बिजली की पूर्ति करना अब और बड़ी होगी चुनौती, ये है वजह
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बनारस की बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने की चुनौती अब नए अभियंताओं की होगी। फिलहाल पुराने अभियंताओं के जाने के बाद बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने की जिम्मेदारी बढ़ेगी। कारण, नए अधिकारियों को सिस्टम समझने में समय लगेगा।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने 15 साल से जमे अभियंताओं को इधर से उधर भेज दिया है। कॉरपोरेशन ने इंजीनियरों का स्थानांतरण ऐसे समय में किया है, जब बनारस को सबसे अधिक बिजली की जरूरत है।
बारिश का मौसम शुरू होने के साथ ही ट्रांसफॉर्मर के जलने फॉल्ट, कटौती, शटडाउन आदि की समस्याएं खड़ी हो गई हैं। ऐसे समय में इन अभियंताओं के जाने से थोड़ी दिक्कत होगी। बाहर से आने वाले अभियंताओं के लिए चुनौती भी होगी पश्चिमाञ्चल और दक्षिणांचल से आने वाले अभियंताओं को पूर्वांचल की बिजली व्यवस्था समझने में तीन महीने का समय लग जाएगा।
इस दौरान पूरी बिजली व्यवस्था कर्मचारियों के कंधे पर रहेगी। जब तक यह अधिकारी समझेंगे, तब तक यहां की बिजली व्यवस्था को सुधारने की चुनौती होगी।
अधीक्षण अभियंताओं के हुए तबादलें :
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अधीक्षण अभियंताओं को मध्यांचल और पश्चिमांचल सहित अन्य जगहों पर भेजा गया है। इसमें कार्यशाला मंडल के विकास कपूर, गंगाधार सिंह, कमलाक्ष नारायण, अखिलेश किशोर लाल, राजीव रंजन सिंह, राम दुलार सिंह, उमेश कुामर सिंह, पार्थिव कुमार सिंह, आशीष अस्थाना, संजीव श्रीवास्तव, मुकेश कुमार, राजीव कुमार और विनोद कुमार मिश्र को वाराणसी से तबादला कर दिया गया है।