यूपी: रोडवेज को नहीं मिल रहे यात्री, वाराणसी परिक्षेत्र को रोजाना औसतन 40 लाख का हो रहा है घाटा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी में कोरोना कर्फ्यू के चलते रोडवेज की कमाई डाउन हो गई है। सिर्फ ट्रेनों से आने वाले यात्रियों से ही बसें दौड़ रही है। हालांकि इसके अलावा रोडवेज बसें बगैर यात्रियों के खाली यानि कि पांच से दस यात्रियों को लेकर ही दौड़ रही है।
रोडवेज अधिकारियों के अनुसार रोजाना औसतन लगभग 40 लाख रुपये की वाराणसी परिक्षेत्र को घाटा हो रहा है। सिर्फ 18 से 20 लाख की ही कमाई हो रही है। कोरोना कर्फ्यू से पहले 58 से 60 लाख प्रतिदिन कमाई हो रही थी। हर दिन गिरते आमदनी को लेकर रोडवेज अधिकारियों में भी बैचेनी है।
कैंट, काशी, ग्रामीण डिपो की बसें तो एकदम आय की लक्ष्य से भटक गई हैं। चालक व परिचालक भी अब लोड फैक्टर पर बहुत ध्यान नहीं दे रहे हैं। चालक व परिचालकों के अनुसार यात्री बस में सफर करने के लिए अब तैयार ही नहीं है। सिर्फ ट्रेनों से आने वाले यात्री ही बसों में सफर कर रहे हैं। कोविड वैक्सीन का आदेश आने के बाद भी चालक व परिचालकों को वैक्सीन अब तक नहीं लग सकी है। इसे लेकर अधिकतर कर्मियों में नाराजगी है।
उत्तर प्रदेश अनुबंधित बस ओनर्स एसोसिएशन वाराणसी क्षेत्र के अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में जो भी अनुबंधित बसें वाराणसी परिक्षेत्र से वाराणसी-प्रयागराज, वाराणसी-आजमगढ़, वाराणसी-फैजाबाद, वाराणसी-शाहगंज मार्ग पर संचालित कराई जा रही हैं सभी बसों का लक्षित आय पूरा नहीं हो पा रहा है, जिससे वाहन स्वामियों को भारी आर्थिक क्षति का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
क्योंकि परिवहन निगम अपनी प्रशासनिक शुल्क यात्री कर और अन्य शुल्क काट लेगा शेष बची धनराशि में इनकम ना पूरा होने की दशा में वाहन स्वामियों को कटौती कर भुगतान किया जाएगा, जिससे कि वाहन स्वामी किस्त नहीं दे पाएंगे और न ही स्टाफ की सैलरी दे पाएंगे। बस मरम्मत का खर्च निकाल पाना मुश्किल हो गया है। एमडी से मांग है कि कोविड-19 की लहर चलने तक यात्री कर, प्रशासनिक शुल्क वर्तमान समय में अस्थगित रखा जाए, जिससे वाहन स्वामी अपनी बसों को जनहित में चलवा सकें। जिससे पब्लिक को भी सुविधा होगी और परिवहन निगम की आय भी बढ़ेगी।