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काशी में कटे हजारों पेड़, पर्यावरण चौपट

Sun, 05 Jun 2016 02:16 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी Updated Sun, 05 Jun 2016 02:16 AM IST
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Thousands of trees cut in Kashi, environmental collapse
environmental collapse
विकास की दौड़ में हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से काशी का पर्यावरण चौपट हो गया है। कॉलोनियों, सड़कों के विस्तार के लिए नदी, तालाब, कुंड पाट दिए गए। बाबतपुर फोरलेन और रिंग रोड निर्माण के चलते हजारों पेड़ काटे गए लेकिन लगे एक भी नहीं। विशेषज्ञों के मुताबिक पर्यावरण की अनदेखी के चलते पिछले दशक भर में शहर के सामान्य तापमान में एक डिग्री की वृद्धि हो चुकी है। इसका असर मौसम पर भी पड़ रहा है। पौधरोपण और जल तीर्थों के पुनर्जीवन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में काशी की पर्यावरणीय दशा भयावह हो जाएगी। 
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पिछले एक दशक में काशी को हरा-भरा बनाने के नारे तो बहुत जोरशोर से गूंजे लेकिन हकीकत में हरियाली कोसों दूर होती गई। शहर में सड़कों के चौड़ीकरण और कॉलोनियां बसाने में भी पेड़ों की जमकर कटान हुई है। रवींद्रपुरी, सुंदरपुर, ककरमत्ता मार्ग पर भी सैकड़ों पेड़ काट डाले गए लेकिन लगाए नहीं गए। इसी तरह रिंग रोड निर्माण के चलते पिछले दो वर्ष में प्लांटेशन तक उजाड़ दिए गए। साझा संस्कृति मंच के एक सर्वेक्षण के अनुसार रिंग रोड के लिए पिछले दो वर्षों में बाबतपुर मार्ग, गाजीपुर मार्ग, दानगंज मार्ग पर 16 हजार पेड़ काटे गए हैं। अभी इन मार्गों पर 3500 पेड़ कटने की प्रक्रिया में हैं। इसी तरह, बाबतपुर फोरलेन के निर्माण में हजारों पेड़ कट गए। आशापुर-सरैया मार्ग पर भी साइकिल पथ के निर्माण में करीब 1000 से अधिक पेड़ काटे जाएंगे।
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पेड़ों की इस कटान का असर पर्यावरण पर पड़ा है। बीएचयू के भूगोल विभाग के प्रोफेसर और मौसम विज्ञानी एसएन पांडेय का कहना है कि हरे पेड़ों की बड़े पैमाने पर हुई कटान से पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ा है। हाल के वर्षों में विकास योजनाओं के नाम पर हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हुई लेकिन उसकी भरपाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पिछले एक दशक में वाराणसी का सामान्य तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 39 डिग्री पर पहुंच गया है। इससे मौसम में असंतुलन पैदा होने लगा है। इस असंतुलन को सुधारने के लिए पौधरोपण और जल तीर्थों के पुनर्जीवन के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यदि जल्द इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली चुनौतियों से निबटना मुश्किल हो जाएगा। 
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