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पद्म विभूषण गिरिजा देवी का निधनः मौत से कुछ घंटे पहले तक इस बात को लेकर थीं फिक्रमंद
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 25 Oct 2017 01:05 PM IST
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पं. किशन महाराज की याद में पुणे में 29 अक्तूबर को थी प्रस्तुति
- फोटो : FILE PHOTO
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ठुमरी गायिका पद्म विभूषण गिरिजा देवी जीवन के अंतिम समय तक सुरों के साथ रहीं। राग और बंदिश की साधना उनके लिए ओढ़ने बिछाने जैसा था। वह अपने निधन के कुछ घंटे पहले तक तबला सम्राट पं. किशन महाराज के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित संगीत समारोह की तैयारी को लेकर फिक्रमंद थीं लेकिन शायद ईश्वर को ये मंजूर नहीं था।
29 अक्तूबर को पुणे में प. किशन महाराज की याद में आयोजित संगीत समारोह में ठुमरी गायिका को प्रस्तुति देनी थी। यह जानकारी मंगलवार की रात पद्मविभूषण पं. राजन मिश्र ने अमर उजाला से साझा की। उन्होंने बताया कि वह महीने भर से पं. किशन महाराज की याद में पुणे में होने वाले संगीत समारोह को लेकर उत्साहित थीं।
उस समारोह में गिरिजा देवी के साथ राजन मिश्र को प्रस्तुति देनी थी। इसके लिए हवाई जहाज को टिकट करा लिया गया था। राजन मिश्र ने बताया कि वह एक मात्र ऐसी कलाकार थीं जिनके भीतर संगीत पूजा के रूप में समाहित था।
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वह संगीत ये जुड़े किसी भी आग्रह को ठुकराती नहीं थी। उनकी तबीयत खराब थी लेकिन जब उनके सामने प्रस्ताव आया कि पं. किशन महाराज की याद में संगीता समारोह आयोजित किया गया है तो उन्होंने मुस्कुराते हुए राजन मिश्र से कहा था कि ईश्वर पता नहीं क्या करेगा।
जीवन का कोई ठीक नहीं लेकिन वह कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। टिकट करा दीजिए वह कार्यक्रम में खास ठुमरी पेश करेंगी। इसके लिए वह तैयारी भी कर रही थीं लेकिन तीन दिन पहले अचानक बीमारी के चलते अस्पताल जाना पड़ा। अंतत: वह हमेशा के लिए दुनिया से विदा हो गईं।
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29 अक्तूबर को पुणे में प. किशन महाराज की याद में आयोजित संगीत समारोह में ठुमरी गायिका को प्रस्तुति देनी थी। यह जानकारी मंगलवार की रात पद्मविभूषण पं. राजन मिश्र ने अमर उजाला से साझा की। उन्होंने बताया कि वह महीने भर से पं. किशन महाराज की याद में पुणे में होने वाले संगीत समारोह को लेकर उत्साहित थीं।
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उस समारोह में गिरिजा देवी के साथ राजन मिश्र को प्रस्तुति देनी थी। इसके लिए हवाई जहाज को टिकट करा लिया गया था। राजन मिश्र ने बताया कि वह एक मात्र ऐसी कलाकार थीं जिनके भीतर संगीत पूजा के रूप में समाहित था।
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वह संगीत ये जुड़े किसी भी आग्रह को ठुकराती नहीं थी। उनकी तबीयत खराब थी लेकिन जब उनके सामने प्रस्ताव आया कि पं. किशन महाराज की याद में संगीता समारोह आयोजित किया गया है तो उन्होंने मुस्कुराते हुए राजन मिश्र से कहा था कि ईश्वर पता नहीं क्या करेगा।
जीवन का कोई ठीक नहीं लेकिन वह कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। टिकट करा दीजिए वह कार्यक्रम में खास ठुमरी पेश करेंगी। इसके लिए वह तैयारी भी कर रही थीं लेकिन तीन दिन पहले अचानक बीमारी के चलते अस्पताल जाना पड़ा। अंतत: वह हमेशा के लिए दुनिया से विदा हो गईं।
अप्पा जी के निधन से काशी में दौड़ी शोक की लहर
गिरीजा देवी
गिरिजा देवी के सुरों में दमकशी और बेजोड़ लालित्य का समागम था। वह बनारस घराने की प्रतिनिधि गायिका थीं। सुरों का ऐसा साधक बार-बार नहीं पैदा होता है। उनकी जगह कोई नहीं भर पाएगा। गिरिजा देवी के निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत को बहुत बड़ी क्षति हुई है। - पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र, ठुमरी गायक
शास्त्रीय संगीत के इस युग का आज सबसे दुखद दिन है। गिरिजा देवी जी सिर्फ एक गायिका ही नहीं थी, उन्होंने बनारसी ठुमरी को पूरे विश्व में एक अलग पहचान दिलाकर बनारस घराने का गौरव बढ़ाया था। वह प्रेम की प्रतिमूर्ति थी, उन्होंने किसी से कोई अपेक्षा नहीं की बल्कि सबको अपने संगीत का ज्ञान बांटा। - पद्मभूषण पं. राजन मिश्र, खयाल गायक
वे हिंदुस्तान के संगीत की शान थीं और उनका असमय चला जाना असहनीय है। वह हिंदुस्तान की ठुमरी की मल्लिका थीं। गिरिजा देवी जैसी कोई गायिका ना थी, ना है और ना होगी। उनके निधन से गुरु-शिष्य परंपरा की कड़ी को बड़ा तगड़ा झटका लगा है। - पद्मभूषण पं. साजन मिश्र, खयाल गायक
अप्पा जी बनारस घराने की गायकी की तपस्या की प्रतिमूर्ति थीं। गायकी उनकी साधना थी और सांस को बांधने का उनके अंदर जो दम था वह बेजोड़ था। उन्होंने कई बार कहा था कि सोमा मैं तुमसे कुछ भी नहीं लूंगी, तुम सिर्फ मेरे पास आ जाओ। उन्होंने जितना प्यार दिया उतना संगीत जगत में किसी से नहीं मिला। - पद्मश्री सोमा घोष, ठुमरी गायिका
संगीत में ठुमरी की विधा को गिरिजा देवी ने नया आयाम दिया। उन्होंने पूरे विश्व समुदाय के संगीत प्रेमियों को ठुमरी की लोच से परिचित कराया और एक आकर्षण पैदा किया था जिसे लेकर बार-बार लोग बनारस का नाम लेते हैं। वह संगीत की गायकी विधा की देवी थी। उनका जाना पूरे संगीत जगत के लिए असहनीय है। - प्रो. ऋत्विक सान्याल, ध्रुपद गायक
गिरिजा देवी ने हमेशा सुरों की साधना की और जीवन के अंत समय सुरों के साथ रहीं। ऐसी विलक्षण प्रतिभा की वो धनी थी कि उन्होंने पूरे विश्व भर में ठुमरी विधा की एक हजार से अधिक शिष्याओं को तैयार किया और निरंतर गुरु-शिष्य परंपरा को उन्होंने कायम रखा। ऐसे कलाकार के निधन से संगीत जगत की बहुत बड़ी क्षति हुई है। - डॉ. राजेश्वर आचार्य, गायक
गिरिजा देवी आधुनिक काल की महान ठुमरी गायिका थीं। उन्होंने रसूलन बाई से लेकर सिद्धेश्वरी देवी, वागेश्वरी देवी की परंपरा में नई जान फूंकी और पूरब अंग की गायकी का प्रवर्तन किया। संगीत जगत उनका हमेशा नमन करता रहेगा। - पं. शिवनाथ मिश्र, सितार वादक
शास्त्रीय संगीत के इस युग का आज सबसे दुखद दिन है। गिरिजा देवी जी सिर्फ एक गायिका ही नहीं थी, उन्होंने बनारसी ठुमरी को पूरे विश्व में एक अलग पहचान दिलाकर बनारस घराने का गौरव बढ़ाया था। वह प्रेम की प्रतिमूर्ति थी, उन्होंने किसी से कोई अपेक्षा नहीं की बल्कि सबको अपने संगीत का ज्ञान बांटा। - पद्मभूषण पं. राजन मिश्र, खयाल गायक
वे हिंदुस्तान के संगीत की शान थीं और उनका असमय चला जाना असहनीय है। वह हिंदुस्तान की ठुमरी की मल्लिका थीं। गिरिजा देवी जैसी कोई गायिका ना थी, ना है और ना होगी। उनके निधन से गुरु-शिष्य परंपरा की कड़ी को बड़ा तगड़ा झटका लगा है। - पद्मभूषण पं. साजन मिश्र, खयाल गायक
अप्पा जी बनारस घराने की गायकी की तपस्या की प्रतिमूर्ति थीं। गायकी उनकी साधना थी और सांस को बांधने का उनके अंदर जो दम था वह बेजोड़ था। उन्होंने कई बार कहा था कि सोमा मैं तुमसे कुछ भी नहीं लूंगी, तुम सिर्फ मेरे पास आ जाओ। उन्होंने जितना प्यार दिया उतना संगीत जगत में किसी से नहीं मिला। - पद्मश्री सोमा घोष, ठुमरी गायिका
संगीत में ठुमरी की विधा को गिरिजा देवी ने नया आयाम दिया। उन्होंने पूरे विश्व समुदाय के संगीत प्रेमियों को ठुमरी की लोच से परिचित कराया और एक आकर्षण पैदा किया था जिसे लेकर बार-बार लोग बनारस का नाम लेते हैं। वह संगीत की गायकी विधा की देवी थी। उनका जाना पूरे संगीत जगत के लिए असहनीय है। - प्रो. ऋत्विक सान्याल, ध्रुपद गायक
गिरिजा देवी ने हमेशा सुरों की साधना की और जीवन के अंत समय सुरों के साथ रहीं। ऐसी विलक्षण प्रतिभा की वो धनी थी कि उन्होंने पूरे विश्व भर में ठुमरी विधा की एक हजार से अधिक शिष्याओं को तैयार किया और निरंतर गुरु-शिष्य परंपरा को उन्होंने कायम रखा। ऐसे कलाकार के निधन से संगीत जगत की बहुत बड़ी क्षति हुई है। - डॉ. राजेश्वर आचार्य, गायक
गिरिजा देवी आधुनिक काल की महान ठुमरी गायिका थीं। उन्होंने रसूलन बाई से लेकर सिद्धेश्वरी देवी, वागेश्वरी देवी की परंपरा में नई जान फूंकी और पूरब अंग की गायकी का प्रवर्तन किया। संगीत जगत उनका हमेशा नमन करता रहेगा। - पं. शिवनाथ मिश्र, सितार वादक
सोशल मीडिया पर दौड़ी शोक की लहर
twitter tv
बनारस घराने की सशक्त आवाज और संगीत की जीवंत मिसाल मानी जाने वाली गिरिजा देवी के निधन पर सोशल मीडिया में भी शोक की लहर दौड़ पड़ी। गीत से संगीत से जुड़े और इससे इतर लोगों ने भी ट्वीटर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वो रात 10 बजे के बाद ट्वीटर पर ट्रेंड करने लगीं। रात 1:30 बजे तक उनके नाम से छह हजार से ज्यादा ट्वीट किए गए।
गिरिजा देवी जी का निधन बड़ा दुखदायी है। उनके जाने से भारतीय संगीत ने एक महान चेहरा खो दिया है। - वसुंधरा राजे, मुख्यमंत्री राजस्थान
गिरिजा देवी भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए केवल बड़ी गायिका ही नहीं थीं वो बहुमूल्य थी। उनके नहीं रहने से हम सब गरीब हो गए। - जावेद अख्तर , लेखक और कवि
भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रसिद्ध गायिका का नहीं रहना बड़ा दुखदायी है। यह एक युग की समाप्ति है।- पद्म भूषण अमजद अली खान, सरोद वादक
महान विदुषी गिरिजा देवी के निधन से भारतीय संगीत को बड़ा नुकसान हुआ है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। प्रणाम। - पंकज उधास, गजल गायक
एक युग की समाप्ति। भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए बहुत बड़ी क्षति। भागवान आत्मा को शांति दे। - कुमार सानू, बॉलीवुड गायक
एक युग अब समाप्त हो गया। हम सबकी प्रिय गिरिजा देवी जी अब दूसरे आयामों को पाने निकल गईं, उनकी आवाज इस धरा पर गूंजती रहेगी। -
शंकर महादेवन, संगीत निर्देशक व गायक
भारतीय संगीत संस्कृति के लिए बहुता बड़ी क्षति। आपकी जगह कोई नहीं ले सकता। श्रद्धांजलि। - शोभा मुद्गल, गायिका
क्वीन ऑफ ठुमरी नहीं रहीं। वो संगीत की एक जेनरेशन थी... लीजेंड थी... और इंस्टिट्यूशन थीं। - देवजनी बनर्जी, संगीतकार
बनारस घराने की गायिका अप्पा जी नहीं रहीं। अब दीवाना किए श्याम हम किससे सुनेंगे। श्रद्धांजलि। - शर्मिष्ठा मुखर्जी
अप्पा साहब, काशी की पहचान थीं। सादगी, चंदन का टीका, पान, संगीत की आराध्य थी। बनारसी भाषा मंच पर बोलना लोगों के बीच.. श्रद्धांजलि...। - माही शर्मा