{"_id":"590784b34f1c1bcf3a44282c","slug":"tribute-for-saint-kabir-at-sur-ganga-music-festival","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सुर गंगा महोत्सव में संत कबीर को दी गई स्वरांजलि, सूफी गीतों और भजनों की मची गूंज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुर गंगा महोत्सव में संत कबीर को दी गई स्वरांजलि, सूफी गीतों और भजनों की मची गूंज
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 02 May 2017 12:25 AM IST
विज्ञापन
नागरी नाटक मंडली में सुर गंगा संगीत महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाय के...’ जैसे सूफी गीतों, भजनों से सोमवार की रात चहक उठी। काशी के मशहूर भजन गायकों ने सूर, तुलसी, कबीर के भजनों को सुरों से सजाया। उभरते कलाकारों ने भी सूफी गायन से वाहवाही बटोरी।
सुर गंगा संगीत महोत्सव की सोमवार की निशा संत कबीर को समर्पित थी। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय के भजनों से शुरुआत हुई। उन्होंने सबसे पहले कबीर को समर्पित भजन- साधो गगन घटा गहरानी... की प्रस्तुति की।
इनके बाद डॉ. अंजू भारती ने मंच संभाला। उन्होंने- उधो मन ना भावे... के बाद मैं धरूं तिहारो ध्यान... की प्रस्तुति से माहौल बनाया। फिर युवा गायक पीयूष मिश्रा और सौरभ मिश्रा ने भजन सुनाए।
विज्ञापन
नरेंद्र शुक्ला ने- भज मन राम चरन सुखदाई की प्रस्तुति की तो नीतिश कुमार पांडेय ने- हे शंभू बाबा मेरे भोले बाबा... पर सुर लगाए। नीरज पांडेय ने- बोले पिंजरे का तोता राम... और सरिता आर्या ने- राम नाम अति मीठा है... की प्रस्तुति की।
इनके बाद सौरभ त्रिपाठी ने- जय जय जग जननी देवी... की प्रस्तुति की तो ममता उपाध्याय ने- जेकर नाथ भोले नाथ... सुनाकर भाव विभोर किया। अभिषेक सिंह, आदित्य धनराज पांडेय, निखिल कुमार चक्रवाल, ज्योति यादव ने भी भाव विभोर किया।
ताहिर वारसी ने- शिरडी वाले साईं बाबा के अलावा कई भजनों से संत कबीर को स्वराजंलि अर्पित की। राहुल त्रिपाठी ने सूफी गीत- छाप तिलक सब छीनी रे.. की प्रस्तुति से माहौल बनाया।
विज्ञापन
सुर गंगा संगीत महोत्सव की सोमवार की निशा संत कबीर को समर्पित थी। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय के भजनों से शुरुआत हुई। उन्होंने सबसे पहले कबीर को समर्पित भजन- साधो गगन घटा गहरानी... की प्रस्तुति की।
विज्ञापन
इनके बाद डॉ. अंजू भारती ने मंच संभाला। उन्होंने- उधो मन ना भावे... के बाद मैं धरूं तिहारो ध्यान... की प्रस्तुति से माहौल बनाया। फिर युवा गायक पीयूष मिश्रा और सौरभ मिश्रा ने भजन सुनाए।
विज्ञापन
नरेंद्र शुक्ला ने- भज मन राम चरन सुखदाई की प्रस्तुति की तो नीतिश कुमार पांडेय ने- हे शंभू बाबा मेरे भोले बाबा... पर सुर लगाए। नीरज पांडेय ने- बोले पिंजरे का तोता राम... और सरिता आर्या ने- राम नाम अति मीठा है... की प्रस्तुति की।
इनके बाद सौरभ त्रिपाठी ने- जय जय जग जननी देवी... की प्रस्तुति की तो ममता उपाध्याय ने- जेकर नाथ भोले नाथ... सुनाकर भाव विभोर किया। अभिषेक सिंह, आदित्य धनराज पांडेय, निखिल कुमार चक्रवाल, ज्योति यादव ने भी भाव विभोर किया।
ताहिर वारसी ने- शिरडी वाले साईं बाबा के अलावा कई भजनों से संत कबीर को स्वराजंलि अर्पित की। राहुल त्रिपाठी ने सूफी गीत- छाप तिलक सब छीनी रे.. की प्रस्तुति से माहौल बनाया।
नृत्यमय गणेश वंदना ने मोहा मन
अनन्या त्रिपाठी ने नृत्यमय गणेश वंदना प्रस्तुत की
- फोटो : अमर उजाला
सैयद वेला हैदर ने सूफी गीत -भर दो झोली मेरी या मोहम्मद... पेश कर सभागार को सूफियाना स्वरूप प्रदान किया। इसके पूर्व अनन्या त्रिपाठी ने नृत्यमय गणेश वंदना प्रस्तुत की। सुर गंगा थीम सांग की प्रस्तुति सोमवार की रात ज्योति एवं सरिता ने की।
सुर गंगा में आज
पं. बलवंत राय भट्ट स्मृति संगीत संध्या में नागरी नाटक मंडली प्रेक्षागृह में डॉ मधुमिता भट्टाचार्य का गायन, पं. नीरज अमरनाथ मिश्र का सितार और डॉ. दिव्या शर्मा का नृत्य होगा।
सुर गंगा में आज
पं. बलवंत राय भट्ट स्मृति संगीत संध्या में नागरी नाटक मंडली प्रेक्षागृह में डॉ मधुमिता भट्टाचार्य का गायन, पं. नीरज अमरनाथ मिश्र का सितार और डॉ. दिव्या शर्मा का नृत्य होगा।