Kashi Vishwanath: तीन लाख भक्तों ने 5 द्वार से किए बाबा के दर्शन, आज भी होगी लाखों की भीड़; जानें भविष्यवाणी
New Year 2026: नए साल की पूर्व संध्या पर वाराणसी में खचाखच भीड़ रही। प्रमुख स्थानों पर पर्यटकों ने जमकर माैज-मस्ती की। वहीं, काशी विश्वनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं ने भी दर्शन-पूजन किए। इस वजह से बाबा के स्पर्श दर्शन बंद हैं।
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Varanasi News: साल के अंतिम दिन बुधवार को 3 लाख भक्तों ने पांच द्वार से बाबा काशी विश्वनाथ जी के दर्शन किए। वहीं 66 भक्तों ने आनलाइन माध्यम से 66 हजार रुपये दान किए। एक भक्त को दर्शन करने में औसत करीब दो घंटे लगे। गंगाद्वार समेत सभी गेटों पर भक्तों की भारी भीड़ रही। नववर्ष के मौके पर बृहस्पतिवार को भी दर्शन की इसी तरह की व्यवस्था रहेगी। मंदिर प्रशासन की ओर से लागू प्रोटोकॉल के तहत विशेष दर्शन और स्पर्श दर्शन पर प्रतिबंध रहेगा।
मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से भीड़ बढ़ी है। 20 लाख से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं। भक्तों को कोई असुविधा न हो इसके लिए बैरिकेडिंग की गई है। बताया कि सिर्फ पिछले तीन दिनों में 11 लाख लोगों ने बाबा के दर्शन किए हैं।
मंदिर प्रशासन द्वारा लागू प्रोटोकॉल के तहत ही श्रद्धालुओं को दर्शन कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दो जनवरी तक यह व्यवस्थाएं लागू रहेंगी। तीन जनवरी को समीक्षा के बाद तय होगा कि आगे इसे और बढ़ाया जाए या नहीं। बताया कि नए साल पर कोई नई व्यवस्था या कार्यक्रम नहीं होगा। आनलाइन दान में सबसे ज्यादा 21 हजार और सबसे कम एक रुपये ऑनलाइन यूपीआई के द्वारा दिए गए।
भारत की अर्थव्यवस्था पहले से अच्छी होगी, अप्रैल 2026 के बाद रौद्र संवत्सर... बढ़ सकती हैं सड़क दुर्घटनाएं
साल 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था पहले से अच्छी होने की संभावना है। इस साल अप्रैल 2026 के बाद रौद्र संवत्सर होने के चलते सड़क दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हो सकती है। आंधी और भूकंप के साथ ही मानसूनी बारिश ज्यादा हो सकती है। इस साल युवा वर्ग और नवविवाहितों का जीवन मानसिक अवसादों के दौर से गुजर सकता है। उन्हें संभालने की जरूरत होगी। लोगों में सहिष्णुता कम हो सकती है।
सराफा बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। सोने-चांदी के दाम ऊपर जा सकते हैं। ज्योतिषीय स्थितियां बताती हैं कि विकसित भारत@2047 के मद्देनजर भारत अपना जोर बढ़ाएगा और आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। जीडीपी में और सुधार होगा। हालांकि पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों में इस साल भी कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। सत्ता और विपक्ष की चाल में भी बदलाव दिखेगा।
व्यक्तिगत स्तर के अलावा सत्ता और विपक्षी नेताओं की चाल में भी काफी उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। राजनीतिक रूप से देश में थल-पुथल होने की संभावना है। विपक्षी पार्टियां पहले से अधिक मजबूती से सरकार को घेरेंगी। देश में कई तरह के अनावश्यक आंदोलन भी शुरू हो सकते हैं, लेकिन सत्ता पक्ष इन्हें मजबूती से संभालेगा और बेवजह के मुद्दों को तूल नहीं देगा। हर परिस्थिति में काम करने का तरीका भारत के पास है।