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मऊ: सिलिंडर ब्लास्ट ने पूरे जिले को रुला दिया, इससे पहले 2014 में महासो हादसे ने झकझोर दिया था
Tue, 15 Oct 2019 02:17 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मऊ
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Tue, 15 Oct 2019 02:17 PM IST
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सिलिंडर फटने से ध्वस्त हुआ मकान।
- फोटो : अमर उजाला
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19 नवंबर 1988 में जिले का गठन होने के बाद मऊ जिले में सोमवार को वलीदपुर में हुए हादसा काला इतिहास के रूप में दर्ज हो गया। क्योंकि जिला गठन होने के बाद से अब तक मऊ में 13 मौतों की सबसे बड़ी घटना है।
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इससे पहले दिसंबर 2014 में महासो के पास हुए रेल हादसे से लोग कांपे थे, तो उससे पहले हलधरपुर के डीहतिलक ठाकूर के पास हुई सड़क घटना में पांच की मौत ने लोगों को झकझोरा था। लेकिन इन सभी घटनाओं पर सोमवार को हुए हादसे ने सबसे बड़ी काले इतिहास की इबारत लिख दी।
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बताते चले कि वर्ष 2009 में हलधरपुर थाना क्षेत्र के डीहतिलक ठाकूर गांव के पास सड़क दुर्घटना हुई थी। सड़क पर खड़े ट्रक में यात्रियों से भरी जीप की भिड़त हो गई थी। जिसमें जीप में सवार दस लोगों की मौतें हुई थी। जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए।
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हादसे में डीहतिलक ठाकूर की सड़क घटना के बाद लोगों के रक्त से जिस तरह से सड़क रक्तरंजित हुई थी, उससे लोग काफी डर गए थे। इस हादसे को किसी तरह से लोगों ने अपने जेहन से निकाला था। चार दिसंबर 2014 रानीपुर थाना क्षेत्र के महासो मोड़ स्थित मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर स्कूली बच्चों से भी भरी वैन ट्रेन से टकराई गई थी।
इस हादसे में नौ मासूमों की जाने गई, जबकि तीन बच्चें घायल हो गए। वहीं सोमवार की सुबह मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली क्षेत्र के वलीदपुर के बीचलापुरा में सिलिंडर फटने के चलते 13 लोगों की मौत की घटना जिले की सबसे भयावह घटना के रूप में दर्ज हो गई।