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अमेरिकी टैरिफ : पूर्वांचल के निर्यात पर 1500 करोड़ की चोट, बनारसी साड़ी और कालीन का 500 करोड़ का माल फंसा

Tue, 03 Mar 2026 02:49 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Tue, 03 Mar 2026 02:49 PM IST
सार

Varanasi News: अमेरिका से कारोबार पहले ही ठप हो गया था, अब रही सही कसर इन देशों ने पूरी कर दी है। अमेरिका ने बीते दिनों भारत के लिए टैरिफ घटाने की घोषणा की है, लेकिन व्यापारिक नियमों में अभी भी पारदर्शिता की कमी है। 

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US tariffs Purvanchal exports hit 1,500 crore rupees with Banarasi sarees and carpets worth 500 crore stuck
अमेरिकी टैरिफ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट के कारण पूर्वांचल के निर्यातकों की रातों की नींद उड़ गई है। वैश्विक अस्थिरता के कारण वाराणसी और आसपास के जिलों से होने वाला करोड़ों का कारोबार अधर में लटक गया है। निर्यातकों के अनुसार, युद्ध की स्थिति और परिवहन मार्गों में व्यवधान के चलते लगभग 500 करोड़ रुपये के मूल्य का माल पोर्ट और गोदामों में फंसा हुआ है। 

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पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष रघु मेहरा ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो पूर्वांचल के व्यापार को 1500 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा नुकसान हो सकता है। वहां से निर्यात पूरी तरह से बंद हो गए हैं। इससे ऑर्डर मिलना तो दूर, जो पुराने ऑर्डर हैं, उनकी भी डिलीवरी रुक गई है। 
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पूर्वांचल निर्यातक संघ के पूर्व अध्यक्ष अमिताभ सिंह बताते हैं कि बीते फरवरी माह में अमेरिका ने भारत के साथ ट्रेड डील के तहत टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने की बात कही है, लेकिन निर्यातकों का कहना है कि इसके दिशा-निर्देश अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। युद्धग्रस्त क्षेत्रों के खरीदार भुगतान करने में असमर्थता जता रहे हैं, जिससे स्थानीय सूक्ष्म और लघु उद्योगों के पास वर्किंग कैपिटल की कमी हो गई है।

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लागत में 20-30% बढ़ोतरी की आशंका
भदोही के कालीन कारोबारी दीनानाथ बरनवाल के अनुसार, खाड़ी देशों में कालीन, स्कार्फ और हस्तशिल्प की भारी मांग रहती है, लेकिन शिपिंग रूट (खासकर लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य) में बढ़ते खतरे से लागत में 20-30% तक की वृद्धि होने की आशंका है। हालांकि अभी निर्यात किन रास्तों से होगा, इस पर अभी संशय है।  

एक सप्ताह बाद ही कोई निर्णायक स्थिति बन सकती है। लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव राजेश सिंह का कहना है कि मध्य एशिया में युद्ध के कारण कृषि यंत्रों की बड़ी खेप पोर्ट पर फंसी हुई है। इसके अलावा लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे से निर्यात होने वाली ताजी सब्जियां, मिर्च और आम के निर्यात पर भी संकट के बादल हैं। बनारस के प्रसिद्ध ग्लास बीड्स और लकड़ी के खिलौनों के विदेशी ऑर्डर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

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