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आदिवासियों को एसटी में लाने की मांग, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल ने धर्म-संस्कृति बचाने की दी सलाह

Sun, 01 Mar 2020 11:36 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 01 Mar 2020 11:36 PM IST
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Tribal Life Jyoti Foundation organized First tribal Mahasammelan in nadesar ground varanasi
अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद कुमार सांय। - फोटो : अमर उजाला।

आदिवासी जीवन ज्योति फाउंडेशन की ओर से रविवार को नदेसर स्थित कटिंग मेमोरियल स्कूल के मैदान में प्रथम आदिवासी महासम्मेलन का आयोजन किया गया। यहां आदिवासी समूहों को देशभर में अनुसूचित जनजाति घोषित करने की मांग की गई। इसके अलावा संवैधानिक अधिकार के प्रति जागरूक करने, सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने, बदले परिवेश में जनजाति संस्कृति को संरक्षित करने पर चर्चा की गई। मंच से ही स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले आदिवासी और आदिवासी मनीषियों के इतिहास के बारे में प्रदेश के विभिन्न पाठ्यक्रमों में शामिल करने की भी मांग की गई।

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छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके को महासम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था, लेकिन किसी कारणवश नहीं पहुंचने पर उन्होंने मोबाइल से संबोधित करते हुए कहा कि देश के आदिवासी समूह अपने अस्तित्व, धर्म, संस्कृति और संस्कार को बनाए और बचाए रखें। इसके लिए समाज के जागरूक लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों की जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी है।
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उन्होंने कहा कि जानकारी और जागरूकता के अभाव में समाज के उत्थान में समस्या आती है। मगर, सरकार लगातार इस समाज के उत्थान के लिए हर स्तर पर अभियान चला रही है।

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अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद कुमार सांय ने कहा कि यूपी में गोंड की उपजाति रहती है। इन समूहों को संगठित होकर एक मंच पर आना चाहिए। केंद्रीय मंत्री रेनुका सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज की मांगों को पूरा करने में सरकार प्रतिबद्ध है।

राज्यपाल को सौंपा गया ज्ञापन
आदिवासी जीवन ज्योति फाउंडेशन की ओर से छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके को ज्ञापन दिया गया। इसमें यूपी में अनुसूचित जनजातियों पर लगे क्षेत्रीय प्रतिबंध खत्म करने, केंद्र की भांति अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन, जनजातियों के उत्थान के लिए बजट को बढ़ाने, पाठ्यक्रम में आदिवासी धर्म, संस्कृति और इतिहास को शामिल करने की मांग शामिल है।

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