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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Three convicts sentenced 10 years each for smuggling heroin worth 2 crore case dates back 25 years

UP: दो करोड़ की हेरोइन तस्करी में तीन दोषियों को 10-10 साल की सजा, 25 साल पुराना है मामला; कार्रवाई

Sun, 21 Jun 2026 01:34 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 21 Jun 2026 01:34 AM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 25 वर्ष पुराने हेरोइन तस्करी मामले में जमील अहमद, सुरेश कांस्यकार और राकेश वर्मा को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वर्ष 2001 में कस्टम विभाग ने चेतक होटल के पास 995 ग्राम हेरोइन बरामद की थी, जिसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये आंकी गई थी।

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Three convicts sentenced 10 years each for smuggling heroin worth 2 crore case dates back 25 years
25 साल पुराना है मामला। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Varanasi News: मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी-14) के न्यायाधीश मनोज कुमार की अदालत ने 25 वर्ष पुराने हेरोइन तस्करी के मामले में तीन दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मुख्य आरोपी जमील अहमद तथा सह-आरोपी सुरेश कांस्यकार उर्फ सुन्ना और राकेश वर्मा उर्फ पिंटू, निवासी गाजीपुर को दोषी करार देते हुए यह दंड दिया।

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अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2001 में सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग को सूचना मिली थी कि गाजीपुर का एक गिरोह बड़ी मात्रा में हेरोइन लेकर वाराणसी के चेतक होटल के पास किसी ग्राहक को डिलीवरी देने आने वाला है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए कस्टम विभाग ने एक विशेष टीम गठित की और सादे कपड़ों में अधिकारियों को मौके पर तैनात किया।
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टीम ने चेतक होटल के आसपास घेराबंदी कर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। कार्रवाई के दौरान राकेश वर्मा, सुरेश कांस्यकार समेत तीन लोगों को पकड़ लिया गया। तलाशी में उनके कब्जे से लगभग एक किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई, जिसमें 995 ग्राम उच्च श्रेणी की हेरोइन पाई गई। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये आंकी गई थी।

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पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया था कि हेरोइन की खेप गाजीपुर निवासी मनोज दुबे उर्फ नेता उर्फ पंडित को सौंपी जानी थी। जांच के दौरान कई संदिग्ध ड्रग तस्करों के फोन नंबर और पते भी बरामद हुए थे। आरोपियों ने यह भी बताया था कि खेप की डिलीवरी के एवज में उन्हें प्रति किलोग्राम 10 हजार रुपये कमीशन मिलने वाला था।

जांच में सामने आया कि इस पूरे तस्करी नेटवर्क का मास्टरमाइंड जमील अहमद था, जो वाराणसी के गिरजाघर चौराहे के पास किराये के मकान में रहता था। वह राजस्थान के सप्लायर विजय सिंह से हेरोइन खरीदकर पूर्वांचल में इसकी आपूर्ति करता था।

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही एनडीपीएस एक्ट के तहत अन्य दंडात्मक आदेश भी पारित किए।

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