{"_id":"59b7bdf74f1c1bf07f8b6484","slug":"this-golden-ramayan-start-with-word-bismillah","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मिसालः सोने के पानी से लिखी इस रामायण का पहला शब्द है ‘बिस्मिल्लाह’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिसालः सोने के पानी से लिखी इस रामायण का पहला शब्द है ‘बिस्मिल्लाह’
amarujala.com, written by- तबस्सुम
Updated Wed, 13 Sep 2017 02:02 PM IST
विज्ञापन
टाउनहाल में लगे संस्कृत पुस्तक मेले में पहली बार उपलब्ध
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फारसी भाषा में सोने के पानी से लिखी इस रामायण का पहला शब्द है ‘बिस्मिल्लाह’। जैसे राम सिर्फ हिंदुओं के देवता नहीं, प्राचीन संस्कृति के प्रतिबिंब हैं, ठीक वैसे ही दुनिया की इकलौती ये रामायण भी गंगा-जमुनी तहजीब का आइना है।
इसके शुरुआत के तीन पन्ने सोने के पानी से लिखे हैं। दरअसल यह फारसी में लिखी रामायण का हिंदी अनुवाद है जिसे रामपुर रजा लाइब्रेरी ने प्रकाशित किया है। टाउनहॉल में लगे देश के पहले राष्ट्रीय संस्कृत पुस्तक मेले में पहली बार फारसी का ये अनुवादित पवित्र ग्रंथ पाठकों के लिए उपलब्ध है।
कौमी यकजहती का पैगाम देने के लिए वाल्मीकि की संस्कृत में लिखित रामायण को सन् 1715 में सुमेर चंद ने फारसी में अनूदित किया था। उन्होंने ही इसकी शुरुआत ‘बिस्मिल्लाह’ से की। तीन पन्ने में उन्होंने इसकी प्रस्तावना सोने के पानी से लिखी थी।
विज्ञापन
वर्ष 2011 में इस रामायण का अनुवाद हिंदी में प्रो. शाह अब्दुस्सलाम और डॉ. वकारुल हसन सिद्दीकी ने किया। देश के कुछ खास पुस्तकालयों में शुमार रामपुर रजा लाइब्रेरी ने इसे प्रकाशित किया।
ये दुनिया की इकलौती रामायण इस लिहाज से भी है कि इसमें चित्रों को भी शामिल किया गया है। तीन खंड में प्रकाशित इस रामायण में 258 चित्र हैं।
विज्ञापन
इसके शुरुआत के तीन पन्ने सोने के पानी से लिखे हैं। दरअसल यह फारसी में लिखी रामायण का हिंदी अनुवाद है जिसे रामपुर रजा लाइब्रेरी ने प्रकाशित किया है। टाउनहॉल में लगे देश के पहले राष्ट्रीय संस्कृत पुस्तक मेले में पहली बार फारसी का ये अनुवादित पवित्र ग्रंथ पाठकों के लिए उपलब्ध है।
विज्ञापन
कौमी यकजहती का पैगाम देने के लिए वाल्मीकि की संस्कृत में लिखित रामायण को सन् 1715 में सुमेर चंद ने फारसी में अनूदित किया था। उन्होंने ही इसकी शुरुआत ‘बिस्मिल्लाह’ से की। तीन पन्ने में उन्होंने इसकी प्रस्तावना सोने के पानी से लिखी थी।
विज्ञापन
वर्ष 2011 में इस रामायण का अनुवाद हिंदी में प्रो. शाह अब्दुस्सलाम और डॉ. वकारुल हसन सिद्दीकी ने किया। देश के कुछ खास पुस्तकालयों में शुमार रामपुर रजा लाइब्रेरी ने इसे प्रकाशित किया।
ये दुनिया की इकलौती रामायण इस लिहाज से भी है कि इसमें चित्रों को भी शामिल किया गया है। तीन खंड में प्रकाशित इस रामायण में 258 चित्र हैं।
इस मुल्य में उपलब्ध है सोने के पानी से लिखी रामायण
तीन खंड के इस रामायण में 258 चित्र भी हैं शामिल
- फोटो : अमर उजाला
लाइब्रेरी के इन्फार्मेशन असिस्टेंट फैसल खान ने बताया कि रामपुर रजा लाइब्रेरी ने पहली बार बनारस में किसी पुस्तक मेले में भागीदारी की है। तीन खंड की इस रामायण का मूल्य पांच हजार रुपये है लेकिन छूट के बाद यहां साढ़े तीन हजार रुपये में मिल रही है।
बीएचयू के ही प्रो. सैयद हसन अब्बास को राज्यपाल ने इस लाइब्रेरी का निदेशक बनाया है। पुस्तक मेले के इस स्टॉल पर मुगल काल से जुड़ी पुस्तकों का खास संग्रह है। बाबर से लेकर हुमायूं और 1857 के इतिहास से जुड़ी किताबें हैं।
17 मई 2015 को रजा लाइब्रेरी की ही पुस्तक ‘जमीउत तवारीख’ की प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी मंगोलिया यात्रा पर ले गए थे और वहां के राष्ट्रपति को तोहफे में दी थी।
बीएचयू के ही प्रो. सैयद हसन अब्बास को राज्यपाल ने इस लाइब्रेरी का निदेशक बनाया है। पुस्तक मेले के इस स्टॉल पर मुगल काल से जुड़ी पुस्तकों का खास संग्रह है। बाबर से लेकर हुमायूं और 1857 के इतिहास से जुड़ी किताबें हैं।
17 मई 2015 को रजा लाइब्रेरी की ही पुस्तक ‘जमीउत तवारीख’ की प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी मंगोलिया यात्रा पर ले गए थे और वहां के राष्ट्रपति को तोहफे में दी थी।