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इस बार तिलिस्म टूटेगा या होगी सेंधमारी

Tue, 01 Mar 2022 12:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 12:25 AM IST
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This time the magic will be broken or there will be a burglary
गाजीपुर सदर
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ग्राउंड रिपोर्ट
इस बार टूटेगा तिलिस्म या होगी सेंधमारी
त्रिकोणीय मुकाबले में पार्टी और जातियों के वोट बैंक के बल पर हो रही जंग
नीतीश सिंह
गाजीपुर। सदर सीट के इलाके को पौहारी बाबा आश्रम, लार्ड कार्नवालिस का मकबरा और अफीम फैक्ट्री से बड़ी पहचान मिली है। इसके साथ ही इस सीट का चुनावी सफर भी अजीबोगरीब रहा है। पिछले 17 विधानसभा चुनावों में किसी प्रत्याशी ने इस सीट लगातार दो बार चुनाव जीतने का सौभाग्य नहीं प्राप्त किया है। चुनाव अपने आखिर दौर में है और मतदान से पूर्व यहां का मामला तिकोना हो गया है। ऐसे में तीनों प्रत्याशी दलगत, जातिगत और व्यक्तिगत आधार पर अच्छी लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं।
भाजपा ने दोबारा इस सीट पर राज्य मंत्री डा. संगीता बलवंत पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर सपा ने जै किशन साहू और बसपा ने डा. राजकुमार गौतम को मैदान में उतारा है। अगर भाजपा की संगीता बलवंत इस बार जीतने में कामयाब हो जाती हैं तो सदर सीट को लेकर सात दशक पुराना तिलिस्म भी टूटेगा। संगीता बलवंत सदर सीट पर सबसे अधिक मतदाता वाले बिंद जाति से आती हैं। उनके पास दलगत वैश्य, राजपूत और ब्राह्मण परंपरागत मतदाता हैं। ऐसे ही सपा के पास यादव और मुस्लिमों का वोट है। सपा प्रत्याशी जै किशन साहू वैश्य समाज से आते हैं। साथ ही वैश्य समाज के संगठनों के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी होने के साथ दर्जा प्राप्त मंत्री रहे हैं। बसपा से राजकुमार गौतम के पास हरिजन के साथ राजपूत और बिंद वोटों पर उनके प्रभाव मानकर चला जा रहा है। क्योंकि 2012 के विधानसभा चुनाव में सदर सीट पर ही राजकुमार गौतम और विजय मिश्रा के बीच करारा मुकाबला हुआ था। जिसमें गौतम 250 से भी कम वोटों से चुनाव हारे थे।
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तीनों प्रत्याशी अपने-अपने किले को मजबूत करने में लगे हैं। ऐसे में इस बार सदर सीट पर चुनावी जीत-हार का अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहने के कयास लगाए जा रहे हैं। इस सीट पर भाजपा सपा, भाजपा और बसपा के प्रत्याशी मजबूत जनाधार के साथ मैदान में है। सपा और बसपा के प्रत्याशी इस बार वैश्य, राजपूत और बिंद वोटों में सेंधमारी करने की जुगत में उतारे गए हैं। इस आधार पर फिलहाल भाजपा को चुनौती मिलती दिख रही है, लेकिन कुशवाहा वोट की आस बढ़ी है।
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वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा की संगीता बलवंत को बिंद, वैश्य, राजपूत और ब्राह्मणों का एकतरफा वोट मिला था। जिसकी बदौलत सपा के राजेश कुशवाहा के मुकाबले भाजपा प्रत्याशी को करीब 31 हजार वोटों से जीत मिली थी। बसपा के संतोष यादव ने भी अच्छा वोट पाया था। जो सपा प्रत्याशी से साढ़े चार हजार वोट ही कम थे। इस बार सदर सीट के परंपरागत मतदाता कई फाड़ में बंटते दिख रहे हैं। जिससे चुनाव का आधार जातिवाद और विकासवाद के बीच झूल रही है। ऐसे में मतदाता किसे चुनता है और इसका फायदा किसे मिलता है। यह 10 मार्च को ही पता चलेगा। (संवाद)

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कुशवाहा, साहू और बिंद के हाथों में फैसला
इस बार सपा ने जनपद में किसी कुशवाहा को प्रत्याशी नहीं बनाया है वहीं, भाजपा ने जंगीपुर सीट से इकलौता कुशवाहा प्रत्याशी उतारा है। भाजपा ने किसी वैश्य को प्रत्याशी नहीं बनाया है तो सदर सीट से सपा ने वैश्य समुदाय से इकलौता प्रत्याशी उतारा है। इसी तरह महादलित वर्ग के रामराज बनवासी भाजपा की ओर से जखनियां सीट पर इकलौते प्रत्याशी हैं। नतीजतन सदर सीट पर बिंद, अनुसूचित जाति, वैश्य (साहू) और कुशवाहा वोट अहम भूमिका निभाने वाले हैं जो किसी का खेल बना बिगाड़ सकते हैं।
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2017 के चुनाव परिणाम
भाजपा- संगीता बलवंत- 92090 मत - 43.12 फीसदी
सपा- राजेश कुशवाहा- 59483 मत - 27.85 फीसदी
बसपा- संतोष यादव- 54987 मत -25.75 फीसदी
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वोटों का गणित
कुल मतदाता- 362026
पुरुष- 189821
महिला- 172183
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जातिगत समीकरण
बिंद- 65 हजार
अनुसूचित - 50 हजार
यादव- 52 हजार
वैश्य- 40 हजार
राजपूत- 30 हजार
मुस्लिम-25 हजार
कुशवाहा-25 हाजर
ब्राह्मण- 18 हजार
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