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बीएचयू में जल्द शुरू होगा काशी अध्ययन पाठ्यक्रम
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वाराणसी। बीएचयू का इतिहास विभाग देश के युवाओं काशी के महात्म्य से परिचित कराएगा। काशी की विरासत, संस्कृति और पौराणिकता पर बीएचयू में जल्द ही अध्ययन-अध्यापन शुरू होगा। शुक्रवार को बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय में काशी अध्ययन, आर्काइवल स्टडीज एंड मैनेजमेंट और डायस्पोरा स्टडीज पर शुरू हो रहे स्नातकोतर कोर्स को विशेषज्ञों के पैनल ने पारित कर दिया।
बीएचयू में शुरू होने वाले इस नए कोर्स में रथ यात्रा, नाग-नथ्थैया, नक्कटैया, भरत मिलाप और प्राचीन मेले, देव दीपावली और गंगा आरती समेत सभी पर्वों को शामिल किया जाएगा। कुलपति द्वारा गठित पैनल में शामिल लोक गायिका मालिनी अवस्थी, पदमश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य और कलाविद अमिताभ भट्टाचार्य ने कोर्स के लिए अपने-अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। मार्क ट्वेन और प्रिंसेप समेत अंग्रेज अधिकारियों द्वारा बनारस पर लिखी सच्चाई को छात्रों तक पहुंचाया जाएगा।
आर्काइवल स्टडीज में स्नातकोतर कोर्स के तहत बीएचयू में नए सत्र से करीब 45 सीटें आ सकती हैं। हालांकि उससे पहले इस कोर्स को एकेडमिक काउंसिल और कार्यकारिणी परिषद से पारित कराना होगा। इस कोर्स में यूजी और पीजी डुअल डिग्री कोर्स भी चलाया जाएगा। स्नातकोतर कोर्स में तीन सेमेस्टर तक कक्षाएं और ट्रेनिंग दी जाएगी। कोर्स की जिम्मेदारी धु्रव कुमार को दी गई है। पाठ्यक्रम निर्माण समिति में अध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर मिश्रा और सदस्य प्रो. केशव मिश्रा, प्रो. तबीर कालम, प्रो. रंजना शील और डॉ. धु्रव कुमार सिंह को बनाया गया है।
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बीएचयू में शुरू होने वाले इस नए कोर्स में रथ यात्रा, नाग-नथ्थैया, नक्कटैया, भरत मिलाप और प्राचीन मेले, देव दीपावली और गंगा आरती समेत सभी पर्वों को शामिल किया जाएगा। कुलपति द्वारा गठित पैनल में शामिल लोक गायिका मालिनी अवस्थी, पदमश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य और कलाविद अमिताभ भट्टाचार्य ने कोर्स के लिए अपने-अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। मार्क ट्वेन और प्रिंसेप समेत अंग्रेज अधिकारियों द्वारा बनारस पर लिखी सच्चाई को छात्रों तक पहुंचाया जाएगा।
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आर्काइवल स्टडीज में स्नातकोतर कोर्स के तहत बीएचयू में नए सत्र से करीब 45 सीटें आ सकती हैं। हालांकि उससे पहले इस कोर्स को एकेडमिक काउंसिल और कार्यकारिणी परिषद से पारित कराना होगा। इस कोर्स में यूजी और पीजी डुअल डिग्री कोर्स भी चलाया जाएगा। स्नातकोतर कोर्स में तीन सेमेस्टर तक कक्षाएं और ट्रेनिंग दी जाएगी। कोर्स की जिम्मेदारी धु्रव कुमार को दी गई है। पाठ्यक्रम निर्माण समिति में अध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर मिश्रा और सदस्य प्रो. केशव मिश्रा, प्रो. तबीर कालम, प्रो. रंजना शील और डॉ. धु्रव कुमार सिंह को बनाया गया है।
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