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यूनिटेक 252 एकड़ जमीन करेगा वापस, कोर्ट के फैसले से किसानों में खुशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:09 PM IST
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अब यूनिटेक की ओर से खरीदी गई भूमि किसानों को वापस किए जाने के आदेश के बाद बनारस के किसानों में खुशी है। शासन की ओर से जारी आदेश के बाद यूनिटेक ने करीब 252.888 एकड़ भूमि खरीद ली थी, जिसे जल्द ही वापस किया जाएगा। कोर्ट ने इस सस्ते दर पर ली गई भूमि को वापस किसानों को ही देने का आदेश जारी कर दिया है।
वाराणसी में हाईटेक टाउनशिप विकसित करने के लिए शासन ने 2005 में एक आदेश जारी किया, जिसमें यूनिटेक प्राइवेट लिमिटेड को कुल नौ गांव घाटमपुर, उदयराजपुर, ऊंचगांव, तुलाचक, पिलखिनी, कोरौता, बलिरामपुर, दाऊदपुर, मनिहारीपुर में दो हजार रुपए से लेकर 52 हजार रुपये तक प्रति विस्वा की दर से कुल 1577 एकड़ भूमि खरीदनी थी।
कंपनी की ओर से टाउनशिप विकसित करने के लिए किसानों से आपसी समझौते के तहत 252. 888 एकड़ भूमि खरीदी गई। शासन ने प्रथम चरण में लेआउट प्लान के लिए न्यूनतम 300 एकड़ का मानक तय किया गया था लेकिन कंपनी ने मात्र 200 एकड़ का ही प्लान प्रस्तुत किया।
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योजना की प्रगति न होने को लेकर तत्कालीन वीडीए उपाध्यक्ष ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को पत्र लिखते हुए इस योजना को बंद करने की संस्तुति की। वहीं किसानों की तरफ से कोर्ट के आदेश पर सात किसानों ने यूनिटेक कंपनी के खिलाफ रोहनिया थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
इसके बाद 30 नवंबर 2015 में हाईकोर्ट ने योजना को रद्द कर दिया था। इसको लेकर उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि आदेश नहीं आया आदेश के आते ही किसानों के जमीन वापस करने का कार्य किया जाएगा।
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वाराणसी में हाईटेक टाउनशिप विकसित करने के लिए शासन ने 2005 में एक आदेश जारी किया, जिसमें यूनिटेक प्राइवेट लिमिटेड को कुल नौ गांव घाटमपुर, उदयराजपुर, ऊंचगांव, तुलाचक, पिलखिनी, कोरौता, बलिरामपुर, दाऊदपुर, मनिहारीपुर में दो हजार रुपए से लेकर 52 हजार रुपये तक प्रति विस्वा की दर से कुल 1577 एकड़ भूमि खरीदनी थी।
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कंपनी की ओर से टाउनशिप विकसित करने के लिए किसानों से आपसी समझौते के तहत 252. 888 एकड़ भूमि खरीदी गई। शासन ने प्रथम चरण में लेआउट प्लान के लिए न्यूनतम 300 एकड़ का मानक तय किया गया था लेकिन कंपनी ने मात्र 200 एकड़ का ही प्लान प्रस्तुत किया।
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योजना की प्रगति न होने को लेकर तत्कालीन वीडीए उपाध्यक्ष ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को पत्र लिखते हुए इस योजना को बंद करने की संस्तुति की। वहीं किसानों की तरफ से कोर्ट के आदेश पर सात किसानों ने यूनिटेक कंपनी के खिलाफ रोहनिया थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
इसके बाद 30 नवंबर 2015 में हाईकोर्ट ने योजना को रद्द कर दिया था। इसको लेकर उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि आदेश नहीं आया आदेश के आते ही किसानों के जमीन वापस करने का कार्य किया जाएगा।