UP : क्यों परेशान हैं ट्रांसपोर्टर्स, वाराणसी में 80% काम प्रभावित, 30 दिन में 60 करोड़ का नुकसान; जानें कारण
महाकुंभ में आने वाली भीड़ के कारण हाइवे जाम हैं। इस कारण सड़क पर वाहनों की कतार लगी हुई है। ऐसे में ट्रांसपोर्टरों के माल भी इसी जाम में फंसे हुए हैं। उनका काम प्रभावित हा रहा है।
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महाकुंभ पलट प्रवाह के बीच हाइवे पर लंबा जाम और डायवर्जन के चलते वाराणसी में ट्रांसपोर्ट कारोबार प्रभावित है। दिल्ली से तीन दिन में आने वाली माल गाड़ियां 10-12 दिन में वाराणसी पहुंच रही हैं। साथ ही खाद्य और दवा की गाड़ियां भी किसी तरह शहर पहुंच पा रही हैं।
ई-वे बिल फेल होने से जीएसटी अधिकारियों की ओर से गाड़ियों पर कार्रवाई भी की जा रही है। इससे ट्रांसपोर्टर और गाड़ी मालिकों के साथ श्रमिक वर्ग भी परेशान हैं।
पहले रोजाना 200 से 250 गाड़ियों की आवाजाही होती थी, जिनकी संख्या अब 40-50 तक रह गई है। किराना, कपड़े, क्रॉकरी और टेंट सामान, टाइल्स, लोहे, रेशम, फर्नीचर समेत अन्य गाड़ियों को पहुंचने में भी 10 से 12 दिन का समय लग रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को 30 दिन में लगभग 60 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। वाराणसी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जेपी तिवारी ने बताया कि ट्रांसपोर्ट के लिए बुरे दिन हैं।
रोजाना दो करोड़ के कारोबार वाले वाराणसी में केवल 20 लाख का काम हो रहा है। गाड़ियां 10 से 12 दिनों में पहुंच रही हैं। दिल्ली, पंजाब, मुंबई, सूरत समेत अन्य जगहों से आने वाली गाड़ियों की चाल भी थम गई है। ई-वे बिल फेल हो रहा है। सिर्फ तीन दिन के लिए ई-वेल बिल मिलता है।
प्रयागराज और वाराणसी के लिए माल बुक करने के लिए कोई तैयार नहीं है। एक हफ्ते में मुश्किल से चार से पांच गाड़ी किसी तरह नो एंट्री खुलने पर पहुंच रही हैं। वैवाहिक सीजन के दौरान बाजार में माल की आवक ठप है। व्यापारियों की ओर से पुराना स्टॉक खपाया जा रहा है।
10 से 12 दिन फंसी रहीं गाड़ियां
यूपी मोटर्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के वाराणसी मंडल प्रभारी सूर्यमणि तिवारी ने बताया कि 10 से 12 दिन गाड़ियों के फंसे रहने से ट्रांसपोर्टर और मालिकों को दिक्कत हो रही है। चालक और परिचालक का अलग खर्चा और गाड़ियों में माल लोड होने से चिंता बढ़ गई है। फतेहपुर, कानपुर, लखनऊ समेत अन्य शहरों में ही गाड़ियां खड़ी कराई जा रही हैं।
प्रयागराज होकर आने वाली गाड़ियों को डायवर्ट करके निकाला जा रहा है। इससे अतिरिक्त ईंधन और टोल का खर्च बढ़ रहा है। माल नहीं आने से आठ से 10 दिन तक ट्रांसपोर्ट बंद कराने से मजदूर भी परेशान हैं। इससे उनकी जीविका पर भी संकट आ चुका है। वाराणसी में 200 ट्रांसपोर्टर हैं, जिनसे दो से ढाई हजार लोग जुड़े हैं।