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तीन दिवसीय काली मठ संगीत समारोह का हुआ समापन
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कालीमठ संगीत समारोह की अंतिम निशा में मां काली का अड़भंगी शृंगार आकर्षण का केंद्र रहा। गायन, वादन और नृत्य के साथ अंतिम निशा में कलाकारों ने माता के दरबार में हाजिरी लगाई। शनिवार को मां काली का षोडशोपचार विधि से पूजन के बाद रजत नरमुंड की प्रतीकात्मक माला और बारे से शृंगार किया गया। माता के विविध पकवानों का भोग अर्पित किया गया।
लक्सा स्थित लक्ष्मी कुंड स्थित प्राचीन कालीमठ में तीन दिवसीय संगीत समारोह की अंतिम निशा में गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में डॉ. संदीप राव केवले, डॉ. शानिष ज्ञावाली और डॉ. आनंद मिश्र ने तबला, बांसुरी और सितार के माध्यम से प्रस्तुति दी। मिर्जापुर के मनीष कुमार शर्मा ने कथक नृत्य के माध्यम से राग मधुवंती में काली स्तोत्र देवी स्वरूपिणी अनंत रूपिणी मां... की प्रस्तुति से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। डॉ. अमलेश शुक्ला अमन ने नंगे-नंगे पांव से चलकर कालीमठ में आ गई, भाव की भूखी मैया सच्चे भक्तों पर लुभा गई... की प्रस्तुति दी। आस्था शुक्ला ने देवी गीत पचरा सुना करके अपनी हाजिरी लगाई। इस दौरान पं ठाकुर प्रसाद दुबे, पं. शिवजी महाराज, प्रो अजीत कुमार शुक्ला, डॉ. दयाशंकर मिश्र, आलोक शर्मा, अंबरीश सिंह भोला आदि मौजूद रहे।
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लक्सा स्थित लक्ष्मी कुंड स्थित प्राचीन कालीमठ में तीन दिवसीय संगीत समारोह की अंतिम निशा में गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में डॉ. संदीप राव केवले, डॉ. शानिष ज्ञावाली और डॉ. आनंद मिश्र ने तबला, बांसुरी और सितार के माध्यम से प्रस्तुति दी। मिर्जापुर के मनीष कुमार शर्मा ने कथक नृत्य के माध्यम से राग मधुवंती में काली स्तोत्र देवी स्वरूपिणी अनंत रूपिणी मां... की प्रस्तुति से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। डॉ. अमलेश शुक्ला अमन ने नंगे-नंगे पांव से चलकर कालीमठ में आ गई, भाव की भूखी मैया सच्चे भक्तों पर लुभा गई... की प्रस्तुति दी। आस्था शुक्ला ने देवी गीत पचरा सुना करके अपनी हाजिरी लगाई। इस दौरान पं ठाकुर प्रसाद दुबे, पं. शिवजी महाराज, प्रो अजीत कुमार शुक्ला, डॉ. दयाशंकर मिश्र, आलोक शर्मा, अंबरीश सिंह भोला आदि मौजूद रहे।
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