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Varanasi News: बीएचयू में जीनोम एडिटिंग तकनीक से दो स्टेम सेल विकसित

Thu, 09 Jul 2026 01:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 01:58 AM IST
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Two stem cells developed at BHU using genome editing technology
बीएचयू और टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी के शोधकर्ताओं ने पार्किंसन रोग सहित तंत्रिका तंत्र के रोगों के मॉडल तैयार किए हैं। इसमें अत्याधुनिक जीनोम एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर दो स्टेम सेल का विकास किया गया है। यह शोध दो पीएचडी शोधार्थियों सूरजित मालाकार और शैलेयी रॉय चौधरी ने किया। इनका दावा है कि इससे गंभीर तंत्रिका संबंधी रोगों का अध्ययन और संभावित इलाज हो सकेंगे। यह वैज्ञानिक उपलब्धि दोनों संस्थानों के बीच एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से मिली। इस संयुक्त अध्ययन का नेतृत्व बीएचयू से प्रोफेसर परिमल दास और प्रोफेसर दीपिका जोशी ने किया। टीआईजीएस से डॉक्टर वसंत थामोदरन भी इसमें शामिल थे। शोध दल ने पार्किंसन रोग और एएलएस के जैविक रहस्यों को समझने पर ध्यान केंद्रित किया। प्रो. दास ने बताया कि स्टेम सेल जीवविज्ञान और जीनोम संपादन का यह लक्षित संयोजन वैज्ञानिकों को कोशिकीय क्षरण के शुरुआती चरणों का अध्ययन करने में सक्षम बनाता है, जो किसी मानव रोगी में शारीरिक लक्षण प्रकट होने से बहुत पहले शुरू हो जाते हैं। प्रो. दास ने कहा कि कोशिकाओं में असीमित रूप से विभाजित होने और धड़कने वाली हृदय मांसपेशी कोशिकाओं से लेकर कई संवेदनशील न्यूरॉन्स तक विकसित होने की क्षमता होती है।
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