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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Varanasi 223 artists from 15 states created 43 figures from 100 tons of scrap beautifying intersections of Kas

Varanasi News: 15 राज्यों के 223 कलाकारों ने 100 टन स्क्रैप से बनाईं 43 आकृतियां, संवरे काशी के चौराहे

Sun, 19 Oct 2025 12:50 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 19 Oct 2025 12:50 PM IST
सार

वाराणसी में प्रमुख चाैराहों-तिरोहों की शोभा बढ़ गई है। यहां बीच में स्क्रैप से बनी आकृतियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं। बाबतपुर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन सहित विभिन्न स्थानों पर आने-जाने वाले लोग इसके साथ सेल्फी लेते हैं।

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Varanasi 223 artists from 15 states created 43 figures from 100 tons of scrap beautifying intersections of Kas
कैंट स्टेशन पर स्क्रैप से बनी नंदी की प्रतिमा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi New: बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) से निकले 100 टन स्क्रैप से शहर के 43 जगहों पर आकृतियां बनाई गई हैं। इन जगहों को संवारने में चुनार के पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। छह महीने में 15 राज्यों के 223 कलाकारों ने बाबतपुर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन से लेकर प्रमुख चौराहों को संवारा। कैंट रेलवे स्टेशन पर बाहर सर्कुलेटिंग एरिया में नंदी की आकृति बनाई गई है। 

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अंदर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए पौधे की आकृति बनाई गई है। वाराणसी मूर्तिकला परियोजना के तहत संस्कृति मंत्रालय, रेल मंत्रालय (बनारस लोकोमोटिव वर्क्स) और ललित कला अकादमी ने संयुक्त पहल की है। वाराणसी विकास प्राधिकरण ने भी सहयोग किया है। 
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ललित कला अकादमी नई दिल्ली, बीएचयू, अन्य विश्वविद्यालयों के कला के शिक्षक, युवा कलाकारों ने प्रतिभा दिखाई है। बरेका के पीआरओ राजेश कुमार ने बताया कि स्वच्छता अभियान के तहत ही स्क्रैप से 60 स्थानों को संवारा जाना है।

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काशी के प्रमुख चाैराहों की बढ़ी शोभा

ललित कला अकादमी नई दिल्ली में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गायत्री माथुर का कहना है कि बरेका के मुख्य यांत्रिक अभियंता सुनील कुमार के मार्गदर्शन में परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए बरेका के इंजीनियरिंग परिसर में ओपन-एयर कला गैलरी बनाई गई। नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 तक काम किया गया। 

आकृतियों को डिजाइन करने के साथ ही अंतिम रूप भी दिया गया। 31 स्क्रैप कलाकार, 9 पत्थरों पर काम करने वाले कलाकार, 13 सहायक, 8 नक्काश, 97 विद्यार्थी (विभिन्न कला विद्यालयों के ) और बरेका से ही 65 तकनीकी कर्मचारी शामिल रहे। 

डॉ. माथुर ने बताया कि परियोजना में उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, असम, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मणिपुर, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब और दिल्ली से आए कलाकारों ने जो भी मूर्तियां बनाई हैं, वह काशी की शाश्वत परंपरा के जीवंत साक्ष्य के रूप में खड़ी हैं। हर मूर्ति काशी की उस आत्मा को अभिव्यक्त करती है।

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