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यूपी चुनाव: वाराणसी में भाजपा के पक्ष में बढ़ा मतदाताओं का रुझान, कांग्रेस व बसपा की पकड़ हुई कमजोर 

Fri, 11 Mar 2022 11:37 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 11 Mar 2022 11:37 PM IST
सार

बसपा के मत फीसदी में भी कमी आई है और पिंडरा में ही उसका मत फीसदी सर्वाधिक 22.08 पहुंचा। हालांकि वर्ष 2017 में यह मत फीसदी करीब 25 फीसदी था।

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UP Chunav 2022 Voters trend increased in favor of BJP in Varanasi Congress and BSP's hold weakened
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

वाराणसी की आठों विधानसभाओं में भाजपा ने बढ़ी जीत के साथ ही अपने मत फीसदी में भी इजाफा किया है। पांच साल पहले 2017 में मिले मतों के मुकाबले भाजपा को वाराणसी में करीब 10 फीसदी तक ज्यादा मत मिले हैं। सबसे ज्यादा 60.62 फीसदी मत कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव को मिले हैं, जो पिछले चुनाव के मुकाबले करीब दो फीसदी ज्यादा है।

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पिंडरा सीट पर भाजपा प्रत्याशी को 38.20 फीसदी मत मिले हैं, जो पिछले चुनाव से करीब छह फीसदी कम है। बाकी सभी छह सीटों पर भी दो से पांच मत फीसदी में बढ़ोतरी हुई है। उधर, सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस और बसपा को हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाले वाराणसी जिले की आठों सीट पर भाजपा और सपा के बीच हुई कड़ी टक्कर में मत फीसदी में भी बढ़ोतरी हुई है।
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जबकि पिंडरा सीट को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस का मत फीसदी दहाई में भी नहीं पहुंच पाया है। पिंडरा में कांग्रेस के अजय राय को 21.85 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिला है। बसपा के मत फीसदी में भी कमी आई है और पिंडरा में ही उसका मत फीसदी सर्वाधिक 22.08 पहुंचा। हालांकि वर्ष 2017 में यह मत फीसदी करीब 25 फीसदी था।

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इसके अलावा बसपा को हर सीट पर चार से 10 फीसदी तक मत कम मिले हैं। भाजपा प्रत्याशियों को मिले मत फीसदी के आंकड़ों पर नजर डाले तो पिंडरा में डा. अवधेश सिंह को 38.20, शिवपुर में अनिल राजभर को 45.73, कैंट में सौरभ श्रीवास्तव को 60.62, रोहनिया में अपना दल एस के सुनील पटेल को 48.07, सेवापुरी में नील रतन पटेल को 47.59, दक्षिणी में डॉ. नीलकंठ तिवारी को 50.86, अजगरा में त्रिभुवन राम को 41.22 और उत्तरी में रविंद्र जायसवाल को 54.61 फीसदी मत मिले।

कमजोर प्रबंधन और प्रत्याशी चयन में चूक का खामियाजा
दरअसल, वाराणसी में भाजपा के मजबूत संगठन और चुनावी प्रबंधन के मुकाबले सपा, बसपा और कांग्रेस कोई खास रणनीति नहीं बना पाए। इसके अलावा कांग्रेस में प्रत्याशी चयन के बाद ही विवाद और नाराज कार्यकर्ताओं को जोड़ पाने में नाकामी के चलते उसके छह प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाए।

ऐसे ही सपा में शहर दक्षिणी जैसी सीट छोड़ दें तो कोई खास कार्ययोजना बनाने में नाकाम रही है। बसपा के प्रत्याशी केवल सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे ही मैदान में थे। उनके पास ना तो बेहतर प्लानिंग थी और ना ही संगठन का सहयोग।

जश्न में डूबा सत्ता पक्ष, हार के कारण तलाश रहा विपक्ष

विधानसभा चुनाव के बाद जहां एक ओर भाजपा में खुशी का माहौल है। वहीं, विपक्षी दल हार के कारणों की तलाश मेें जुट गए हैं। मतदान बाद राजनीतिक दल मिले मतों की गहन जांच पड़ताल के साथ संगठन की मजबूती में जुट गए हैं। विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटी भाजपा जश्न में डूबी है।

वहीं, विपक्ष हार के कारणों की तलाश में जुट गया है। 1985 के बाद जनता ने किसी दल को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का मौका दिया है। ऐसे में कहा जा सकता है कि जनता ने भाजपा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, विपक्ष भी सत्ता की  गलतियों के खिलाफ जनता को साधने की तैयारी में है।

भाजपा जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि वाराणसी की जनता ने विधानसभा चुनाव में मत देकर साफ कर दिया है कि वह बहकावे में नहीं आने वाली। यह काशी में विकास, विश्वास और पीएम मोदी के विचार की जीत है।

सपा जिलाध्यक्ष सपा सुजीत यादव लक्कड़ ने कहा कि सपा के प्रति जनता का रुझान बढ़ा है। आजमगढ़ में पार्टी को भरपूर समर्थन मिला है। लोकतंत्र में जनमत सर्वोपरि है। नई ऊर्जा के साथ जनता के मुद्दों को लेकर संघर्ष करेंगे।

बसपा जिलाध्यक्ष राजेश भारती ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का मत सर्वोपरि है। पार्टी कैडर की बैठक में हार के कारणों पर विचार विमर्श किया जाएगा। आगामी चुनाव में बसपा बेहतर प्रदर्शन करेगी। हार के कारणों को तलाशने का काम करेंगे। 

कांग्रेस के वाराणसी महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि हम हार पर मंथन कर रहे हैं। जनादेश को हम स्वीकार कर रहे हैं। संगठन की मजबूती पर ध्यान देंगे। इस चुनाव में हार मिली है, लेकिन आगे भी जनता के मुद्दों पर संघर्ष करेंगे।

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