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वाराणसी में पीआरवी के पुलिसकर्मी करा रहे जमीन पर कब्जा, आला अधिकारी नहीं लगा पा रहे अंकुश!

Thu, 18 Oct 2018 09:21 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 18 Oct 2018 09:21 AM IST
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up police PRV helping in encroachment of land at varanasi
पीआरवी
यूपी 100 के पुलिस रिस्पांस व्हीकल (पीआरवी) पर तैनात पुलिसकर्मी जमीन पर अवैध कब्जा करा रहे हैं। मगर, आला अधिकारी उन पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। वाराणसी के देहात क्षेत्रों में पीआरवी के पुलिसकर्मी राजस्व विभाग के अधिकारियों के आदेशों को भी दरकिनार कर देते हैं।
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इस वजह से पीडि़त सौ नंबर पर सूचनाएं देने से कतराने लगे हैं। जंसा थाना क्षेत्र बड़ौरा और बरनी ग्राम पंचायत में दो ऐसे मामले सामने आए हैं जो पीआरवी के पुलिसकर्मियों की कारगुजारी बताने के लिए पर्याप्त हैं।
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इस बारे में एसडीएम अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि राजस्व विभाग के मामले में 100 डायल की पुलिस को हस्तक्षेप अधिकार नहीं है। अगर ऐसा मामला है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सीओ अनिल कुमार ने बताया 100 डायल  की मानीटरिंग लखनऊ से होती है। अगर शिकायत मिली तो इनके खिलाफ पत्र लिखा जाएगा। 
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पुलिस आई लेकिन अवैध निर्माण नहीं रुका

जंसा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरनी में विंध्यवासिनी गुप्ता की आराजी नंबर 429 रकबा 61 हेक्टेयर व 796 क रकबा 32 एयर की निजी भूमि है। इस भूमि की उन्होंने एसडीएम के निर्देश पर पैमाइश भी करवाई। इस मामले में राजस्व अधिकारियों ने हकबंदी के लिए एसडीएम कोर्ट में रिपोर्ट भी भेजी दी है।

मगर, बगैर हकबंदी की कार्रवाई पूरी हुए ही मनबढ़ उस भूमि पर निर्माण कर कब्जा कर रहे हैं। विंध्यवासिनी गुप्ता ने सौ नंबर पर दो बार सूचना दी। पुलिस मौके पर भी गई लेकिन अवैध निर्माण कार्य नहीं रुका। पीडि़त विंध्यवासिनी गुप्ता का कहना है कि पीआरवी की पुलिस मनबढ़ों की ही सुनती है। 

सुविधा शुल्क लेकर सुलह करा दिए

जंसा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़ौरा के राजस्व ग्राम पंपापुर निवासी सैफुद्दीन ने अपनी पत्नी खुशबू के नाम से आराजी नंबर 174 रकबा 94 हेक्टेयर भूमि का बैनामा तीन वर्ष पूर्व लिया था। काश्तकार अपने जमीन पर काबिज भी है। इस बीच कुछ मनबढ़ों ने भूमि पर कब्जा करके मकान का बारजा बनवा लिया। कानूनगो द्वारा निर्माण अवैध पाया गया।

सैफुद्दीन व उनके पुत्र वाहिद अली का आरोप है कि कब्जा रोकने के लिए तीन बार सौ नंबर पर सूचना दी गई। पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले गई और सुविधा शुल्क लेकर सुलह करा दी लेकिन कब्जे का सिलसिला नहीं रुका।
 
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