वाराणसी की यह वेधशाला करती थी मौसम और समय का आकलन, यूपी पर्यटन ने जारी किया पोस्टर
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उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने वाराणसी की वेधशाला का पोस्टर जारी किया गया है। इसे 1737 ई. में महाराज जय सिंह द्वितीय ने बनावाया था, इससे समय, मौसम, के बारे में जाना जाता था।
यूपी पर्यटन ने ट्वीट कर लिखा कि 1737 ई. में महाराज जय सिंह द्वितीय द्वारा बनवायी गई यह वेधशाला वाराणसी में गंगा घाट पर स्थित है। इसकी सहायता से समय का आकलन, मौसम का पूर्वानुमान इत्यादि लगाया जाता था। पर्यटन विभाग का कहना है कि एक बार यहां आएंगे तो इसके बारे में जानने की उत्सुकता और बढ़ेगी।
बनारस में गंगा घाट के पास हुआ निर्माण
जयपुर के संस्थापक सवाई राजा जय सिंह ने सन् 1737 के करीब मान महल वेधशाला का निर्माण कराया। वेधशाला दशाश्वमेध घाट के निकट गंगा के पश्चिमी तट पर आलीशान महल के दूसरे तल पर है, जो आमेर (राजस्थान) के राजा और राजा जय सिंह के पुरखे महाराजा मान सिंह ने सन् 1600 में बनवाया था।
राजस्थानी वास्तु शिल्प की नायाब कारीगरी की मिसाल बलुआ पत्थरों से निर्मित मान महल अपने आप में बेजोड़ है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (सारनाथ मंडल) द्वारा संरक्षित यह धरोहर काशी के मान बिंदुओं में से एक है।
दस्तावेज में कहानी
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अनुसार, खगोल विद्या के राष्ट्रव्यापी प्रसार को ध्यान में रखते हुए राजा जय सिंह ने 1724 में दिल्ली, 1719 में उज्जैन, 1737 में मथुरा और सन् 1728 में जयपुर में भी ऐसी वेधशालाओं का निर्माण कराया था। अलग-अलग खगोलीय यंत्रों से पहला परिचय वास्तव में है ही इतना रोमांचकारी। शायद ऐसी ही अनुभूतियों के कारण कई जगहों पर इन वेधशालाओं की पहचान जंतर-मंतर के रूप में ही है।
छत पर पहला कदम रखते ही वेधशाला के दक्षिणी कोण पर हमारा परिचय होता अर्ध परवलय की आकृति से अंकित दक्षिणोत्तर भित्ति यंत्र से जिससे ग्रह-नक्षत्रों के अंतर और नतांश नापे जाते हैं।