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श्रद्धालुओं के लिए खुले रत्नेश्वर महादेव के कपाट

Fri, 19 Feb 2021 01:55 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 Feb 2021 01:55 AM IST
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varaansi ratneshvar temple news
गंगा की तलहटी में किवदंतियों को समेटे रत्नेश्वर महादेव मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। छह से सात महीने तक गंगा के जल में डूबे रहने वाले मंदिर को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पहल की और मंदिर के अंदर से 10 फीट मिट्टी को हटाकर दर्शन पूजन की शुरुआत की।
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रत्नेश्वर महादेव में सफाई के लिए स्थानीय सभासद दीपक, संतोष शर्मा और स्वागत काशी फाउंडेशन के सदस्यों ने 21 दिनों तक मेहनत की। फाउंडेशन के अभिषेक शर्मा ने बताया कि हम लोगों ने मंदिर की सफाई के लिए नगर निगम को पत्र लिखा था लेकिन वहां से कोई मदद नहीं मिल सकी। इसके बाद हम लोगों ने खुद ही सफाई करने का निर्णय लिया।
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छह महीने तक पानी में डूबा रहता है मंदिर
विशेश्वर खंड में अंश-अंश झुकता रत्नेश्वर महादेव का मंदिर है। सावन के महीने में भी रत्नेश्वर महादेव मंदिर में न तो बोल बम के नारे गूंजते हैं और ना ही घंटा घड़ियाल की आवाज सुनाई देती है। महाश्मशान के पास बसा करीब तीन सौ बरस पुराना यह दुर्लभ मंदिर आज भी लोगों के लिए आश्चर्य ही है। मणिकर्णिका घाट के समीप दत्तात्रेय घाट पर स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर रत्नेश्वर महादेव 300 साल से एक तरफ झुका है। यह मंदिर छह महीने तक पानी में डूबा रहता है। बाढ़ के दिनों में 40 फीट से ऊंचे इस मंदिर के शिखर तक पानी पहुंच जाता है।
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यात्रियों में काशी करवत का भ्रम
काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि कई लोग तीर्थ यात्रियों और श्रद्धालुओं को इसे काशी करवट बताकर मूर्ख बनाते हैं। जबकि काशी करवट मंदिर कचौड़ी गली में है। रत्नेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना राजमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर की दासी रत्नेश्वर ने करवाई थी। आधार कमजोर होने के कारण कालांतर में यह मंदिर एक ओर झुक गया, जो अपने आप में अनोखा है। खास बात यह है कि मंदिर के झुकने का क्रम अब भी कायम है। मंदिर का छज्जा जमीन से आठ फुट ऊंचाई पर था, लेकिन वर्तमान में यह ऊंचाई सात फुट हो गई है। मंदिर के गर्भगृह में कभी भी स्थिर होकर खड़ा नहीं रहा जा सकता है। गर्भगृह में एक या दो नहीं बल्कि, कई शिवलिंग स्थापित हैं। इसे शिव की लघु कचहरी कहा जा सकता है।
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