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नफरत की आग को मुहब्बत के पानी से बुझाया जाए

Fri, 01 Apr 2016 02:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी Updated Fri, 01 Apr 2016 02:00 AM IST
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To put out the fire of hatred to love water
सम्मेलन में बोलते मौलाना सैयद अशहद रशीदी
जमीयत उलमा बनारस की ओर से गुरुवार को रेवड़ी तालाब स्थित मदनी मंजिल में राष्ट्रीय एकता सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने अमन का संदेश दिया। मुख्य अतिथि जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना सैयद अशहद रशीदी ने कहा कि नफरत की आग को हवा देने की बजाय हर मजहब के लोग मिलकर उस पर पानी डालने का काम करें। मुल्क में रहने वाले हर इंसान का मकसद यही होना चाहिए कि वो मुल्क की एकता और अखंडता बनाए रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाए।
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संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि काशी मजहबी एकता का दुनिया का सबसे बड़ा उदाहरण है। आज देश भर में मजहबी एकता की चिंता लोगों को सता रही है। आखिर आजादी के अरसा बाद यह सवाल क्यों उठ रहा है। उन्होंने कहा कि हर मजहब के बीच संवाद होना जरूरी है। इससे सद्भाव के साथ एकता, विविधता सब बनी रहेगी। काशी सुमेरु पीठ के स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि कुछ सांप्रदायिक ताकतें धर्म और जाति के नाम पर देश को बांटने का गुनाह कर रही हैं। हमें इनसे सतर्क रहने की जरूरत है।
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कहा कि आरएसएस व अन्य भगवा तंजीमें जिनका राष्ट्र निर्माण में कोई योगदान नहीं है वो दूसरे संप्रदाय व धर्मों को मानने वालों की देशभक्ति का प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। मसीही समुदाय के प्रतिनिधि फादर चंद्रकांत ने कहा कि आज राष्ट्रीय एकता के साथ पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखे जाने की जरूरत है। गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी भाई धरमवीर सिंह ने सभी इंसान एक ईश्वर के पैदा किए हुए हैं। अध्यक्षता करते हुए जमीयत उलमा के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल्लाह नासिर कासमी ने कहा कि प्यार, अमन, सद्भाव ये सब इस्लाम धर्म के मूल में हैं लेकिन कुछ सांप्रदायिक और देश विरोध शक्तियां अपने राजनीतिक मुनाफे के लिए फिरकापरस्ती का काम कर रही हैं। सम्मेलन में रविदास मंदिर के प्रबंधक समिति के सदस्य गुरु गोविंदो, प्रो. अब्दुल्लाह अंसारी ने अपनी बातें रखीं। संचालन इशरत उस्मानी व धन्यवाद ज्ञापन अब्दुल्लाह फैसल ने किया।
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