उस्ताद बिस्मिल्लाह खां: काशी से कोलकाता और पटना में गूंजेगी शहनाई, मकबरे पर आएंगे उनके मुरीद; अकीदत पेश करेंगे
काशी से कोलकाता और पटना तक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की याद में शहनाई की गूंज सुनाई देगी। उनकी पुण्यतिथि पर मुरीद उनके मकबरे पर पहुंचकर अकीदत पेश करेंगे। काशी स्थित उनके पैतृक आवास पर भी शहनाई वादन होगा। आयोजन के माध्यम से शहनाई के इस महान कलाकार को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनकी संगीत विरासत को याद किया जाएगा।
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शहनाई के बादशाह भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बरसी पर शुक्रवार को काशी से कोलकाता और पटना तक शहनाई गूंजेगी। उनकी यादों से जुड़ी स्मृतियों को फिल्म के जरिये दिखाया जाएगा। संगीतमय कार्यक्रम में उनसे जुड़ी रोचक बातें सुनाई जाएंगी। उनके पैतृक आवास पर शहनाई गूंजेगी। उनके मकबरे पर अकीदत पेश करने के लिए उनके मुरीद पहुंचेंगे।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 20वीं पुण्यतिथि शुक्रवार को मनाई जाएगी। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी और उस्ताद के पोते आफाक हैदर और संयोजक शकील अहमद जादूगर ने बताया कि दरगाहे फातमान स्थित उनके मकबरे पर सुबह 11 बजे से आयोजन होगा। नेता, जनप्रतिनिधि और कलाकार सहित उनके मुरीद अकीदत पेश करने पहुंचेंगे। मकबरे पर कुरानख्वानी, दुआख्वानी और फातिहा पढ़ी जाएगी। वहीं, हड़हा सराय स्थित उनके आवास पर भी उनकी बरसी पर पहली बार ‘विरासत-ए-बिस्मिल्लाह’ के नाम से शहनाई श्रद्धांजलि होगी।
उस्ताद के पौत्र गाजी अब्बास खां ने बताया कि चार कलाकार शहनाई बजाएंगे। उस्ताद के पोते नासिर अब्बास की मौजूदगी में जाकिर हुसैन और असद अब्बास साथी कलाकारों के साथ शहनाई बजाएंगे। इसके अलावा शहर की संस्थाएं भी उन्हें गीत-संगीत के माध्यम से श्रद्धांजलि देंगी। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की दत्तक पुत्री पद्मश्री सोमा घोष कोलकाता में ‘यादें बिस्मिल्लाह’ के नाम से आयोजन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस बार संगीत के साथ ही उनके जीवन पर फिल्म दिखाई जाएगी। इसके बाद संगीतमय कार्यक्रम में गायन के जरिए उनकी खास बातों का जिक्र किया जाएगा।
पटना में उस्ताद पर नाटक की प्रस्तुति
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 24 अगस्त को पटना में संगीतमय श्रद्धांजलि दी जाएगी। उनके जीवन पर आधारित नाटक की प्रस्तुति होगी। इस नाटक में सोमा घोष की भी भूमिका रहेगी। उस्ताद के जन्म से लेकर शहनाई को बुलंदियों तक पहुंचाने की कहानी को कलाकार नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए पेश करेंगे।
उस्ताद को कजरी की बंदिश थी पसंद
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को कजरी गीत काफी पसंद थे। सोमा घोष ने बताया कि वह चाहे गर्मी हो या सावन मास, शहनाई पर कजरी की धुन जरूर बजाते थे। उन्हें मिर्जापुर की कजरी ज्यादा पसंद थी। उनकी देशभक्ति उनकी शहनाई में भी दिखाई देती थी। वह अक्सर देशभक्ति की धुन भी बजाते रहते थे।
उनके गुस्से के आगे बेटे और आयोजक भी डर जाते
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को सादगी पसंद थी। वह हमेशा तड़क-भड़क से दूर रहते थे। सोमा घोष ने बताया कि एक बार उस्ताद मुंबई से औरंगाबाद जा रहे थे। मार्ग में ही उन्होंने महिला आयोजक को समझाया कि उनके साथ कैसे बात करनी है। लेकिन उन्होंने मुझे ही फटकार दिया। कार्यक्रम से पहले आयोजक से कुछ ऐसा हुआ कि वह गुस्से में कार्यक्रम करने से ही इन्कार कर दिए। उनके बेटे नैय्यर हुसैन भी किनारा कर लिए। आयोजक के हाथ-पांव फूलने लगे। किसी तरह मैंने समझाकर कार्यक्रम संपन्न कराया।