न ही जुर्माना राशि जमा करने की कोई पहल की गई। एडीएम प्रशासन मुनींद्र नाथ उपाध्याय का कहना है कि हीरालाल के अधिवक्ता ने एक-दो दिन में जवाब देने को कहा है।
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तत्कालीन एसीएम चतुर्थ त्रिभुवन के तबादले के बाद से यह पूरा मामला ठंडे बस्ते में है। इसी मामले में नोटिस जारी करने के बाद जिला प्रशासन ने त्रिभुवन को तत्काल प्रभाव से रिलीव कर दिया था।
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चंदौली के पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल के भाई एवं होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल ने भीम नगर में तीन बीघे से ज्यादा जमीन पाटकर कब्जा ली। यहां वरुणा की तलहटी तक करीब पचास फीट ऊंचाई में मिट्टी पाटी गई है। इसी में नगर निगम की डेढ़ बीघे जमीन भी फर्जी तरीके विनियमित करा ली गई थी।
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‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद जिला प्रशासन को न सिर्फ विनियमन रद्द करना पड़ा बल्कि इसका आदेश करने वाले अपर एसडीएम के न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी सीज करते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति शासन से करनी पड़ी।
पूरे मामले की छानबीन के साथ ही ज्यादा मात्रा में अवैध खनन से लाई गई मिट्टी का भी आकलन कराया गया था। चार जून को खनन विभाग ने इसका आकलन कर हीरालाल को 36 लाख रुपये जमा करने का नोटिस भेजा था।
इसके लिए 15 दिन की मोहलत दी थी लेकिन समय गुजरने के बाद भी हीरालाल की ओर से न तो नोटिस का जवाब दिया गया और न ही जुर्माना राशि जमा करने की कोई पहल की गई। एडीएम प्रशासन मुनींद्र नाथ उपाध्याय का कहना है कि हीरालाल के अधिवक्ता ने एक-दो दिन में जवाब देने को कहा है।