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एक के गिरने से पहले दूसरा थाम लेता था तिरंगा
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 15 Aug 2016 02:04 AM IST
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इतिहास में हमेशा ऐसे लोगों का सम्मान से लिखा जाता है, जो देश के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर देते हैं। काशी को वो हक हासिल है। स्वाधीनता संग्राम में काशी के क्रांतिकारियों के जोश और जज्बे का ही नतीजा है कि हम आज 70वें साल में हर तरह से आजाद हैं।
शहर का टाउनहाल जंग-ए-आजादी में बनारस की अहम भूमिका का गवाह है। टाउनहाल मैदान में पांच जनवरी, 1932 को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ब्रिटिश हुकूमत ने महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार कर लिया था। विरोध में काशी की जनता तिरंगा लेकर सड़कों पर उतर आई थी। देश को आजाद कराने का जुनून इस कदर था कि पुलिस फायरिंग में घायल होकर एक के गिरने के पहले दूसरा तिरंगे को थाम लेता था। तमाम रुकावटों के बावजूद आजादी के दीवाने जुलूस की शक्ल में टाउनहाल पहुंच गए। वहां भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने फायरिंग कर दी। फायरिंग में श्याम मनोहर, रामानंद और टेंगर ने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। लाठीचार्ज भी किया गया, जिसमें कई क्रांतिकारी घायल हो गए।
बाद में जब 1940 में बापू ने व्यक्तिगत सत्याग्रह का एलान किया तो काशी इसमें भी पीछे नहीं रही। रोजाना कोई न कोई कांग्रेसी गिरफ्तारी देने लगा। सैकड़ों लोगों ने गिरफ्तारियां दीं। उसी समय सत्याग्रह के अधिनायक बने लाल बहादुर शास्त्री ने टाउनहाल में भीड़ जुटाई थी। बीमारी की हालत में पंडित कमलापति त्रिपाठी के घर पर रुककर आंदोलन चलाया था। उस दौरान पंडित कमलापति त्रिपाठी चंदौली के प्रभारी थे। बनारस का प्रतिनिधित्व बाबू संपूर्णानंद कर रहे थे।
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शहर का टाउनहाल जंग-ए-आजादी में बनारस की अहम भूमिका का गवाह है। टाउनहाल मैदान में पांच जनवरी, 1932 को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ब्रिटिश हुकूमत ने महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार कर लिया था। विरोध में काशी की जनता तिरंगा लेकर सड़कों पर उतर आई थी। देश को आजाद कराने का जुनून इस कदर था कि पुलिस फायरिंग में घायल होकर एक के गिरने के पहले दूसरा तिरंगे को थाम लेता था। तमाम रुकावटों के बावजूद आजादी के दीवाने जुलूस की शक्ल में टाउनहाल पहुंच गए। वहां भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने फायरिंग कर दी। फायरिंग में श्याम मनोहर, रामानंद और टेंगर ने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। लाठीचार्ज भी किया गया, जिसमें कई क्रांतिकारी घायल हो गए।
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बाद में जब 1940 में बापू ने व्यक्तिगत सत्याग्रह का एलान किया तो काशी इसमें भी पीछे नहीं रही। रोजाना कोई न कोई कांग्रेसी गिरफ्तारी देने लगा। सैकड़ों लोगों ने गिरफ्तारियां दीं। उसी समय सत्याग्रह के अधिनायक बने लाल बहादुर शास्त्री ने टाउनहाल में भीड़ जुटाई थी। बीमारी की हालत में पंडित कमलापति त्रिपाठी के घर पर रुककर आंदोलन चलाया था। उस दौरान पंडित कमलापति त्रिपाठी चंदौली के प्रभारी थे। बनारस का प्रतिनिधित्व बाबू संपूर्णानंद कर रहे थे।
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