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एयर शो: 60 किमी दूर आसमान में विमानों का ठहराव, सिग्नल मिलते ही आवाज से तेज पहुंचे; महादेव का जयघोष

Sun, 25 Oct 2026 07:06 AM IST
Aman Vishwakarma हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 25 Oct 2026 07:06 AM IST
सार

काशी से 60 किमी दूर आसमान में विमानों के लिए होल्डिंग एरिया बनाया जाता है। सिग्नल मिलते ही विमान ध्वनि से तेज रफ्तार में दो से पांच मिनट में गंगा घाटों तक पहुंचते हैं। बमरौली से आने में 12-15 मिनट लगते हैं। पायलटों को गंगा में उड़ रहे परिंदों की रियल टाइम लोकेशन भी मिलती है। वहीं, नेवी के पायलट हेलीकॉप्टर से जल के करीब करतब दिखाते हैं।

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एयर शो को देखकर रोमांच से भर गए लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी के चारों ओर आसमान में करीब 60 किलोमीटर तक एयर शो के विमानों के लिए एक ठहराव है। यही उनका होल्डिंग एरिया है, जहां एटीसी से सिग्नल मिलते ही सारे एयरक्राफ्ट ध्वनि से भी तेज गति से यानी दो से पांच मिनट में पहुंच रहे हैं और इतने ही देर तक खतरनाक और रोमांचित करने वाले करतब दिखाकर आंखों से ओझल हो जा रहे हैं। कभी 2100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आठ से 10 हजार फीट की ऊंचाई तक जाकर लड़ाकू विमानों के वर्टिकल चार्ली करतब पर लोगों का उत्साह चरम पर पहुंच जा रहा है तो दूसरी ओर एयरोबेटिक मैनुअर्स में 360 डिग्री हवाई फॉर्मेशन देख लोग बरबस ही महादेव का जयघोष करने लग रहे हैं।

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वाराणसी में एयर शो का आज होगा समापन। - फोटो : अमर उजाला

गंगा से रखी जा रही पक्षियों पर निगरानी
एटीसी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर विमान प्रयागराज बमरौली बेस से ही उड़ान भरकर काशी पहुंच रहे हैं। वहां से चलने के बाद सभी विमान काशी के होल्डिंग एरिया में आ जाते हैं। दूसरी ओर एयरफोर्स के कई जवान गंगा में बोट से और घाट पर एटीसी के पास दूरबीन और अन्य उपकरणों से पक्षियों के उड़ने की निगरानी कर रहे हैं। उनकी गतिविधियों पर बाकायदा नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही प्रदर्शन स्थल पर कोई पक्षी आता है तो उनका रियल टाइम लोकेशन एटीसी को दे दिया जाता है। इसके बाद विमान में बैठे पायलट तक मेसेज पहुंच जाता है। यदि वे चल चुके हैं तो अपने रूट में थोड़ा-बहुत बदलाव कर करतब दिखाते हैं।

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मंदिर के ढरोखे से एयर शो। - फोटो : अमर उजाला

गंगा पर करतब दिखाने वालों में नेवी के भी पायलट
गंगा में वायुसेना के इस शो में नौसेना के भी अधिकारियों की मौजूदगी रही। दिल्ली से आए नेवी के एक अधिकारी ने बताया कि जल के समीप जो भी एयरक्राफ्ट या हेलिकॉप्टर उड़ते हैं, उसमें नेवी के भी पायलट होते हैं। करीब तीन पायलट इस शो में अपना करतब दिखाकर जा चुके हैं। त्रिदेव फॉर्मेशन का नेतृत्व नेवी के कामोव हेलिकॉप्टर ने किया। इसमें थल सेना का एएलएच एमके-3 हेलिकॉप्टर भी था। दरअसल समुद्र में एयरक्राफ्ट कैरियर में जब किसी भी लड़ाकू विमान या हेलिकॉप्टर को उतारा या टेकओवर कराया जाता है तो उस समय नेवी के पायलट होते हैं क्योंकि रनवे का सतह छोटा और बेहद हिलता-डुलता रहता है। इसका अंदाजा नेवी के पायलट अच्छे से लगा लेते हैं।

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