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Varanasi: बनारस के पहले भारत रत्न की जयंती आज, प्रथम पीएम ने भी लिया था जिनका आशीर्वाद, कौन थे डॉ. भगवान दास ?
Thu, 12 Jan 2023 07:54 AM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Thu, 12 Jan 2023 07:54 AM IST
सार
भारत रत्न डॉ. भगवान दास के प्रपौत्र डॉ. पुष्कर रंजन ने बताया कि पिताजी स्व. चितरंजन साह परदादा जी की कहानियां सुनाया करते थे। जीवन के मूलभूत सिद्धांतों में से डॉ. भगवान दास ने सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा को अत्यधिक महत्व दिया। इसमें खासकर महिला शिक्षा पर उनका विशेष ध्यान था।
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भारत रत्न डॉ. भगवान दास
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
देश के पहले भारत रत्न डॉ. भगवान दास ने शिक्षा और राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने स्त्री शिक्षा की अलख जगाने के लिए समाज की बेड़ियों को तोड़ा। इसकी शुरूआत अपने घर से ही की। उनकी शख्सियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री भी उनकी सलाह पर अमल करते थे, उनका सम्मान हृदय से करते थे। 12 जनवरी 1869 को काशी के इस महान दार्शनिक का जन्म शहर के साह परिवार में हुआ था।
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भारत रत्न डॉ. भगवान दास के प्रपौत्र डॉ. पुष्कर रंजन ने बताया कि पिताजी स्व. चितरंजन साह परदादा जी की कहानियां सुनाया करते थे। जीवन के मूलभूत सिद्धांतों में से डॉ. भगवान दास ने सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा को अत्यधिक महत्व दिया। इसमें खासकर महिला शिक्षा पर उनका विशेष ध्यान था। उनका दृढ़ विश्वास था कि हमारे पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं का उत्थान, मुक्ति और सशक्तीकरण शिक्षा के जरिये ही संभव है।
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उन्होंने डॉ. एनी बेसेंट की मदद से सेंट्रल हिंदू स्कूल, वसंता कॉलेज और कृष्णमूर्ति फाउंडेशन राजघाट की स्थापना की। जब सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल की स्थापना हुई तब लड़कियों को शिक्षा के लिए स्कूल भेजना सम्मान की नजर से नहीं देखा जाता था। डॉ. भगवान दास ने इस मिथक को दूर किया और अपनी दोनों बेटियों और बड़ी बहू को पढ़ाई के लिए भेजकर इस पूर्वाग्रह को दूर किया। ये तीनों सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल की पहली छात्राएं थीं। वे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संस्थापक कुलपति रहे। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, चंद्रशेखर आजाद उनके शिष्य रहे।
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पंडित जवाहर लाल नेहरू
- फोटो : अमर उजाला
प्रथम प्रधानमंत्री बनने के बाद आशीर्वाद लेने आए थे नेहरू जी
डॉ. रंजन ने बताया कि पं. जवाहर लाल नेहरू जब देश के पहले प्रधानमंत्री बने तो वह हमारे सिगरा स्थित आवास पर डॉ. भगवान दास का आशीर्वाद लेने आए थे। इसके पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी पं. नेहरू कई बार हमारे घर आए थे। मैंने जिज्ञासावश अपने पिता से दादाजी और नेहरूजी के बीच हुई बातचीत के बारे में पूछा। पिताजी ने बताया, ‘दादाजी ने नेहरूजी से इतना ही कहा था करियप्पा को असम का राज्यपाल बनाओ’। परदादाजी की सोच थी कि अगर मेजर जनरल करियप्पा राज्यपाल बने तो असम की स्थिति में निश्चित सुधार होगा। भगवान दास जी का सुझाव नेहरू जी को बहुत पसंद आया और उन्होंने दिल्ली पहुंचते ही मेजर जनरल करियप्पा को असम का राज्यपाल नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।
डॉ. रंजन ने बताया कि पं. जवाहर लाल नेहरू जब देश के पहले प्रधानमंत्री बने तो वह हमारे सिगरा स्थित आवास पर डॉ. भगवान दास का आशीर्वाद लेने आए थे। इसके पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी पं. नेहरू कई बार हमारे घर आए थे। मैंने जिज्ञासावश अपने पिता से दादाजी और नेहरूजी के बीच हुई बातचीत के बारे में पूछा। पिताजी ने बताया, ‘दादाजी ने नेहरूजी से इतना ही कहा था करियप्पा को असम का राज्यपाल बनाओ’। परदादाजी की सोच थी कि अगर मेजर जनरल करियप्पा राज्यपाल बने तो असम की स्थिति में निश्चित सुधार होगा। भगवान दास जी का सुझाव नेहरू जी को बहुत पसंद आया और उन्होंने दिल्ली पहुंचते ही मेजर जनरल करियप्पा को असम का राज्यपाल नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।