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दुर्गम इलाके में 30 किमी खराब सड़कों पर करते हैं सफर
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हलिया। स्थानीय ब्लाक मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर 40 हजार से अधिक आबादी वाले आधा दर्जन नक्सल गांव के ग्रामीणों को वन विभाग के दुर्गम व जर्जर रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। मतवार, सगरा, कुशियारा तक पहुंचने के लिए मात्र एक रास्ता है। वह भी वन विभाग की रोक के चलते सड़क गड्ढे में तब्दील हो गया है। हालांकि वन विभाग ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि लोनिवि ने सड़क निर्माण के लिए अनुमति ही नहीं मांगी है।
इसी तरह दिघिया से हर्रा सात किलोमीटर वन क्षेत्र से गुजरा मार्ग हर्रा गांव तक पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील हो गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हलिया तक पहुंचने के लिए लोगों को 30 किलोमीटर का दुर्गम सफर तय करना पड़ता है। पिछले वर्ष प्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री को भी ग्रामीणों ने पत्रक देकर सड़क बनवाने की मांग की थी। उन्होंने भी जल्द सड़क बनवाने का आश्वासन दिया था। आश्वासन के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन पाई। सड़क न होने के कारण मतवार, कुशियारा, सगरा, नदना, बेलाही व मतवरिया आदि गांव के बच्चे उच्च कक्षाओं की पढ़ाई ठीक ढंग से नहीं कर पा रहे हैं।
क्षेत्रीय ग्रामीणों राहुल प्रताप सिंह, गौरव कुमार सिंह, प्रधान बेलाही शर्मिला देवी, कमलेश कुमार, सुखी चंद सिंह, अजय कुमार, अंबुज कुमार, मनोज कुमार शर्मा, आयंत्री प्रसाद आदि का कहना है कि सड़क न होने के कारण बरसात के दिनों में ग्रामीणों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
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वर्जन
....................
सड़क निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने आज तक सड़क के निर्माण के लिए अनुमति मांगी ही नहीं। पीडब्ल्यूडी पहले भारत सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजे। आदेश मिलने पर वन विभाग की ओर से सड़क निर्माण के लिए अनुमति प्रदान कर दी जाएगी।
-आशुतोष जायसवाल, प्रभागीय वनाधिकारी, कैमूर वन्य जीव प्रभाग
वन विभाग के साथ मिलकर ज्वाइंट सर्वे हो गया है। जहां सड़क बननी है उसका चिह्नांकन कर अनुमति ली जाएगी। अनुमति मिलने के बाद सड़क का निर्माण किया जाएगा।
-मिथिलेश कुमार, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी
सड़क निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने आज तक सड़क के निर्माण के लिए परमीशन मांगा ही नहीं। पीडब्ल्यूडी पहले भारत सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजे। आदेश मिलने पर वन विभाग की ओर से सड़क निर्माण के लिए अनुमति प्रदान कर दी जाएगी।
-आशुतोष जायसवाल, प्रभागीय वनाधिकारी, कैमूर वन्य जीव प्रभाग।
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इसी तरह दिघिया से हर्रा सात किलोमीटर वन क्षेत्र से गुजरा मार्ग हर्रा गांव तक पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील हो गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हलिया तक पहुंचने के लिए लोगों को 30 किलोमीटर का दुर्गम सफर तय करना पड़ता है। पिछले वर्ष प्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री को भी ग्रामीणों ने पत्रक देकर सड़क बनवाने की मांग की थी। उन्होंने भी जल्द सड़क बनवाने का आश्वासन दिया था। आश्वासन के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन पाई। सड़क न होने के कारण मतवार, कुशियारा, सगरा, नदना, बेलाही व मतवरिया आदि गांव के बच्चे उच्च कक्षाओं की पढ़ाई ठीक ढंग से नहीं कर पा रहे हैं।
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क्षेत्रीय ग्रामीणों राहुल प्रताप सिंह, गौरव कुमार सिंह, प्रधान बेलाही शर्मिला देवी, कमलेश कुमार, सुखी चंद सिंह, अजय कुमार, अंबुज कुमार, मनोज कुमार शर्मा, आयंत्री प्रसाद आदि का कहना है कि सड़क न होने के कारण बरसात के दिनों में ग्रामीणों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
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सड़क निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने आज तक सड़क के निर्माण के लिए अनुमति मांगी ही नहीं। पीडब्ल्यूडी पहले भारत सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजे। आदेश मिलने पर वन विभाग की ओर से सड़क निर्माण के लिए अनुमति प्रदान कर दी जाएगी।
-आशुतोष जायसवाल, प्रभागीय वनाधिकारी, कैमूर वन्य जीव प्रभाग
वन विभाग के साथ मिलकर ज्वाइंट सर्वे हो गया है। जहां सड़क बननी है उसका चिह्नांकन कर अनुमति ली जाएगी। अनुमति मिलने के बाद सड़क का निर्माण किया जाएगा।
-मिथिलेश कुमार, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी
सड़क निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने आज तक सड़क के निर्माण के लिए परमीशन मांगा ही नहीं। पीडब्ल्यूडी पहले भारत सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजे। आदेश मिलने पर वन विभाग की ओर से सड़क निर्माण के लिए अनुमति प्रदान कर दी जाएगी।
-आशुतोष जायसवाल, प्रभागीय वनाधिकारी, कैमूर वन्य जीव प्रभाग।